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दोआबा के वोटरों ने निर्दलों पर नहीं किया भरोसा
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दोआबा के वोटरों ने निर्दलों पर नहीं किया भरोसा
अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में भाग्य आजमा चुके हैं 68 निर्दल उम्मीदवार
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। दोआबा के वोटरों ने लोकसभा चुनावों में कभी भी निर्दलियों पर भरोसा नहीं किया। जबकि आजादी के बाद से अब तक हुए 16 लोक सभा चुनावों में 68 लोगों ने निर्दल प्रत्याशी के तौर पर दावेदारी पेश की। लेकिन जीत तो दूर अधिकतरों की जमानत ही जब्त हो गई।
आजादी के बाद वर्ष 1952 में हुए पहले लोक सभा चुनाव में सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जिसमें कांग्रेस के जवाहर लाल नेहरू 38.73 प्रतिशत मत पाकर विजयी हुए। नेहरू जी को घेरने के लिए निर्दल प्रत्याशी के तौर पर केके चटर्जी और प्रभुदत्त ब्रम्हचारी मैदान में थे। जिसमें केके चटर्जी को महज 4.54 और प्रभुदत्त को 9.41 प्रतिशत मत पाकर ही संतोष करना पड़ा। वर्ष 1957 में हुए चुनाव के दौरान विज्ञानराम सोनकर, सीताराम और इंदुदेव निर्दल प्रत्याशी के तौर पर उतरे थे। इस चुनाव में भी जवाहर लाल नेहरू 36.87 प्रतिशत मत पाकर विजयी घोषित हुए। इस चुनाव में भी निर्दल प्रत्याशी छह प्रतिशत मतों का अंतर भी पार नहीं कर सके। 1962 के चुनाव में पांच प्रत्याशी थे, जिसमें निर्दल रहे राम किशन को 4.21 प्रतिशत और विजेता कांग्रेस के मसुरियादीन को 42.41 फीसद मत मिला था। वर्ष 1967 के चुनाव में भारतीय जनसंघ और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। इस चुनाव में भी आरके राय और सीसी लाल निर्दल प्रत्याशी थे। जिसमें जिसमें कांग्रेस के मसुरियादीन विजयी हुए। 1971 क चुनाव में राम किशन, 1977 के चुनाव में नाथू राम शिक्षक, काशीराम, रामऔतार, भाई लाल, 1980 में रामचंद्र, नाथू लाल, वीरेंद्र कुमार, श्याम लाल, आनंद स्वरूप, मनीलाल, जवाहर लाल, 1984 के चुनाव में केदारनाथ सोनकर, नरायण दास, प्रेम सिंह, बृजलाल, 1989 मे विंदेश्वरी प्रसाद, सरेशचंद्र, 1996 में मनीलाल, नरायण देव, विंदेश्वरी प्रसाद, प्रमोद कुमार, महेंद्र सिंह, तुलसी दास, मुन्नीलाल, महेश चंद्र, कामता प्रसाद, प्रहलाद, विजय कुमार, लवकुश, दशरथ लाल, चंद्रबली, राम सिरोमणि, मोतीलाल, वर्ष 1998 के चुनाव में बच्चीलाल, बाबूलाल, रामसूरत, राम सरन, दिनेश, राज कुमार, वर्ष 1999 में लालजी सोनकर, सुरेश कुमार, रामशरण, छोटेलाल, राज कुमार, वर्ष 2004 में पंचम लाल, महेंद्र कुमार, वर्ष 2009 में गुलाब चंद्र, जगदीश, मानसिंह, राम सरण और वर्ष 2014 में मोहन लाल, बीनारानी और छेद्दू निर्दल प्रत्याशी के तौर पर अपनी किस्मत अजमा चुके हैं। इन प्रत्याशियों में जीत का अंतर पाना तो दूर जमानत बचाने का भी संकट खड़ा हो गया था।
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1967 में जनसंघ से ज्यादा मिले थे निर्दल को वोट
मंझनपुर। आजादी के बाद वर्ष 1967 में हुआ अब तक का पहला चुनाव था जिसमें जनसंघ पार्टी से ज्यादा निर्दल प्रत्याशी को वोट मिले थे। चुनाव में कांग्रेस के मसुरियादीन 85916 (42.73) मत पाकर विजयी हुए थे। जबकि दूसरे स्थान पर यहां निर्दल प्रत्याशी सीसी लाल 59982 (29.85) मत पाकर दूसरे स्थान पर थे। जनसंघ से मैदान में उतरे केएल सोनकर को 46257 (23.0) मत मिला था और वह तीसरे स्थान पर थे। चौथे स्थान पर निर्दल आरके राय रहे जिन्हें 8920 मत मिले थे।
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विज्ञानराम सोनकर को नहीं मिला था एक भी मत
मंझनपुर। वर्ष 1957 में हुआ लोक सभा का पहला चुनाव ऐसा था जिसमें निर्दल प्रत्याशी के तौर पर उतरे विज्ञानराम सोनकर को एक भी मत नहीं मिला था। यानि वह चुनाव में अपने भी मत का इस्तेमाल नहीं कर सके, या फिर उन्होंने दूसरे को दे दिया। चुनाव में कांग्रेस के जवाहर लाल नेहरू जीते थे। इस चुनाव में तीन लोग निर्दल प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में उतरे थे।
