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45 लाख रुपये हजम करने की योजना में थे 150 जालसाज
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45 लाख रुपये हजम करने की योजना में थे 150 जालसाज
पारिवारिक लाभ योजना के लिए कर रखा था फर्जी आवेदन
सत्यापन में खुलासा होने पर निरस्त किए गए आवेदन
अब तक 1360 लोगों को दी गई 4.80 करोड़ रुपये की मदद
-राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत जिले के डेढ़ सौ आवेदकों ने फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने का 4.80 करोड़ रुपये हजम करने का प्रयास किया। इस खेल में राजस्व विभाग भी शामिल रहा। समाज कल्याण विभाग की जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर सभी के आवेदन निरस्त कर दिए गए। समाज कल्याण विभाग ने दोषी लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित उपजिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। हालांकि अभी तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के मुखिया की मौत पर उनके आश्रितों को मदद पहुंचाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का संचालन कर रखा है। इसके तहत मृतक के आश्रित को 30 हजार रुपये मुहैया कराने का प्रावधान है। समाज कल्याण विभाग से संचालित योजना का लाभ लेने के लिए मृतक की उम्र 18 से अधिक और 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। इसके लिए मृतक आश्रित को ऑनलाइन आवेदन करने के बाद तीन दिन के भीतर हार्ड कॉपी विभाग में जमा करनी पड़ती है। इसके बाद विभागीय अधिकारी राजस्व विभाग से सत्यापन कराकर आवेदक के खाते में योजना की धनराशि भेज देते हैं। इस वित्तीय वर्ष में नवंबर माह तक जिले के सिराथू, मंझनपुर और चायल तहसील के 1510 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि तीनों तहसीलों से आई सत्यापन रिपोर्ट में 150 आवेदक फर्जी निकले हैं। ये लोग विभाग को गुमराह कर सरकारी खजाने का 45 लाख रुपये हजम करने की योजना में थे। इनमें कुछ ऐसे आवेदक थे जो वृद्धा पेंशन ले रहे थे। इसके बाद भी पारिवारिक लाभ योजना की रकम हड़पने की जुगत में थे। जबकि कई ऐसे निकले जिनकी मौत काफी पहले हो चुकी है। कुछ ऐसे आवेदन भी मिले जो खेतिहर हैं। ऐसे सभी आवेदनों को निरस्त कर समाज कल्याण अधिकारी ने फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसडीएम को पत्र लिखा है। जबकि पात्र मिले 1360 आवेदकों के खाते में 4.80 करोड़ रुपये धनराशि भेज दी गई है। इसके अलावा नए आए करीब 120 आवेदनों का अभी सत्यापन कराया जा रहा है।
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दस बीघे जमीन के मालिक को लेखपाल ने बना दिया भूमिहीन
मंझनपुर (ब्यूरो)। चायल तहसील के सुरसेनी गांव निवासी शोभा देवी के पति चंद्रप्रकाश की मौत हो चुकी है। शोभा ने भी पारिवारिक लाभ येाजना के लिए आवेदन कर रखा था। लेखपाल की सत्यापन रिपोर्ट पर एसडीएम ने आवेदन स्वीकृत भी कर दिया था। आशंका होने पर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने सचिव से सत्यापन कराया तो शोभा दस बीघे भूमि की मालकिन निकली। इस पर उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया।
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योजना की पात्रता-
0 आवेदक की आमदनी शहरी क्षेत्र में 56,450 व ग्रामीण में 46,080 रुपये सालाना से अधिक न हो।
0 परिवार का कमाऊ मुखिया महिला अथवा पुरुष हो।
0 मौत के एक वर्ष के भीतर आवेदन किया गया हो।
