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महंगे डीजल के बाद अब डीएपी भी देगी किसानों को झटका

Mon, 11 Apr 2022 12:27 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 12:27 AM IST
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After expensive diesel, now DAP will also give shock to farmers
डीजल की आसमान छू रही कीमत के बाद अब किसानों के सामने महंगी डीएपी खरीदने का संकट खड़ा हो गया है। किसानों को एक बोरी डीएपी खरीदने में 150 रुपये अतिरिक्त देना होगा। इसके अलावा यूरिया व एनपीके के दाम भी बढ़ने के संकेत हैं।
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जनपद के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहां के किसान रबी, खरीफ के अलावा जायद की उपज भी पैदा करते हैं। पिछले कुछ दिनों से डीजल के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी से परेशान किसान अब डीएपी के बढ़े दाम से दोहरी मार पड़ रहा है। एआर-कोऑपरेटिव ने बताया कि डीएपी का दाम अब 1200 रुपये प्रति बोरी से बढ़कर 1350 रुपये हो गया है। इसके अलावा एनपीके का भी दाम बढ़ाया गया है।
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यूरिया के दाम में अब तक बढ़ोतरी किए जाने की बात सामने नहीं आई है, लेकिन माल भाड़ा बढ़ने के कारण उसके दाम में भी इजाफा होने के संकेत हैं। सहकारिता विभाग के आंकड़ों की मानें तो पिछले वर्ष किसानों से खरीफ की फसल में दो हजार मिट्रिक टन और रबी के सीजन में सात एमटी डीएपी का उपयोग किया था। इसके आधार पर इस बार भी इतनी ही मात्रा में डीएपी का प्रयोग किया गया तो किसानों को पांच करोड़ करोड़ रुपये अतिरिक्त देंगे होंगे।
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यूरिया में अनुदान देने की है योजना
एआर कोऑपरेटिव विनोद सिंह का कहना है कि यूरिया का भी दाम बढ़ाया जाना है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि सरकार की तरफ से इसके बढ़े दाम पर अनुदान दिया जाएगा। इस कारण अभी तक यूरिया की नई रेट लिस्ट नहीं आई है। बाकी डीएपी व एनपीके के दाम बढ़ाए जाने की नई रेट लिस्ट आ चुकी है।
किसानों का चुनना होगा विकल्प
डीजल व उर्वरक के दाम में बढ़ोतरी के कारण जिले के किसान खासे परेशान हैं। पहले किसान आवारा मवेशियों से अपनी फसल बचाने के लिए परेशान थे, अब उनके सामने उर्वरक के बढ़े दाम परेशानी का सबब बन चुके हैं। निजामपुर नौगीरा के रामजी पांडेय का कहना है खेत की जुताई से लेकर कटाई तक का खर्च बढ़ गया है। सरकार डीजल और उर्वरक के दाम लगातार बढ़ा रही है।

अगर हाल यही रहा तो किसानों को दूसरा विकल्प चुनना पड़ेगा। थुलगुला के किसान राजेंद्र प्रसाद का कहना है इस बार अकेले गेहूं की कटाई के लिए प्रति बीघे एक क्विंटल अनाज देना पड़ रहा है। इसके अलावा थ्रेसरिंग का खर्चा अलग से आ रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो अब लागत भी निकालनी मुश्किल पड़ रही है।
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