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Kaushambi News: शिक्षकों का 27.15 करोड़ जीपीएफ कौशाम्बी ट्रेजरी पहुंचा
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लाल बाबू मौर्या, जिला विद्यायल निरीक्षण कौशाम्बी
- फोटो : Archive
कौशाम्बी जिले के गठन के करीब 23 साल बाद शिक्षकों के जीपीएफ और पेंशन फंड का ऐतिहासिक बकाया आखिरकार जिले की ट्रेजरी में पहुंच गया। प्रयागराज ट्रेजरी में लंबे समय से अटकी 27 करोड़ 15 लाख दो हजार 835 रुपये की धनराशि सात सितंबर को कौशाम्बी ट्रेजरी में ट्रांसफर कर दी गई। इससे जिले के करीब 200 शिक्षकों के जीपीएफ से जुड़े भुगतान का रास्ता साफ हो गया है।
वर्ष 2003-04 में कौशाम्बी जिला प्रयागराज से अलग हुआ था। इसके बाद भी यहां के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ समेत अन्य वित्तीय लेनदेन का हिसाब-किताब प्रयागराज ट्रेजरी में ही संचालित होता रहा। जिले के गठन के बाद अब तक करीब 32 जिला विद्यालय निरीक्षक आए, लेकिन प्रयागराज ट्रेजरी में जमा शिक्षकों का पैसा कौशाम्बी नहीं आ सका।
32 डीआईओएस नहीं ला सके प्रयागराज में अटका पैसा
करीब दो दशक तक धनराशि प्रयागराज ट्रेजरी में ही अटकी रही। इससे शिक्षकों के जीपीएफ अग्रिम और सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम भुगतान को लेकर परेशानी की आशंका बनी रहती थी। शिक्षक लंबे समय से अपने जिले की ट्रेजरी में धनराशि आने का इंतजार कर रहे थे।
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मौजूदा डीआईओएस एलबी मौर्य ने इस लंबित मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने शिक्षकों के खातों का पूरा हिसाब-किताब तैयार कराने के साथ प्रयागराज ट्रेजरी से धनराशि मंगाने के लिए लगातार पत्राचार और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई।
जीपीएफ भुगतान में अब नहीं आएगी धन की बाधा
कोषवानी की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में 27,15,02,835 रुपये की धनराशि की आवश्यकता दर्शाई गई थी। अब रकम मिलने से पात्र शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ अग्रिम और सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम भुगतान में धन की कमी बाधा नहीं बनेगी।
प्रयागराज ट्रेजरी में लंबित जीपीएफ की धनराशि कौशाम्बी ट्रेजरी में स्थानांतरित करा ली गई है। सात सितंबर को 27.15 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। इससे शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ अग्रिम और अंतिम भुगतान में अब धनराशि की समस्या नहीं रहेगी।
-- एलबी मौर्य , डीआईओएस
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वर्ष 2003-04 में कौशाम्बी जिला प्रयागराज से अलग हुआ था। इसके बाद भी यहां के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ समेत अन्य वित्तीय लेनदेन का हिसाब-किताब प्रयागराज ट्रेजरी में ही संचालित होता रहा। जिले के गठन के बाद अब तक करीब 32 जिला विद्यालय निरीक्षक आए, लेकिन प्रयागराज ट्रेजरी में जमा शिक्षकों का पैसा कौशाम्बी नहीं आ सका।
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32 डीआईओएस नहीं ला सके प्रयागराज में अटका पैसा
करीब दो दशक तक धनराशि प्रयागराज ट्रेजरी में ही अटकी रही। इससे शिक्षकों के जीपीएफ अग्रिम और सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम भुगतान को लेकर परेशानी की आशंका बनी रहती थी। शिक्षक लंबे समय से अपने जिले की ट्रेजरी में धनराशि आने का इंतजार कर रहे थे।
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मौजूदा डीआईओएस एलबी मौर्य ने इस लंबित मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने शिक्षकों के खातों का पूरा हिसाब-किताब तैयार कराने के साथ प्रयागराज ट्रेजरी से धनराशि मंगाने के लिए लगातार पत्राचार और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई।
जीपीएफ भुगतान में अब नहीं आएगी धन की बाधा
कोषवानी की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में 27,15,02,835 रुपये की धनराशि की आवश्यकता दर्शाई गई थी। अब रकम मिलने से पात्र शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ अग्रिम और सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम भुगतान में धन की कमी बाधा नहीं बनेगी।
प्रयागराज ट्रेजरी में लंबित जीपीएफ की धनराशि कौशाम्बी ट्रेजरी में स्थानांतरित करा ली गई है। सात सितंबर को 27.15 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। इससे शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के जीपीएफ अग्रिम और अंतिम भुगतान में अब धनराशि की समस्या नहीं रहेगी।