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168 गांवों के प्रधान-सचिव की फंस सकती है गर्दन
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168 गांवों के प्रधान-सचिव की फंस सकती है गर्दन
सीडीओ ने अप्रैल 2016 से अब तक हुए सभी मदों के विकास कार्यों की शुरू कराई जांच
मंझनपुर। दोआबा की 168 ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिवों की गर्दन फंस सकती है। दरअसल, सीडीओ ने इन गांवों में अप्रैल 2016 से अब तक हुए सभी मदों के विकास कार्यों की जांच शुरू करा दी है। जांच के लिए 33 अधिकारियों को नामित किया गया है। इसके बाद गांवों के जिम्मेदारों की नींद उड़ी हुई है।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नियम है कि मजदूरों को महीने में कम से कम 15 दिन काम दिया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी इंद्रसेन सिंह ने हफ्ते भर पहले समीक्षा की तो पाया कि जनपद की 168 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत माह नवम्बर में एक भी दिन काम नहीं कराया गया है। इसे लेकर सीडीओ बिफर पड़े। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कामों की जांच तो शुरू ही करा दी है। साथ में अप्रैल 2016 से अब तक कराए गए राज्य वित्त, चौदहवां वित्त आदि मदों के विकास कार्यों की भी जांच प्रारंभ करा दी है। इसके लिए 33 अधिकारियों को नामित किया गया है। सीडीओ ने जांच की मॉनीटरिंग का जिम्मा जिला पंचायत राज अधिकारी गोपालजी ओझा को सौंपा है। जिला पंचायत राज अधिकारी जांच की समीक्षा करेंगे। वे इसकी रिपोर्ट भी प्रतिदिन सीडीओ को सौंपेंगे। सीडीओ का कहना है कि मनमानी करने वाले जांच अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, जांच की भनक लगते ही संबंधित गांवों के प्रधानों तथा पंचायत सचिवों के होश उड़े हुए हैं। उन्होंने जांच अफसरों की परिक्रमा करना शुरू कर दिया है। हालांकि सीडीओ का साफ कहना है कि निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी मिलने पर सेक्रेटरी को निलंबित करने के साथ प्रधान का बस्ता रखवा लिया जाएगा।
प्रिया सॉफ्टवेयर करेगा मदद
मंझनपुर। प्रशासन के पास प्रिया सॉफ्टवेयर किसी हथियार से कम नहीं है। इस सॉफ्टवेयर में सभी ग्राम पंचायतों का बैंक स्टेटमेंट तक अपलोड होता है। जांच अधिकारियों की यह साफ्टवेयर काफी मदद करेगी। उन्हें आसानी से पता चल जाएगा कि किस गांव में किस मद में कितनी रकम कब खर्च की गई है। हालांकि सीडीओ ने बैंक डिटेल निकालकर जांच अधिकारियों को दे देने की जिम्मेदारी डीपीआरओ को दे दी है।
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168 गांवों में अप्रैल 2016 से अब तक सभी मदों से कराए गए विकास कार्यों की जांच शुरू कराई गई है। इसके लिए 33 अधिकारियों को नामित किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी प्रधान-पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इंद्रसेन सिंह-मुख्य विकास अधिकारी
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सीडीओ ने अप्रैल 2016 से अब तक हुए सभी मदों के विकास कार्यों की शुरू कराई जांच
मंझनपुर। दोआबा की 168 ग्राम पंचायतों के प्रधान व सचिवों की गर्दन फंस सकती है। दरअसल, सीडीओ ने इन गांवों में अप्रैल 2016 से अब तक हुए सभी मदों के विकास कार्यों की जांच शुरू करा दी है। जांच के लिए 33 अधिकारियों को नामित किया गया है। इसके बाद गांवों के जिम्मेदारों की नींद उड़ी हुई है।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नियम है कि मजदूरों को महीने में कम से कम 15 दिन काम दिया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी इंद्रसेन सिंह ने हफ्ते भर पहले समीक्षा की तो पाया कि जनपद की 168 ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत माह नवम्बर में एक भी दिन काम नहीं कराया गया है। इसे लेकर सीडीओ बिफर पड़े। उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कामों की जांच तो शुरू ही करा दी है। साथ में अप्रैल 2016 से अब तक कराए गए राज्य वित्त, चौदहवां वित्त आदि मदों के विकास कार्यों की भी जांच प्रारंभ करा दी है। इसके लिए 33 अधिकारियों को नामित किया गया है। सीडीओ ने जांच की मॉनीटरिंग का जिम्मा जिला पंचायत राज अधिकारी गोपालजी ओझा को सौंपा है। जिला पंचायत राज अधिकारी जांच की समीक्षा करेंगे। वे इसकी रिपोर्ट भी प्रतिदिन सीडीओ को सौंपेंगे। सीडीओ का कहना है कि मनमानी करने वाले जांच अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उधर, जांच की भनक लगते ही संबंधित गांवों के प्रधानों तथा पंचायत सचिवों के होश उड़े हुए हैं। उन्होंने जांच अफसरों की परिक्रमा करना शुरू कर दिया है। हालांकि सीडीओ का साफ कहना है कि निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी मिलने पर सेक्रेटरी को निलंबित करने के साथ प्रधान का बस्ता रखवा लिया जाएगा।
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प्रिया सॉफ्टवेयर करेगा मदद
मंझनपुर। प्रशासन के पास प्रिया सॉफ्टवेयर किसी हथियार से कम नहीं है। इस सॉफ्टवेयर में सभी ग्राम पंचायतों का बैंक स्टेटमेंट तक अपलोड होता है। जांच अधिकारियों की यह साफ्टवेयर काफी मदद करेगी। उन्हें आसानी से पता चल जाएगा कि किस गांव में किस मद में कितनी रकम कब खर्च की गई है। हालांकि सीडीओ ने बैंक डिटेल निकालकर जांच अधिकारियों को दे देने की जिम्मेदारी डीपीआरओ को दे दी है।
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168 गांवों में अप्रैल 2016 से अब तक सभी मदों से कराए गए विकास कार्यों की जांच शुरू कराई गई है। इसके लिए 33 अधिकारियों को नामित किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी प्रधान-पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इंद्रसेन सिंह-मुख्य विकास अधिकारी