{"_id":"5cc060d9bdec225eb660b6ff","slug":"121556111577-kaushambi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कौशाम्बी में बनने लगे बुंदेलखंड सरीके हालात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कौशाम्बी में बनने लगे बुंदेलखंड सरीके हालात
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कौशाम्बी में बनने लगे बुंदेलखंड सरीखे हालात
भीषण गर्मी से पहले ही दगा दे गए पांच हजार हैंडपंप
चालू हैंडपंपों पर लगने लगी लाइन, बढ़ सकता है संकट
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर/बारा। गर्मी की दस्तक के साथ ही गांवों के हालात बुंदेलखंड सरीखे हो गए हैं। सरकारी आंकड़ों में हर गांव के पांच-पांच हैंडपंप रीबोर कराने के दावे किए जा रहे हैं। जबकि गांवों के हालत इससे काफी इतर हैं। अप्रैल के अंतिम पखवारे में ही गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह दस बजे के बाद से ही सूरज की तल्ख किरणें लोगों को घरों कैद रहने के लिए मजबूर कर रही है। इसी के साथ ही भूगर्भ जल स्तर भी खिसक रहा है। पेयजल के लिए लगाए गए ज्यादातर हैंडपंप दगा दे गए हैं। इक्का-दुक्का पानी भी दे रहे हैं तो हैंडपंपों के पास सुबह-शाम लंबी कतारें लग रही हैं। अब पंचायती राज विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो हकीकत चौकाने वाली है। डीपीएम सुरेश यादव बताते हैं कि जिले में 25 हजार 195 हैंडपंप लगाए गए हैं। जिसमें से करीब पांच हजार रीबोर होने लायक हैं। अब सवाल यह है कि 18 लाख की आबादी वाले जिले में अगर सरकारी आंकड़ों की माने तो लगभग 72 लोगों की प्यास बुझाने का जिम्मा एक हैंडपंप पर है। इसमें से अगर पांच हजार कम कर दिए जाए तो समस्या का खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है। डीपीआरओ के यहां हैंडपंप का काम देखने वाले डीपीएम सुरेश यादव का दावा है कि राज्य वित्त का पैसा मार्च में ही ग्राम पंचायतों को जारी किया गया है। ऐसे में पंचायतें हैंडपंप सही करा सकती है। फिलहाल जो सूची ब्लाक स्तर से मिली है उसके हिसाब से हैंडपंपों की रीबोर का काम जल्द शुरू करा दिया जाएगा।
------
रसूखदारों ने कर रखा है कब्जा
मंझनपुर। जिले में लगाए गए सरकारी हैंडपंप रसूददारों के कब्जे में हैं। पिछले दिनों खुद जिला पंचायत राज अधिकारी गोपाल जी ओझा ने पइंसा में कई लोगों के यहां सबमर्सिबल लगा सरकारी हैंडपंप पकड़ा था। हैंडपंप पर कब्जा करने वालों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे।
------
कौशाम्बी ब्लाक में खराब हैं 395 हैंडपंप
बारा। कौशाम्बी विकास खंड में 3794 हैंडपंप लगाए गए हैं। जिसमें से करीब 395 हैंडपंप रीबोर लायक या फिर बेकार हैं। इसकी रिपोर्ट विकास विभाग को भेजी जा चुकी है। एडीओ पंचायत प्रेम नरायण ने बताया कि नए सिरे से खराब हैंडपंपों के बाबत सेक्रेटरियों से सूची मांगी गई है। चुनावी व्यस्तता के कारण सूची नहीं मिल सकी है। इस वजह से हैंडपंपों की मरम्मत में देरी हो रही है।
विज्ञापन
-------
सरकारी राजस्व को लगा लाखों का चूना
