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नारद मोह की भावपूर्ण लीला देख गदगद हुए दर्शक
Updated Mon, 12 Nov 2018 01:14 AM IST
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कोखराज (ब्यूरो)। नई बजार भरवारी की रामलीला में शनिवार को नारदमोह की लीला का मंचन किया गया। कथा प्रसंगों के मुताबिक एक बार नारद मुनि भगवान शिव की कठोर तपस्या कर रहे थे। इससे परेशान देवराज इंद्र ने उनका तप भंग करने के लिए कामदेव, मेनका, रम्भा, उर्वशी आदि अप्सराओं को भेजा। तमाम कोशिश के बावजूद देवर्षि के तप की तंद्रा भंग नहीं हुई। तपस्या पूरी होने पर कामदेव ने देवर्षि से सारा वृतांत बताते हुए क्षमा-याचना की। नारद ने उन्हें क्षमा तो कर दिया पर इससे उनके अंदर अहंकार का भाव जागृत हो गया।
कामदेव पर विजय प्राप्त करने की गाथा सुनाने भगवान शिव के पास पंहुच गए। े देवर्षि का अहंकार भाव देखा भोलेनाथ ने नारद को भगवान विष्णु से इसकी जानकारी देने से रोका। किन्तु, कौतूहल के वशीभूत नारद भला कहां मानने वाले थे। वह क्षीर सागर भी पहुँच गए और अपने पौरुष का यशोगान किया। भगवान ने उन्हे बधाइयाँ दी और वहाँ से विदा किया। पर, रास्ते मे माया से एक सुंदर नगर बसा दिया जहां शील वाहन नाम के राजा का शासन था। उनकी पुत्री अत्यंत सुंदर थी। नारद को राजा ने राजमहल मे बुलाया और पुत्री का भाग्य जानना चाहा। पर, भगवान की माया के जाल मे नारद फंस गए। अंत में उनका अहंकार चूर-चूर हो गया। कलाकारों के इस इस भावपूर्ण मंचन को देखने के लिए तमाम लोग इकट्ठा रहे। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी, महामंत्री अशोक गुलाटी, प्रकाश चन्द्र, दिलीप कुमार, सुधीर केसरवानी, संजय कुमार, विजय केसरवानी, राजेश अग्रहरि, शिवबाबू, नितुल आदि मौजूद रहे।
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कामदेव पर विजय प्राप्त करने की गाथा सुनाने भगवान शिव के पास पंहुच गए। े देवर्षि का अहंकार भाव देखा भोलेनाथ ने नारद को भगवान विष्णु से इसकी जानकारी देने से रोका। किन्तु, कौतूहल के वशीभूत नारद भला कहां मानने वाले थे। वह क्षीर सागर भी पहुँच गए और अपने पौरुष का यशोगान किया। भगवान ने उन्हे बधाइयाँ दी और वहाँ से विदा किया। पर, रास्ते मे माया से एक सुंदर नगर बसा दिया जहां शील वाहन नाम के राजा का शासन था। उनकी पुत्री अत्यंत सुंदर थी। नारद को राजा ने राजमहल मे बुलाया और पुत्री का भाग्य जानना चाहा। पर, भगवान की माया के जाल मे नारद फंस गए। अंत में उनका अहंकार चूर-चूर हो गया। कलाकारों के इस इस भावपूर्ण मंचन को देखने के लिए तमाम लोग इकट्ठा रहे। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र चौधरी, महामंत्री अशोक गुलाटी, प्रकाश चन्द्र, दिलीप कुमार, सुधीर केसरवानी, संजय कुमार, विजय केसरवानी, राजेश अग्रहरि, शिवबाबू, नितुल आदि मौजूद रहे।
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