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300 साल पुराने ऐतिहासिक तालाब के वजूद पर संकट

Wed, 03 Jan 2018 06:33 PM IST
Updated Wed, 03 Jan 2018 06:33 PM IST
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300 साल पुराने ऐतिहासिक तालाब के वजूद पर संकट
300 साल पुराने ऐतिहासिक तालाब के वजूद पर संकट
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सुंदरीकरण के अभाव में अस्तित्व खो रहा मूरतगंज का ऐतिहासिक तालाब
लोगों को आज भी आकर्षित कर रहे निर्माण में लगे नक्कासीदार पत्थर
नसीम राइन
मूरतगंज।
ब्लॉक परिसर का ऐतिहासिक पक्का तालाब सुंदरीकरण के अभाव में अपना वजूद खो रहा है। तीन सौ साल पुराने इस तालाब में किनारे-किनारे लगे नक्कासीदार पत्थर आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। अंग्रेजों के जमाने में खुदवाए गए इस तालाब की मरम्मत के लिए जिले का कोई भी समाजसेवी, जनप्रतिनिधि व अधिकारी आगे नहीं आ रहा है।
तीन सौ साल पहले 12 गांवों के जमींदार रहे सेठ चमरूलाल ने अंग्रेजी हुकूमत के दौरान मूरतगंज में ऐतिहासिक पक्का तालाब का निर्माण कराया था। जिले में नक्कासीदार पत्थरों से सजे इस तालाब को देखने के लिए दूर दराज से लोग आते हैं। तत्कालीन समय में इस तालाब पर अंग्रेजों की फौज व मुसाफिरों का पड़ाव हुआ करता था। तालाब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उत्तर दिशा में शिव मंदिर, दक्षिण में गायों के पानी पीने का घाट, पूरब में महिलाओं के स्नान के लिए जनाना घाट व पश्चिम में राम जानकी मंदिर का निर्माण कराया गया है। पानी से साल भर लबालब रहने वाले इस तालाब के पानी का उपयोग नहाने, कपड़ा धुलने, पशु पक्षियों को पीने के काम आता था। सेठ चमरुलाल की मौत के बाद बेटे रघुनाथ सहाय राम-जानकी मंदिर के अध्यक्ष बने और इनके बाद सेठ मिठाईलाल ने तालाब की मरम्मत व देखरेख की बागडोर संभाली। इन तीनों की मौत के बाद अब मिठाई केसरवानी के पुत्र रमेश चंद्र केसरवानी राम-जानकी मंदिर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। जमींदारी खत्म हो जाने के बाद अब सेठ की हैसियत भी तालाब व मंदिर के जीर्णोद्धार की नहीं रह गई है। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाजसेवियों के ध्यान न देने से तालाब व मंदिर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
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नष्ट हो रहे तालाब व मंदिर को लेकर लोगों को मलाल
प्राचीन ऐतिहासिक तालाब के वजूद को लेकर लोगों को खासा मलाल है। लोगों का कहना है कि तीन सौ साल पहले सेठ चमरूलाल ने अपने नाम व शान के लिए ऐतिहासिक तालाब का निर्माण कराकर मिसाल कायम किया था। आज स्थिति यह हो गई है कि जिले के जनप्रतिनिधि, इलाकाई समाजसेवी इसकी मरम्मत तक नहीं करा पा रहे हैं।
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रंगाई-पुताई के लिए दी गई रकम कागजों में हुई खर्च
ऐतिहासिक तालाब व मंदिर की रंगाई-पुताई के लिए वर्ष 2004-05 में तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष रहे कपिल मुनि करवरिया ने पांच लाख रुपये दिया था। इस धनराशि को खर्च करने के लिए ब्लॉक में सिर्फ कागजी कोरम तैयार हुआ। मौके पर न तो सफाई हुई और न ही रंगाई पुताई। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐतिहासिक तालाब की मरम्मत को लेकर लोग कितने संजीदा हैं।

सबमर्सिबल पंप न चलने से पानी का भी रहता है अभाव
ऐतिहासिक तालाब को पानी से लबालब किए जाने के लिए सांसद विनोद सोनकर ने अपनी निधि से सबमर्सिबल पंप लगवाया है। मूर्ति विसर्जन के दौरान भक्तों की परेशानी को देखते हुए सांसद ने यह कदम उठाया था। पंप के नियमित न चलाए जाने से तालाब की तह में गंदा पानी जमा हुआ है।


क्षेत्र पंचायत की बैठक में हुई पहल
मूरतगंज ब्लॉक परिसर में क्षेत्र पंचायत की बैठक 29 दिसंबर को हुई। बैठक में चायल विधायक संजय गुप्ता व ब्लॉक प्रमुख मूरतगंज मो. सऊद ने मंदिर के सुंदरीकरण व तालाब की मरम्मत को लेकर बीडीसी सदस्यों के साथ पहल की। माना जा रहा है कि अब ब्लॉक में आने वाले विकास के धन से ही तालाब व मंदिर का जीर्णोद्धार होगा। इसकी जानकारी होने पर इलाकाई लोगों में खुशी है।
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