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संयुक्त जिला चिकित्सालय: ड्यूटी से गैरहाजिर मिले आठ डॉक्टर
Thu, 28 Feb 2019 12:27 AM IST
shailendra Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Published by: shailendra Kumar
Updated Thu, 28 Feb 2019 12:27 AM IST
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मंझनपुर। शासन-प्रशासन की तमाम कवायद के बावजूद डॉक्टर ड्यूटी के प्रति गंभीर नहीं हो रहे हैं। मंगलवार को सीडीओ इंद्रसेन सिंह के औचक निरीक्षण में संयुक्त जिला चिकित्सालय में ऐसा ही कुछ देखने को मिला। यहां तैनात आठ डॉक्टर ड्यूटी से गैरहाजिर मिले। सीडीओ ने नाराजगी जाहिर करते हुए अनुपस्थित चिकित्सकों की सेलरी रोकने की संस्तुति कर दी।
स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत पड़ताल करने के लिए डीएम मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी इंद्रसेन सिंह ने बुधवार को संयुक्त जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। सुबह 10.20 बजे अस्पताल पहुंचे सीडीओ को सीएमएस डॉ. दीपक सेठ मिले। आकस्मिक वार्ड का निरीक्षण करने पर यहां तैनात डॉ. विवेक भी उपस्थित मिले। पर, आगे बढ़ते ही स्थिति काफी खराब दिखी। अस्पताल के ओडीओपी में डॉ. एके सिंह, डॉ. धर्मराज सिंह, डॉ. मनोज कुमार कौशिक, डॉ. सौभाग्य प्रकाश गैरहाजिर मिले। मौके पर मरीजों की भीड़ लगी थी। सभी घंटों से डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। इसके अलावा संविदा पर तैनात डॉ. रेखा देवी, डॉ. भीमेंद्र त्रिपाठी, डॉ. निखिल हवन एवं डॉ. धीरेंद्र कुमार मौर्य भी अपने-अपने चैम्बर से नदारद थे।
सीडीओ ने गैरहाजिर सभी आठ डॉक्टरों के एक दिन का वेतन/मानदेय रोकने की संस्तुति कर दी। गौरतबलब है कि जिला अस्पताल में 28 डॉक्टरों की तैनाती है। इनमें से कुछ अवकाश तो कुछ इमरजेंसी ड्यूटी में रहते हैं। पर, इस तरह से एक साथ आठ डॉक्टरों के गायब रहने से स्थिति काफी जटिल हो जाती है। क्योंकि यहां जिले भर के मरीज आते हैं। जानकारों का कहना है कि जब मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टरों का ये हाल है तो ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी चिकित्सालयों की स्थिति क्या होगी। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत पड़ताल करने के लिए डीएम मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी इंद्रसेन सिंह ने बुधवार को संयुक्त जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। सुबह 10.20 बजे अस्पताल पहुंचे सीडीओ को सीएमएस डॉ. दीपक सेठ मिले। आकस्मिक वार्ड का निरीक्षण करने पर यहां तैनात डॉ. विवेक भी उपस्थित मिले। पर, आगे बढ़ते ही स्थिति काफी खराब दिखी। अस्पताल के ओडीओपी में डॉ. एके सिंह, डॉ. धर्मराज सिंह, डॉ. मनोज कुमार कौशिक, डॉ. सौभाग्य प्रकाश गैरहाजिर मिले। मौके पर मरीजों की भीड़ लगी थी। सभी घंटों से डॉक्टर का इंतजार कर रहे थे। इसके अलावा संविदा पर तैनात डॉ. रेखा देवी, डॉ. भीमेंद्र त्रिपाठी, डॉ. निखिल हवन एवं डॉ. धीरेंद्र कुमार मौर्य भी अपने-अपने चैम्बर से नदारद थे।
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सीडीओ ने गैरहाजिर सभी आठ डॉक्टरों के एक दिन का वेतन/मानदेय रोकने की संस्तुति कर दी। गौरतबलब है कि जिला अस्पताल में 28 डॉक्टरों की तैनाती है। इनमें से कुछ अवकाश तो कुछ इमरजेंसी ड्यूटी में रहते हैं। पर, इस तरह से एक साथ आठ डॉक्टरों के गायब रहने से स्थिति काफी जटिल हो जाती है। क्योंकि यहां जिले भर के मरीज आते हैं। जानकारों का कहना है कि जब मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टरों का ये हाल है तो ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी चिकित्सालयों की स्थिति क्या होगी। इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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