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एसिड अटैक गरिमापूर्ण जीवन और मौलिक अधिकारों का क्रूर हनन: डॉ. दिवाकर
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चायल में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शिविर में संबोधित करते पदाधिकारी। स्रोत: प्रशासन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने सोमवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चायल में ‘एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकार और पॉश एक्ट’ विषय पर विधिक साक्षरता व जागरूकता शिविर लगाया।
डॉ. नरेंद्र दिवाकर ने कहा कि तेजाब से हमला न केवल जघन्य अपराध है, बल्कि यह व्यक्ति के गरिमापूर्ण जीवन, शारीरिक अखंडता और समानता के मौलिक अधिकारों का सबसे क्रूर हनन है। यह पीड़ितों को जीवनभर के लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक पीड़ा के अंधेरे में धकेल देता है। उन्होंने बताया कि कानूनन पीड़ितों को सरकारी व निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज, पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और न्यूनतम तीन लाख रुपये तक की त्वरित वित्तीय सहायता पाने का अधिकार है। इलाज से मना करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
डॉ. दिवाकर ने ‘पॉश एक्ट- 2013’ के बारे में बताया। कहा कि यह कानून सभी सार्वजनिक, निजी और असंगठित क्षेत्रों में महिलाओं को सुरक्षित माहौल देता है। पीड़ित महिला घटना के तीन महीने के भीतर आंतरिक या स्थानीय शिकायत समिति और ‘शी बॉक्स पोर्टल’ पर लिखित शिकायत दर्ज करा सकती है। इसकी जांच 90 दिनों में पूरी करना अनिवार्य है।
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पीएलवी ममता दिवाकर ने प्राधिकरण की मुफ्त कानूनी सेवाओं की जानकारी दी। शिविर में वीडीओ स्वागत अग्रहरि और सखी वन स्टॉप सेंटर से राजकरन मौजूद रहे।
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डॉ. नरेंद्र दिवाकर ने कहा कि तेजाब से हमला न केवल जघन्य अपराध है, बल्कि यह व्यक्ति के गरिमापूर्ण जीवन, शारीरिक अखंडता और समानता के मौलिक अधिकारों का सबसे क्रूर हनन है। यह पीड़ितों को जीवनभर के लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक पीड़ा के अंधेरे में धकेल देता है। उन्होंने बताया कि कानूनन पीड़ितों को सरकारी व निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज, पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और न्यूनतम तीन लाख रुपये तक की त्वरित वित्तीय सहायता पाने का अधिकार है। इलाज से मना करने वाले अस्पतालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
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डॉ. दिवाकर ने ‘पॉश एक्ट- 2013’ के बारे में बताया। कहा कि यह कानून सभी सार्वजनिक, निजी और असंगठित क्षेत्रों में महिलाओं को सुरक्षित माहौल देता है। पीड़ित महिला घटना के तीन महीने के भीतर आंतरिक या स्थानीय शिकायत समिति और ‘शी बॉक्स पोर्टल’ पर लिखित शिकायत दर्ज करा सकती है। इसकी जांच 90 दिनों में पूरी करना अनिवार्य है।
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पीएलवी ममता दिवाकर ने प्राधिकरण की मुफ्त कानूनी सेवाओं की जानकारी दी। शिविर में वीडीओ स्वागत अग्रहरि और सखी वन स्टॉप सेंटर से राजकरन मौजूद रहे।