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सीट आरक्षित होने पर घटने लगा था वोटरों का रुझान

Sat, 13 Apr 2019 08:26 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2019 08:26 PM IST
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सीट आरक्षित होने पर घटने लगा था वोटरों का रुझान
सीट आरक्षित होने पर घटने लगा था वोटरों का रुझान
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पहली और दूसरी लोकसभा के लिए 80 फीसदी हुआ था मतदान
-फ्लैश बैक-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। आजादी के बाद हुए पहली और दूसरी लोकसभा चुनाव को लेकर जिले के वोटरों में गजब उत्साह रहा। लोगों ने 80 फीसदी तक मतदान में भागीदारी की। तीसरी लोकसभा में यह सीट सामान्य कोटे से सुरक्षित के खाते में चली गई। इससे यहां के वोटरों का मतदान को लेकर रुझान काफी कम हो गया। चौथी लोकसभा का चुनाव ऐसा रहा जब मात्र 20.19 फीसद लोगों ने ही लोकतंत्र के यज्ञ में आहूति डाली।
आजादी के बाद लोकसभा का पहला चुनाव 1952 में हुआ। इस दौरान कौशाम्बी संसदीय सीट प्रयागराज ईस्ट और जौनपुर वेस्ट का हिस्सा थी। चुनाव में कांग्रेस से पं. जवाहर लाल नेहरू प्रत्याशी थी। इसके अलावा सात उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। चुनाव में 80.43 फीसद लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिसमें पंडित नेहरु को 38.73 फीसद वोट मिला। उस दौरान एक दल से दो प्रत्याशी चुनाव लड़ सकते थे। दूसरे स्थान पर कांग्रेस के ही मसुरियादीन रहे। दूसरी लोकसभा चुनाव में सीट का नाम बदल गया और यह इलाहाबाद फूलपुर का हिस्सा बनी। चुनाव में 77.24 फीसदी लोगों ने वोट डाला और जवाहर लाल नेहरु चुनाव जीते। तीसरी लोकसभा में चायल (सुरक्षित) के लोकसभा सीट का नाम हुआ। इसी चुनाव के बाद वोटरों का मतदान को लेकर रूझान कम होने लगा। चुनाव में 38.15 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिसमें कांग्रेस के मसुरियादीन सांसद चुने गए थे। वर्ष 1967 में अब तक हो चुके लोकसभा में चुनावों में पहला ऐसा चुनाव था जिसमें महज 20.19 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव में कांग्रेस के मसुरियादीन विजयी हुए थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद वर्ष 2014 में हुआ पहला ऐसा लोकसभा चुनाव था जब जिले में 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। बाकी के चुनावों में मतदान का प्रतिशत काफी कम रहा।
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अब तक के लोकसभा चुनावों में हुए मतदान का प्रतिशत
वर्ष प्रतिशत
1952 - 80.43
1957 - 77.24
1962 - 38.15
1967 - 20.19
1971 - 29.25
1977 - 40.1
1980 - 31.66
1984 - 42.04
1989 - 38.91
1991 - 37.61
1996 - 28.54
1998 - 41.94
1999 - 38.67
2004 - 37.42
2009 - 39.63
2014 - 53.00
-------------------

पहले नहीं होते थे मतदाता जागरुकता कार्यक्रम
मंझनपुर। इन दिनों चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए तमाम तरह के जागरुकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। पहले के चुनावों में ऐसा नहीं होता था। बाजजूद इसके लोग ज्यादा से ज्यादा मतदान करते थे। अब इतनी जागरुकता के बाद भी वोटिंग प्रतिशत बढ़ाना चुनौती साबित हो रहा है।
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जिले के मतदाताओं में जागरूकता की कमी और अशिक्षा भी मतदान कम होने के लिए प्रमुख कारण था। अब शिक्षा और जागरूकता का स्तर बढ़ा है। इसका असर देखने को मिल रहा है। सरकार और चुनाव आयोग मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। आने वाले चुनाव में वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा।

रमेश पासी, जिलाध्यक्ष भाजपा

पहले मतदाता सूची में काफी खामी होती थी। वोटर बूथ तक जाता था लेकिन लिस्ट में नाम कटा होने की वजह से मतदान नहीं कर पाता था। अब राजनैतिक दल भी वोटर बनाने के कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। चुनाव आयोग भी मतदाता जागरूकता को लेकर प्रयास कर रहा है। इस बार मतदान प्रतिशत ज्यादा बढ़ेगा।
खड़ग सिंह पटेल, सपा जिलाध्यक्ष
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