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शीतलहरी के सामने बेबस रही सूरज की किरणें
Updated Wed, 03 Jan 2018 08:33 PM IST
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शीतलहरी के सामने बेबस रहीं सूरज की किरणें
दफ्तरों में पसरा रहा सन्नाटा, नहीं आए फरियादी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले में शीतलहर का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पांच दिन से भगवान सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे हैं। दोपहर में घंटे-दो घंटे के लिए खिली धूप भी शीतलहर के आगे बेबस नजर आ रही है। हाड़कंपाऊ ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार को भी लोग दिनभर घरों में दुबके रहे। बाजार हो या सरकारी कार्यालय कड़ाके की ठंड के चलते हर जगह सन्नाटा छाया रहा। यहां तक कि ठंड ने मुख्यालय आने वाले फरियादियों की संख्या भी कम कर दिया है। गर्म कपड़े पहनने के बाद भी लोगों को ठंड से राहत नहीं मिल पा रही है।
दोआबा में पिछले पांच दिन से भगवान सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे हैं। ठंड से बचने के लिए लोग गर्म कपड़ों से पूरे बदन को ढकने के बावजूद बाहर निकलने पर राहत नही मिल रही है। ऐसे में लोग घराें में दुबकने के लिए मजबूर हो गए हैं। बुधवार को भी अधिकतर लोग घरों में अलाव तापते रहे या रजाई में लिपटे नजर आए। मौसम विभाग के आंकड़ों पर जाएं तो बुधवार को तापमान में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिली। लेकिन धूप न निकलने और सर्द हवाओं के चलने से गलन से छुटकारा नहीं मिल रहा था। कड़के की ठंड से बुधवार को भी जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। इससे कस्बों और गांवों सहित मुख्यालय की सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा। दोपहर लगभग ढाई बजे कुछ देर के लिए भगवान सूर्य ने दर्शन दिए तो लोगों के बदन में जान लौटी। पर, यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रही।
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मवेशियों पर आफत बनी ठंड
ठंड का सबसे बुरा असर मवेशियों पर देखने को मिल रहा है। जनमानस तो किसी तरह बचाव कर ले रहा है। पर, मवेशियों के लिए कोई इंतजाम नहीं हो पा रहा है। बेजुबान मवेशी ठंड से रोंगटे खड़े कर मालिकानाें की ओर दर्दभरी नजर से देखते हैं। दूसरी ओर जंगली जीवों और पशु पक्षियों को भी अब ठंड से मुसीबत होने लगी है।
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आखिर कब जलेंगे अलाव
कड़ाके की ठंड से कांप रहे दोआबा में जन-जन का बुरा हाल है। लोगों को गर्म कपड़ों से भी राहत नहीं मिल पा रही है। कड़ाके की ठंड में सफर करने वालों का बुरा हाल है। बस, टेंपो, टैक्सी से उतरने के बाद लोग चौराहों पर पहुंचते ही अलाव की तलाश में भटकते नजर आए। अलाव न मिलने पर वह चाय पीने के बहाने भट्ठियों में हाथ सेंकने को मजबूर हो रहे हैं। मुख्यालय मंझनपुर सहित सैनी रोडवेज बस स्टाफ, सिराथू रेलवे स्टेशन, भरवारी रेलवे स्टेशन मनौरी, करारी कहीं भी अलाव नहीं नजर आ रहा है। सफर में ठंड हवाओं के थपेड़े खकर कर प्रमुख बस अड्डों पर उतरने वाले लोगों को राहत नहीं मिल रही है। उधर तहसील व नगर पंचायत प्रशासन है कि अलाव को लेकर चुप्पी साधे हुए है।
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पुआल और पत्तियां बनी गरीबों का सहारा
पारा लुढ़कते ही सबाब पर पहुंची ठंड ने गरीबों की रहना दूभर कर दिया है। लकड़ी के आभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब बचाव के लिए आम व महुवा की पत्तियों को बटोर कर घर ला रहे हैं। इसके अलावा पशुओं को खिलाने के लिए रखे गए पुआल को अलाव के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है। पुआल और पत्तियों को जलाकर गरीब ठंड भगाने का प्रयास जिले भर में कर रहे हैं। इसके बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।
आलू, अरहर, सरसाें व चना की खेती पर संकट
कड़ाके की ठंड से खेतों में लहलहा रहीं फसलों की रौनक दिनने लगी है। खेतों में बोई गई आलू की पछेती खेती धूप न निकलने और कोहरे से झुलसने लगी है। आलू के अलावा सरसों, चना और अरहर की फसलें भी फूल पर हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरा से इन फसलों के फूल झुलसकर गिरने लगे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकती है। आलू में जहां पैदावार प्रभावित होगी वहीं सरसों, चना और अरहर में फली भरपूर नहीं लग पाएगी। फसलों को मुरझाता देख किसानों के चेहरे भी मुरझाने लगे हैं।
