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अन्नदाताओं को अब इमदाद बांटने की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Tue, 21 Apr 2015 12:19 AM IST
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मौसम की मार से कराह रहे अन्नदाताओं को इमदाद बांटने की तैयारी जिले में शुरू हो गई है। मदद के लिए पहली किश्त के रूप में प्रशासन को 2.50 करोड़ मिला है। यह रकम प्रभावितों को जल्द मिले, इसके लिए गांव-गांव बैठक करके अफसर कर्मचारियों से पीड़ित किसानों की सूची तैयार कर रहे हैं। सोमवार को एसडीएम मंझनपुर ने चम्पहा समेत कई गांवों में बैठक करके सूची बनाई, उसे ग्रामीणों के सामने पढ़कर सुनाया भी गया।
मार्च-अप्रैल में तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बेमौसम बारिश ने जिलेभर के किसानों को तबाह करके रख दिया है। बारिश में गिरकर बर्बाद हुई गेहूं की फसलों में तो 70 फीसदी से ज्यादा का नुकसान हुआ है। बर्बादी के इस सदमे में किसानों की सांसें भी थम रही हैं। गम में जिले के 14 किसानों का दम टूट चुका है। वहीं जिला प्रशासन के सर्वे में सामने आया है कि मौसम की मार से जिले के करीब 1.50 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। उनकी करीब 71 करोड़ रुपये की फसल का सत्यानाश हुआ है। प्रशासन की भेजी गई इस रिपोर्ट के आधार पर शासन से किसानों को मदद मुहैया कराने के लिए पहली किश्त के रूप में 2.50 करोड़ रुपये मिला है।
किश्त आते ही एसडीएम और अन्य राजस्व अफसर, कर्मचारी पीड़ित किसानों की सूची तैयार करके गांव-गांव बैठक करके इसके सत्यापन में जुटे हैं। सोमवार को भी करारी, चम्पहा आदि गांवों में अफसरों ने किसानों के साथ बैठक करके सूची तैयार की। उसे पढ़कर किसानों को सुनाया। एसडीएम मंझनपुर नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि सरसवां ब्लाक के चम्पहा गांव में 57 छोटे और 3 बड़े काश्तकारों की फसलें मौसम की भेंट चढ़ी हैं। इस गांव के काश्तकारों को 2.31 लाख मुआवजे की चेक तैयार की जा रही है। डीएम राजमणि यादव ने बताया कि जल्द ही तीनों तहसील के प्रभावित किसानों की सूची का सत्यापन कराकर चेक तैयार कराया जा रहा है। गांव-गांव शिविर लगाकर मुआवजे का चेक अन्नदाताओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
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मौसम की मार से जिले की 71 करोड़ रुपये से भी अधिक फसल बर्बाद हुई है। खुद जिला प्रशासन ने किसानों को मुआवजे के लिए 71 करोड़ की मांग शासन से की है। पर, अभी सिर्फ 2.50 करोड़ रुपये ही शासन से मिला है। फसलों की हुई बर्बादी को देखते हुए यह रकम ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है। साथ ही जल्द ही और रकम यदि उपलब्ध नहीं कराई गई, तो प्रशासन को किसानों को मदद बांटने में खासी परेशानी भी झेलनी पड़ेगी। साथ ही इमदाद पाने के लिए किसानों के बीच भी मारामारी होगी।
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मार्च-अप्रैल में तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बेमौसम बारिश ने जिलेभर के किसानों को तबाह करके रख दिया है। बारिश में गिरकर बर्बाद हुई गेहूं की फसलों में तो 70 फीसदी से ज्यादा का नुकसान हुआ है। बर्बादी के इस सदमे में किसानों की सांसें भी थम रही हैं। गम में जिले के 14 किसानों का दम टूट चुका है। वहीं जिला प्रशासन के सर्वे में सामने आया है कि मौसम की मार से जिले के करीब 1.50 लाख किसान प्रभावित हुए हैं। उनकी करीब 71 करोड़ रुपये की फसल का सत्यानाश हुआ है। प्रशासन की भेजी गई इस रिपोर्ट के आधार पर शासन से किसानों को मदद मुहैया कराने के लिए पहली किश्त के रूप में 2.50 करोड़ रुपये मिला है।
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किश्त आते ही एसडीएम और अन्य राजस्व अफसर, कर्मचारी पीड़ित किसानों की सूची तैयार करके गांव-गांव बैठक करके इसके सत्यापन में जुटे हैं। सोमवार को भी करारी, चम्पहा आदि गांवों में अफसरों ने किसानों के साथ बैठक करके सूची तैयार की। उसे पढ़कर किसानों को सुनाया। एसडीएम मंझनपुर नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि सरसवां ब्लाक के चम्पहा गांव में 57 छोटे और 3 बड़े काश्तकारों की फसलें मौसम की भेंट चढ़ी हैं। इस गांव के काश्तकारों को 2.31 लाख मुआवजे की चेक तैयार की जा रही है। डीएम राजमणि यादव ने बताया कि जल्द ही तीनों तहसील के प्रभावित किसानों की सूची का सत्यापन कराकर चेक तैयार कराया जा रहा है। गांव-गांव शिविर लगाकर मुआवजे का चेक अन्नदाताओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
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मौसम की मार से जिले की 71 करोड़ रुपये से भी अधिक फसल बर्बाद हुई है। खुद जिला प्रशासन ने किसानों को मुआवजे के लिए 71 करोड़ की मांग शासन से की है। पर, अभी सिर्फ 2.50 करोड़ रुपये ही शासन से मिला है। फसलों की हुई बर्बादी को देखते हुए यह रकम ऊंट के मुंह में जीरा के सामान है। साथ ही जल्द ही और रकम यदि उपलब्ध नहीं कराई गई, तो प्रशासन को किसानों को मदद बांटने में खासी परेशानी भी झेलनी पड़ेगी। साथ ही इमदाद पाने के लिए किसानों के बीच भी मारामारी होगी।