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गाजर घास छीन रही खेतों की उर्वरा शक्ति

Thu, 09 Feb 2017 12:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी Updated Thu, 09 Feb 2017 12:05 AM IST
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खेतों की नमी व उसकी उर्वरा क्षमता गाजर घास निगल रही है। इससे तेजी से खेत बर्बाद हो रहे हैं। खेतों के बंजर होने की भी संभावना बढ़ गई है। गाजर घास के दुष्प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने दो माह पहले चेतावनी जारी की थी, लेकिन खुद नहीं चेता। खेतों के लिए जानलेवा साबित हो रही गाजर घास पर खर-पतवार नाशक का भी असर नहीं हो रहा है, इसके बाद भी कृषि विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र के जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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   जिले के खेतों में गाजर घास का प्रकोप लगभग पांच साल पहले शुरू हुआ। शुरुआत में किसान इस घास को लेकर संजीदा नहीं दिखे। धीरे-धीरे घास का प्रकोप जिले भर में हो गया। खेतों में रबी की बुवाई के दौरान उगने वाली घास अब फसलों के लिए महामारी बन चुकी है। किसान हर साल इसे खेतों से हटाने के लिए खर-पतवार नाशक का प्रयोग करता चला आ रहा है, लेकिन कोई असर नहीं पड़ रहा। खास बात यह है कि इस घास को पालतू व जंगली जानवर भी नहीं खाते। फसलों के लिए महामारी साबित हुई गाजर घास ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यदि किसान खेतों में इसके पौधों को उखाड़कर जलाता है तो दूसरे साल आंधी-तूफान के साथ उड़कर और नहरी क्षेत्र में नहर के पानी के साथ इसका बीज फिर से खेतों में पहुंच जाता है। खर पतवार नाशक रसायन से इसके नष्ट न होने से अब किसानों को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। उधर खेतों में उगने के बाद यह घास अपने आस-पास की नमी और उर्वरा क्षमता को भी खींच लेती है। इससे अगल-बगल के पौधे जहां कमजोर होते हैं, वहीं पैदावार को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने दो माह पहले गाजर घास से बचाव की चेतावनी जारी की थी, लेकिन इसको जड़ से खत्म करने की अब तक विभाग की ओर से कोई पहल शुरू नहीं हुई।
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रबी की खेती में बढ़ जाता है प्रकोप
गाजर घास वैसे तो साल भर जिंदा रहती है, लेकिन इसके बीज बारिश के दिनों में अंकुरित होते हैं। खेतों में इसका प्रकोप रबी की बुवाई के दौरान शुरू होता है। गेहूं, चना, मटर आदि की बुवाई के बाद इसके पौधे खेतों में दिखने लगते हैं। गेहूं की फसल घनी होने के कारण खेतों से इसे निकाल पाने में भी कठिनाई होती है। यदि किसान ने एक बार इसे निकलवाया भी तो कुछ पौधे छूट जाते हैं जो अगले साल के लिए पूरे खेत में बीज छोड़ देते हैं।
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गाजर घास फसलों के साथ-साथ मानव और मवेशी के लिए भी नुकसानदायक है। इससे खेतों की उर्वरा शक्ति तो कम होती ही है मनुष्य में दमा की बीमारी भी फैलती है। इसे जड़ से खत्म करने के लिए पौधों को उखाड़कर जलाने की प्रक्रिया ही कारगर है।
एसएस चौहान, डीडी एग्रीकल्चर
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