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प्रभारी मंत्री के गोद लिए गांव का ट्रांसफार्मर रास्ते से गुम
Updated Mon, 24 Sep 2018 12:58 AM IST
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चायल। फुंके ट्रांसफार्मरों को बदलने के मामले में बिजली विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं। सरकारी फरमान को दरकिनार कर विभाग ने प्रभारी मंत्री के गोद लिए गांव नूरपुर का ट्रांसफार्मर 44 दिन बाद भी नहीं बदला। 12 सितंबर को वर्कशॉप से निकला ट्रांसफार्मर रास्ते से ही गुम हो गया। मामले में अवर अभियंता भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। इसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।
नेवादा ब्लॉक के नूरपुर गांव को जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने गोद ले रखा है। इस गांव को विद्युत उपकेंद्र तिल्हापुर मोड़ से बिजली आपूर्ति दी जाती है। इसके लिए 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया है। गांव के अनिरुद्ध उपाध्याय, राम नरेश यादव, राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, छविनाथ सिंह, मनीशंकर यादव, सुरेश पासी और गजाधर सेन आदि ने बताया कि 10 अगस्त को ट्रांसफार्मर फुंक गया था। पहले 15 दिन तक विभागीय अफसरों ने आश्वासनों में गुजार दिए। 25 अगस्त को टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराई गई तो 17 दिन बाद 12 सितंबर को ऑनलाइन मैसेज आया कि ट्रांसफार्मर निर्गत कर दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं लग रहा है कि आखिर वर्कशॉप से निकला ट्रांसफार्मर कहां गया। इस वजह से करीब 44 दिन से गांव में अंधेरा छाया हुआ है।
विद्युत चालित उपकरण शोपीस बन गए हैं। बिजली के अभाव में पेयजल संकट बना हुआ है। ऐसे में प्रभारी मंत्री के गोद लिए गांव से ही 72 घंटे के अंदर ट्रांसफार्मर बदलने के सरकारी फरमान का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीणों ने जेई महेंद्र कुमार वर्मा से पूछताछ की तो वह भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अवर अभियंता का कहना है कि वर्कशॉप से निकला ट्रांसफार्मर कहां गया, इसकी जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही जल्द से जल्द नूरपुर में दूसरा ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली आपूर्ति की जाएगी।
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नेवादा ब्लॉक के नूरपुर गांव को जिले के प्रभारी मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने गोद ले रखा है। इस गांव को विद्युत उपकेंद्र तिल्हापुर मोड़ से बिजली आपूर्ति दी जाती है। इसके लिए 63 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया है। गांव के अनिरुद्ध उपाध्याय, राम नरेश यादव, राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव, छविनाथ सिंह, मनीशंकर यादव, सुरेश पासी और गजाधर सेन आदि ने बताया कि 10 अगस्त को ट्रांसफार्मर फुंक गया था। पहले 15 दिन तक विभागीय अफसरों ने आश्वासनों में गुजार दिए। 25 अगस्त को टोल फ्री नंबर 1912 पर शिकायत दर्ज कराई गई तो 17 दिन बाद 12 सितंबर को ऑनलाइन मैसेज आया कि ट्रांसफार्मर निर्गत कर दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं लग रहा है कि आखिर वर्कशॉप से निकला ट्रांसफार्मर कहां गया। इस वजह से करीब 44 दिन से गांव में अंधेरा छाया हुआ है।
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विद्युत चालित उपकरण शोपीस बन गए हैं। बिजली के अभाव में पेयजल संकट बना हुआ है। ऐसे में प्रभारी मंत्री के गोद लिए गांव से ही 72 घंटे के अंदर ट्रांसफार्मर बदलने के सरकारी फरमान का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ग्रामीणों ने जेई महेंद्र कुमार वर्मा से पूछताछ की तो वह भी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। अवर अभियंता का कहना है कि वर्कशॉप से निकला ट्रांसफार्मर कहां गया, इसकी जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। साथ ही जल्द से जल्द नूरपुर में दूसरा ट्रांसफार्मर लगाकर बिजली आपूर्ति की जाएगी।
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