मंझनपुर। गांवों में जो हैंडपंप खराब है उनकी कोई सुधि नहीं ले रहा है। कोई हैंडपंप का इस्तेमाल मवेशियों को बांधने के लिए कर रहा तो कहीं पर हैंडपंप का ज्यादातर समान गायब हो चुका है। सरकारी राजस्व को हो रहे नुकसान की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
फोटो नं-22
विज्ञापन
भीषण गर्मी से पहले ही दगा दे गए पांच हजार हैंडपंप
चालू हैंडपंपों पर लगने लगी लाइन, बढ़ सकता है संकट
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर/बारा। गर्मी की दस्तक के साथ ही गांवों के हालात बुंदेलखंड सरीखे हो गए हैं। सरकारी आंकड़ों में हर गांव के पांच-पांच हैंडपंप रीबोर कराने के दावे किए जा रहे हैं। जबकि गांवों के हालत इससे काफी इतर हैं। अप्रैल के अंतिम पखवारे में ही गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह दस बजे के बाद से ही सूरज की तल्ख किरणें लोगों को घरों कैद रहने के लिए मजबूर कर रही है। इसी के साथ ही भूगर्भ जल स्तर भी खिसक रहा है। पेयजल के लिए लगाए गए ज्यादातर हैंडपंप दगा दे गए हैं। इक्का-दुक्का पानी भी दे रहे हैं तो हैंडपंपों के पास सुबह-शाम लंबी कतारें लग रही हैं। अब पंचायती राज विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो हकीकत चौकाने वाली है। डीपीएम सुरेश यादव बताते हैं कि जिले में 25 हजार 195 हैंडपंप लगाए गए हैं। जिसमें से करीब पांच हजार रीबोर होने लायक हैं। अब सवाल यह है कि 18 लाख की आबादी वाले जिले में अगर सरकारी आंकड़ों की माने तो लगभग 72 लोगों की प्यास बुझाने का जिम्मा एक हैंडपंप पर है। इसमें से अगर पांच हजार कम कर दिए जाए तो समस्या का खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है। डीपीआरओ के यहां हैंडपंप का काम देखने वाले डीपीएम सुरेश यादव का दावा है कि राज्य वित्त का पैसा मार्च में ही ग्राम पंचायतों को जारी किया गया है। ऐसे में पंचायतें हैंडपंप सही करा सकती है। फिलहाल जो सूची ब्लाक स्तर से मिली है उसके हिसाब से हैंडपंपों की रीबोर का काम जल्द शुरू करा दिया जाएगा।
------
रसूखदारों ने कर रखा है कब्जा
मंझनपुर। जिले में लगाए गए सरकारी हैंडपंप रसूददारों के कब्जे में हैं। पिछले दिनों खुद जिला पंचायत राज अधिकारी गोपाल जी ओझा ने पइंसा में कई लोगों के यहां सबमर्सिबल लगा सरकारी हैंडपंप पकड़ा था। हैंडपंप पर कब्जा करने वालों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे।
विज्ञापन
------
कौशाम्बी ब्लाक में खराब हैं 395 हैंडपंप
बारा। कौशाम्बी विकास खंड में 3794 हैंडपंप लगाए गए हैं। जिसमें से करीब 395 हैंडपंप रीबोर लायक या फिर बेकार हैं। इसकी रिपोर्ट विकास विभाग को भेजी जा चुकी है। एडीओ पंचायत प्रेम नरायण ने बताया कि नए सिरे से खराब हैंडपंपों के बाबत सेक्रेटरियों से सूची मांगी गई है। चुनावी व्यस्तता के कारण सूची नहीं मिल सकी है। इस वजह से हैंडपंपों की मरम्मत में देरी हो रही है।
विज्ञापन
-------
सरकारी राजस्व को लगा लाखों का चूना
मंझनपुर। गांवों में जो हैंडपंप खराब है उनकी कोई सुधि नहीं ले रहा है। कोई हैंडपंप का इस्तेमाल मवेशियों को बांधने के लिए कर रहा तो कहीं पर हैंडपंप का ज्यादातर समान गायब हो चुका है। सरकारी राजस्व को हो रहे नुकसान की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
फोटो नं-22