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Kaushambi News: डीएपी के अभाव में अटकी 25 फीसदी गेहूं की बोआई

Sat, 03 Dec 2022 08:30 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 03 Dec 2022 08:30 AM IST
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25 percent wheat sowing stuck due to lack of DAP
मंझनपुर। जिले में डीएपी के अभाव में करीब 25 फीसदी गेहूं की बोआई अटकी हुई है। खेतों में नमी खत्म होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। साधन सहकारी समितियों और सहकारी संघ से डीएपी नहीं मिलने से किसान गेहूं की बोआई नहीं करा पा रहे हैं। बोआई में हो रही देरी से पैदावार प्रभावित होने के आसार बढ़ हैं।
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इस बार जिले में तकरीबन 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बोआई कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस समय मध्य गेहूं की बोआई कराने का समय चल रहा है। किसानों को बोआई कराने के लिए डीएपी नहीं मिल पा रही है। किसान डीएपी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। डीएपी नहीं होने से ज्यादातर साधन सहकारी समितियों व सहकारी संघ पर ताला लटक रहा है। इससे किसान गेहूं की बोआई नहीं करा पा रहे हैं। खेतों से नमी खत्म हो जा रही है। अभी तक निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष 75 फीसदी गेहूं की बोआई हो पाई है। अभी भी 25 फीसदी गेहूं की बुआई किसान नहीं करा पाए हैं।
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डीएपी के विकल्प में इन उर्वरकों का कर सकते हैं इस्तेमाल
मंझनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र महगांव के वैज्ञानिक डॉ. अजय ने बताया कि डीएपी उपलब्ध नहीं होने पर इसके विकल्प के तौर पर किसान सिंगल सुपर फॉस्फेट, यूरिया व पोटाश मिलाकर गेहूं की बोआई करा सकते हैं। डीएपी में सिर्फ दो प्रमुख तत्व फॉस्फोरस 46 फीसदी व नाइट्रोजन (यूरिया) 18 फीसदी होता है। वहीं सिंगल सुपर फॉस्फेट में तीन प्रमुख तत्व फॉस्फोरस 16 फीसदी, कैल्शियम 21 फीसदी और सल्फर 12 फीसदी मौजूद होता है। सिंगल सुपर फॉस्फेट में उपलब्ध फास्फोरस जल में शत-प्रतिशत घुलनशील होता है। इसके साथ ही अम्लीय मृदा में अगर सिंगल सुपर फॉस्फेट डालते हैं तो इसके अंदर कैल्शियम की मात्रा होने के कारण यह मृदा की अम्लीयता को कम कर देता है। किसान इस समय बोई जाने वाली प्रजाति डीबीडब्ल्यू -187, एचडी-3226, एचडी-2967 आदि प्रजातियों की बोआई दिसंबर के पहले सप्ताह के बाद रोक दें। इसके बाद 7 दिसंबर से 25 दिसम्बर तक गेहूं की मध्यम अवधि वाली प्रजाति डीबीडब्ल्यू-373, एचडी-2643, मालवीय-234 आदि प्रजातियों का चयन करें। 25 दिसंबर के बाद जनवरी के प्रथम सप्ताह तक कम अवधि वाली प्रजाति डीबीडब्ल्यू-14, के-9423, उन्नत हलना आदि प्रजातियों का चयन कर बुआई हेतु प्रयोग करें।
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सरसवां क्षेत्र में धान की जो प्रजाति लगाई जाती है वह देर से कटती है। इसलिए सरसवां क्षेत्र में अभी गेहूं की बोआई पिछड़ी है। डीएपी किल्लत से भी गेहूं की बुवाई थोड़ा प्रभावित हो रही है। फिर भी जिले में तकरीबन 75 फीसदी बुवाई हो चुकी है।- डॉ.मनोज गौतम, जिला कृषि अधिकारी
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