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सभी दलों ने बदले अपने जिलाध्यक्ष

Tue, 31 Dec 2019 12:30 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 31 Dec 2019 12:30 AM IST
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all parties changed the district  prsidents
प्रमुख दलों ने नए चेहरों पर जताया विश्वास, सौंपी कमान
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भाजपा, सपा, बसपा तथा कांग्रेस ने बदल दिए जिलाध्यक्ष
अलविदा-2019
वर्ष 2019 राजनीतिक उठापटक के लिए जाना जाएगा। इस साल जिले में सत्ताधारी दल भाजपा, प्रमुख विपक्षी पार्टी सपा, बसपा एवं कांग्रेस ने नेतृत्व में बदलाव किया। खास बात ये रही कि चारों दलों ने नए चेहरों पर दांव लगाया। इसी तरह से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर भी अप्रत्याशित रूप से भाजपा ने कब्जा कर लिया। सभी नई ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं।
राजनीति के लिहाज से वर्ष 2019 जिले में बदलावों के लिए याद किया जाएगा। बदलाव की शुरूआत सबसे पहले अक्तूबर में कांग्रेस ने किया। तलत अजीम की जगह पार्टी ने अप्रत्याशित रूप से युवा नेता अरुण विद्यार्थी को जिले की कमान सौंपी। एकदम नए और युवा चेहरे की ताजपोशी को लेकर शुरूआती दौर में खासा विरोध हुआ। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्तीफ तक की धमकी दे डाली थी। पर, अपनी कार्यशैली के दम पर युवा जिलाध्यक्ष ने गुजरे तीन महीने के भीतर ही परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर लिया। अब सबकुछ सामान्य चल रहा है। इसके बाद भाजपा ने महीने भर की माथापच्ची के बाद महिला मोर्चा की क्षेत्रीय अध्यक्ष अनीता त्रिपाठी को जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी। भाजपा ने कौशाम्बी की घोषणा अपनी तीसरी सूची में किया था। दरअसल कौशाम्बी जिलाध्यक्ष को लेकर पार्टी के दो दिग्गजों के बीच तगड़ी खीचतान चल रही थी। पर हाईकमान ने सभी को दरकिनार कर महिला नेत्री काी ताजपोशी कर दिया। इसके तीन दिन बाद ही सपा, बसपा ने भी नए जिलाध्यक्षों का ऐलान कर दिया। सपा ने जहां युवा नेता दयाशंकर यादव को जिम्मेदारी सौंपी। वहीं बसपा ने पहली मर्तबा कैडर को दरकिनार कर अल्पसंख्यक समुदाय के आमिर काजी की ताजपोशी किया। खास बात ये रही कि चारों सियासी दलों ने ऐसे चेहरों को जिले की कमान सौंपी जो आम लोगों के बीच की चर्चाओं से बाहर थे।
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इसी साल जिला पंचायत अध्यक्षी का उपचुनाव हुआ। 26 सदस्यीय सदन में सिर्फ सात सदस्य होने के कारण सत्ताधारी दल भाजपा चुनाव में उतरने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रही थी। सत्ताधारियों को चुनौती देते हुए खरीद-फरोख्त कर निर्दलीय उममीदवार मधुपति ने 12 सदस्यों को पाले में कर लिया। खरीद-फरोख्त का वीडियों वायरल होने पर उम्मीदवार के पति व पूर्व विधायक वाचस्पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। इसके बाद बदले सियासी समीकरण में भाजपा की अवधरानी पटेल मैदान में आ गई। पर, विपक्ष की तगड़ी रणनीति में भाजपा प्रत्याशी उलझ गई। शासन सत्ता का इस्तेमाल कर भाजपाइयों ने मदतान से ठीक पहले चुनाव स्थगित कर दिया। भाजपाइयों ने इसका फायदा उठाते हुए सदस्यों को पाले में कर लिया। हफ्ते भर बाद हुए मतदान में सांसद विनोद सोनकर के साथ ही विधायक संजय गुप्ता, शीतला प्रसाद पटेल व लालबहादुर की एकजुटता के कारण पार्टी प्रत्याशी उप चुनाव जीत गई।
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जिले के बसपाइयों के लिए वर्ष 2019 काफी खराब रहा। पूरे साल पार्टी पदाधिकारी आपसी खींचतान में लगे रहे। यही वजह रही की पार्टी को साल में तीन बार जिलाध्यक्ष बदलना पड़ा। महेंद्र गौतम को हटाने के बाद राजू गौतम को कमान सौंपी गई। पर, गुटबाजी के कारण महज पखवाड़े भर के भीतर पार्टी ने राजू को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद खागा के पूर्व विधायक मुरलीधर को जिलाध्यक्ष बनाकर डैमेज कंट्रोल का प्रयास किया। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। अंत में दिसंबर के आखिरी हफ्ते में अल्पसंख्यक नेता आमिर काजी को कमान सौंपी गई।
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