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अब इलाज के लिए नहीं भटकेंगे क्षयरोगी

Sat, 22 Nov 2014 05:30 AM IST
Kaushambi
Kaushambi Updated Sat, 22 Nov 2014 05:30 AM IST
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मंझनपुर। द्वाबा के क्षयरोगी अब इलाज को नहीं भटकेंगे। इनके उपचार के लिए मंझनपुर में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से टीबी हास्पिटल बनेगा। अस्पताल के लिए जमीन चिह्नित करके डीएम ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इससे हास्पिटल बनाने को शासन से हरी झंडी मिलने के साथ ही पैसा भी अवमुक्त हो चुका है। इधर, टीबी हास्पिटल बनने से क्षयरोगियों को दूसरे जिले में इलाज को जाने से मुक्ति मिलेगी। सीएमओ डॉ. राजकुमार मिश्र ने बताया कि राजकीय निर्माण निगम को अस्पताल बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
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कौशाम्बी को जिला बने 17 साल हो गया है। पर, अब भी यहां के लोग तमाम बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। ऐसी ही एक दिक्कत यहां टीबी हास्पिटल के नहीं होने से है, जबकि गरीबी और अशिक्षा से जूझ रहे इस जिले में इस समय करीब पांच हजार से अधिक टीबी रोगी हैं। साथ ही प्रतिवर्ष इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। पर, इनके इलाज की यहां कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। लोगों को उपचार के लिए टीबी हास्पिटल इलाहाबाद ही जाना पड़ता था। पर, अब क्षयरोगियों को इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। क्योंकि कौशाम्बी में भी जल्द ही जांच और इलाज की सभी सुविधाओं से युक्त टीबी क्लीनिक बनेगा। सीएमओ डॉ. राजकुमार मिश्र ने बताया कि इसके लिए मंझनपुर में सीएमओ आवास के समीप जमीन चिह्नित कर ली गई है। डीएम के माध्यम से भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर शासन ने हास्पिटल निर्माण को मंजूरी देने के साथ ही एक करोड़ रुपये की रकम भी उपलब्ध करा दी है। सीएमओ ने बताया कि अस्पताल के निर्माण की जिम्मेदारी राजकीय निर्माण निगम इकाई को दी गई है। जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ एसएन त्रिपाठी ने बताया कि अस्पताल में विशेषज्ञों के साथ सभी प्रकार की जांच की भी व्यवस्था रहेगी। इसके लिए बलगम, एक्स-रे आदि जांच के लिए तकनीकि सहायकों की तैनाती की जाएगी। जिले में टीबी क्लीनिक बनने से मरीजो को अब अच्छे इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। एक मरीज एक साल में 10-15 लोगों को बीमारी देता है। ऐसे में क्षय रोगियों से दूर रहना चाहिए।
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सावधान: दो सप्ताह तक लगातार खांसी आना, धीरे-धीरे वजन में गिरावट होना, अनवरत बुखार का बना रहना, कमजोरी महसूस करना आदि क्षय रोग के प्रमुख लक्षण है। यदि ऐसे लक्षण आप के शरीर में है तो फौरन डाइगनोसिस कराने के तरंत बाद डाट्स केन्द्र जाकर इलाज शुरू कर देना चाहिए।
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