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अब तक हुए 16 लोकसभा चुनावों में भाग्य आजमा चुके हैं 68 निर्दल उम्मीदवार
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। दोआबा के वोटरों ने लोकसभा चुनावों में कभी भी निर्दलियों पर भरोसा नहीं किया। जबकि आजादी के बाद से अब तक हुए 16 लोक सभा चुनावों में 68 लोगों ने निर्दल प्रत्याशी के तौर पर दावेदारी पेश की। लेकिन जीत तो दूर अधिकतरों की जमानत ही जब्त हो गई।
आजादी के बाद वर्ष 1952 में हुए पहले लोक सभा चुनाव में सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जिसमें कांग्रेस के जवाहर लाल नेहरू 38.73 प्रतिशत मत पाकर विजयी हुए। नेहरू जी को घेरने के लिए निर्दल प्रत्याशी के तौर पर केके चटर्जी और प्रभुदत्त ब्रम्हचारी मैदान में थे। जिसमें केके चटर्जी को महज 4.54 और प्रभुदत्त को 9.41 प्रतिशत मत पाकर ही संतोष करना पड़ा। वर्ष 1957 में हुए चुनाव के दौरान विज्ञानराम सोनकर, सीताराम और इंदुदेव निर्दल प्रत्याशी के तौर पर उतरे थे। इस चुनाव में भी जवाहर लाल नेहरू 36.87 प्रतिशत मत पाकर विजयी घोषित हुए। इस चुनाव में भी निर्दल प्रत्याशी छह प्रतिशत मतों का अंतर भी पार नहीं कर सके। 1962 के चुनाव में पांच प्रत्याशी थे, जिसमें निर्दल रहे राम किशन को 4.21 प्रतिशत और विजेता कांग्रेस के मसुरियादीन को 42.41 फीसद मत मिला था। वर्ष 1967 के चुनाव में भारतीय जनसंघ और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। इस चुनाव में भी आरके राय और सीसी लाल निर्दल प्रत्याशी थे। जिसमें जिसमें कांग्रेस के मसुरियादीन विजयी हुए। 1971 क चुनाव में राम किशन, 1977 के चुनाव में नाथू राम शिक्षक, काशीराम, रामऔतार, भाई लाल, 1980 में रामचंद्र, नाथू लाल, वीरेंद्र कुमार, श्याम लाल, आनंद स्वरूप, मनीलाल, जवाहर लाल, 1984 के चुनाव में केदारनाथ सोनकर, नरायण दास, प्रेम सिंह, बृजलाल, 1989 मे विंदेश्वरी प्रसाद, सरेशचंद्र, 1996 में मनीलाल, नरायण देव, विंदेश्वरी प्रसाद, प्रमोद कुमार, महेंद्र सिंह, तुलसी दास, मुन्नीलाल, महेश चंद्र, कामता प्रसाद, प्रहलाद, विजय कुमार, लवकुश, दशरथ लाल, चंद्रबली, राम सिरोमणि, मोतीलाल, वर्ष 1998 के चुनाव में बच्चीलाल, बाबूलाल, रामसूरत, राम सरन, दिनेश, राज कुमार, वर्ष 1999 में लालजी सोनकर, सुरेश कुमार, रामशरण, छोटेलाल, राज कुमार, वर्ष 2004 में पंचम लाल, महेंद्र कुमार, वर्ष 2009 में गुलाब चंद्र, जगदीश, मानसिंह, राम सरण और वर्ष 2014 में मोहन लाल, बीनारानी और छेद्दू निर्दल प्रत्याशी के तौर पर अपनी किस्मत अजमा चुके हैं। इन प्रत्याशियों में जीत का अंतर पाना तो दूर जमानत बचाने का भी संकट खड़ा हो गया था।
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1967 में जनसंघ से ज्यादा मिले थे निर्दल को वोट
मंझनपुर। आजादी के बाद वर्ष 1967 में हुआ अब तक का पहला चुनाव था जिसमें जनसंघ पार्टी से ज्यादा निर्दल प्रत्याशी को वोट मिले थे। चुनाव में कांग्रेस के मसुरियादीन 85916 (42.73) मत पाकर विजयी हुए थे। जबकि दूसरे स्थान पर यहां निर्दल प्रत्याशी सीसी लाल 59982 (29.85) मत पाकर दूसरे स्थान पर थे। जनसंघ से मैदान में उतरे केएल सोनकर को 46257 (23.0) मत मिला था और वह तीसरे स्थान पर थे। चौथे स्थान पर निर्दल आरके राय रहे जिन्हें 8920 मत मिले थे।
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विज्ञानराम सोनकर को नहीं मिला था एक भी मत
मंझनपुर। वर्ष 1957 में हुआ लोक सभा का पहला चुनाव ऐसा था जिसमें निर्दल प्रत्याशी के तौर पर उतरे विज्ञानराम सोनकर को एक भी मत नहीं मिला था। यानि वह चुनाव में अपने भी मत का इस्तेमाल नहीं कर सके, या फिर उन्होंने दूसरे को दे दिया। चुनाव में कांग्रेस के जवाहर लाल नेहरू जीते थे। इस चुनाव में तीन लोग निर्दल प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में उतरे थे।