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दफ्तरों में पसरा रहा सन्नाटा, नहीं आए फरियादी
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। जिले में शीतलहर का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पांच दिन से भगवान सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे हैं। दोपहर में घंटे-दो घंटे के लिए खिली धूप भी शीतलहर के आगे बेबस नजर आ रही है। हाड़कंपाऊ ठंड ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार को भी लोग दिनभर घरों में दुबके रहे। बाजार हो या सरकारी कार्यालय कड़ाके की ठंड के चलते हर जगह सन्नाटा छाया रहा। यहां तक कि ठंड ने मुख्यालय आने वाले फरियादियों की संख्या भी कम कर दिया है। गर्म कपड़े पहनने के बाद भी लोगों को ठंड से राहत नहीं मिल पा रही है।
दोआबा में पिछले पांच दिन से भगवान सूर्य के दर्शन नहीं हो रहे हैं। ठंड से बचने के लिए लोग गर्म कपड़ों से पूरे बदन को ढकने के बावजूद बाहर निकलने पर राहत नही मिल रही है। ऐसे में लोग घराें में दुबकने के लिए मजबूर हो गए हैं। बुधवार को भी अधिकतर लोग घरों में अलाव तापते रहे या रजाई में लिपटे नजर आए। मौसम विभाग के आंकड़ों पर जाएं तो बुधवार को तापमान में कुछ बढ़ोतरी देखने को मिली। लेकिन धूप न निकलने और सर्द हवाओं के चलने से गलन से छुटकारा नहीं मिल रहा था। कड़के की ठंड से बुधवार को भी जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। इससे कस्बों और गांवों सहित मुख्यालय की सड़कों पर सन्नाटा छाया रहा। दोपहर लगभग ढाई बजे कुछ देर के लिए भगवान सूर्य ने दर्शन दिए तो लोगों के बदन में जान लौटी। पर, यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रही।
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मवेशियों पर आफत बनी ठंड
ठंड का सबसे बुरा असर मवेशियों पर देखने को मिल रहा है। जनमानस तो किसी तरह बचाव कर ले रहा है। पर, मवेशियों के लिए कोई इंतजाम नहीं हो पा रहा है। बेजुबान मवेशी ठंड से रोंगटे खड़े कर मालिकानाें की ओर दर्दभरी नजर से देखते हैं। दूसरी ओर जंगली जीवों और पशु पक्षियों को भी अब ठंड से मुसीबत होने लगी है।
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आखिर कब जलेंगे अलाव
कड़ाके की ठंड से कांप रहे दोआबा में जन-जन का बुरा हाल है। लोगों को गर्म कपड़ों से भी राहत नहीं मिल पा रही है। कड़ाके की ठंड में सफर करने वालों का बुरा हाल है। बस, टेंपो, टैक्सी से उतरने के बाद लोग चौराहों पर पहुंचते ही अलाव की तलाश में भटकते नजर आए। अलाव न मिलने पर वह चाय पीने के बहाने भट्ठियों में हाथ सेंकने को मजबूर हो रहे हैं। मुख्यालय मंझनपुर सहित सैनी रोडवेज बस स्टाफ, सिराथू रेलवे स्टेशन, भरवारी रेलवे स्टेशन मनौरी, करारी कहीं भी अलाव नहीं नजर आ रहा है। सफर में ठंड हवाओं के थपेड़े खकर कर प्रमुख बस अड्डों पर उतरने वाले लोगों को राहत नहीं मिल रही है। उधर तहसील व नगर पंचायत प्रशासन है कि अलाव को लेकर चुप्पी साधे हुए है।
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पुआल और पत्तियां बनी गरीबों का सहारा
पारा लुढ़कते ही सबाब पर पहुंची ठंड ने गरीबों की रहना दूभर कर दिया है। लकड़ी के आभाव में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब बचाव के लिए आम व महुवा की पत्तियों को बटोर कर घर ला रहे हैं। इसके अलावा पशुओं को खिलाने के लिए रखे गए पुआल को अलाव के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है। पुआल और पत्तियों को जलाकर गरीब ठंड भगाने का प्रयास जिले भर में कर रहे हैं। इसके बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।
आलू, अरहर, सरसाें व चना की खेती पर संकट
कड़ाके की ठंड से खेतों में लहलहा रहीं फसलों की रौनक दिनने लगी है। खेतों में बोई गई आलू की पछेती खेती धूप न निकलने और कोहरे से झुलसने लगी है। आलू के अलावा सरसों, चना और अरहर की फसलें भी फूल पर हैं। कड़ाके की ठंड और कोहरा से इन फसलों के फूल झुलसकर गिरने लगे हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकती है। आलू में जहां पैदावार प्रभावित होगी वहीं सरसों, चना और अरहर में फली भरपूर नहीं लग पाएगी। फसलों को मुरझाता देख किसानों के चेहरे भी मुरझाने लगे हैं।