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Kaushambi News: मां झारखंडी मंदिर की नींव से निकली प्राचीन प्रतिमा
Wed, 17 Jul 2024 04:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 17 Jul 2024 04:38 AM IST
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पश्चिम शरीरा स्थित झारखंडी मंदिर में खोदाई के दौरान निकली प्राचीन मूर्ति। संवाद
पूरब-पश्चिमशरीरा स्थित मां झारखंडी के प्राचीन मंदिर की खोदाई के दौरान एक प्राचीन प्रतिमा मिली। भगवान नारायण की इस प्रतिमा को चबूतरे पर रखकर श्रद्धालुओं ने पूजन शुरू कर दिया है।
नगर पंचायत पूरब-पश्चिमशरीरा स्थित मां झारखंडी का प्राचीन मंदिर काफी जर्जर हो गया था। पूरबशरीरा के धीरेंद्र सिंह की ओर से इसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। बीते दिनों विधि विधान से भूमिपूजन के बाद इसका काम शुरू हुआ था। मंदिर की पुरानी दीवारें तोड़कर नींव की खोदाई कराई जा रही है। खोदाई के दौरान ही मंगलवार को नींव से एक प्राचीन मूर्ति निकली। इस खबर के फैलने के बाद आसपास के लोग एकत्र हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रतिमा भगवान नारायण की है। इसी के साथ लोगों ने प्रतिमा को चबूतरे पर रखकर पूजन भी शुरू कर दिया। मंदिर समिति के अध्यक्ष अवनीश द्विवेदी ने बताया कि झारखंड के राजा उदयन के कोई संतान नहीं थी। कहा जाता है कि एक बार रीवा पर आक्रमण करने के लिए जाते समय वह यहां रुके थे। इसी दौरान मां झारखंडी की मूर्ति स्थापित कराई थी। जिसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उन्होंने बताया कि पहले भी यहां खोदाई के दौरान प्रतिमाएं मिली हैं।
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नगर पंचायत पूरब-पश्चिमशरीरा स्थित मां झारखंडी का प्राचीन मंदिर काफी जर्जर हो गया था। पूरबशरीरा के धीरेंद्र सिंह की ओर से इसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। बीते दिनों विधि विधान से भूमिपूजन के बाद इसका काम शुरू हुआ था। मंदिर की पुरानी दीवारें तोड़कर नींव की खोदाई कराई जा रही है। खोदाई के दौरान ही मंगलवार को नींव से एक प्राचीन मूर्ति निकली। इस खबर के फैलने के बाद आसपास के लोग एकत्र हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रतिमा भगवान नारायण की है। इसी के साथ लोगों ने प्रतिमा को चबूतरे पर रखकर पूजन भी शुरू कर दिया। मंदिर समिति के अध्यक्ष अवनीश द्विवेदी ने बताया कि झारखंड के राजा उदयन के कोई संतान नहीं थी। कहा जाता है कि एक बार रीवा पर आक्रमण करने के लिए जाते समय वह यहां रुके थे। इसी दौरान मां झारखंडी की मूर्ति स्थापित कराई थी। जिसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। उन्होंने बताया कि पहले भी यहां खोदाई के दौरान प्रतिमाएं मिली हैं।
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