0 ऑनलाइन आवेदन की प्रति डाउनलोड कर आय, जाति, निवास एवं मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र एवं बैक खाते की हार्ड कॉपी हस्ताक्षर/अंगूठा निशान के साथ तीन दिन के भीतर विभाग में जमा हो।
0 ऑनलाइन आवेदन के 45 दिन के भीतर योजना का लाभ मुहैया कराया जाएगा।
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इनका कहना है
पारिवारिक लाभ योजना के तहत प्राप्त हुए 1510 आवेदनों में 150 फर्जी निकले हैं। सत्यापन के बाद इन्हें निरस्त करने के साथ ही पात्र लाभार्थियों के खाते में रकम भेज दी गई है। गलत रिपोर्ट लगाने वाले लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसडीएम को पत्र भी लिखा गया है।
सुधीर कुमार-जिला समाज कल्याण अधिकारी
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पारिवारिक लाभ योजना के लिए कर रखा था फर्जी आवेदन
सत्यापन में खुलासा होने पर निरस्त किए गए आवेदन
अब तक 1360 लोगों को दी गई 4.80 करोड़ रुपये की मदद
-राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत जिले के डेढ़ सौ आवेदकों ने फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने का 4.80 करोड़ रुपये हजम करने का प्रयास किया। इस खेल में राजस्व विभाग भी शामिल रहा। समाज कल्याण विभाग की जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा होने पर सभी के आवेदन निरस्त कर दिए गए। समाज कल्याण विभाग ने दोषी लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित उपजिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। हालांकि अभी तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के मुखिया की मौत पर उनके आश्रितों को मदद पहुंचाने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का संचालन कर रखा है। इसके तहत मृतक के आश्रित को 30 हजार रुपये मुहैया कराने का प्रावधान है। समाज कल्याण विभाग से संचालित योजना का लाभ लेने के लिए मृतक की उम्र 18 से अधिक और 60 वर्ष से कम होनी चाहिए। इसके लिए मृतक आश्रित को ऑनलाइन आवेदन करने के बाद तीन दिन के भीतर हार्ड कॉपी विभाग में जमा करनी पड़ती है। इसके बाद विभागीय अधिकारी राजस्व विभाग से सत्यापन कराकर आवेदक के खाते में योजना की धनराशि भेज देते हैं। इस वित्तीय वर्ष में नवंबर माह तक जिले के सिराथू, मंझनपुर और चायल तहसील के 1510 लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि तीनों तहसीलों से आई सत्यापन रिपोर्ट में 150 आवेदक फर्जी निकले हैं। ये लोग विभाग को गुमराह कर सरकारी खजाने का 45 लाख रुपये हजम करने की योजना में थे। इनमें कुछ ऐसे आवेदक थे जो वृद्धा पेंशन ले रहे थे। इसके बाद भी पारिवारिक लाभ योजना की रकम हड़पने की जुगत में थे। जबकि कई ऐसे निकले जिनकी मौत काफी पहले हो चुकी है। कुछ ऐसे आवेदन भी मिले जो खेतिहर हैं। ऐसे सभी आवेदनों को निरस्त कर समाज कल्याण अधिकारी ने फर्जी रिपोर्ट लगाने वाले लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसडीएम को पत्र लिखा है। जबकि पात्र मिले 1360 आवेदकों के खाते में 4.80 करोड़ रुपये धनराशि भेज दी गई है। इसके अलावा नए आए करीब 120 आवेदनों का अभी सत्यापन कराया जा रहा है।
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दस बीघे जमीन के मालिक को लेखपाल ने बना दिया भूमिहीन
मंझनपुर (ब्यूरो)। चायल तहसील के सुरसेनी गांव निवासी शोभा देवी के पति चंद्रप्रकाश की मौत हो चुकी है। शोभा ने भी पारिवारिक लाभ येाजना के लिए आवेदन कर रखा था। लेखपाल की सत्यापन रिपोर्ट पर एसडीएम ने आवेदन स्वीकृत भी कर दिया था। आशंका होने पर जिला समाज कल्याण अधिकारी ने सचिव से सत्यापन कराया तो शोभा दस बीघे भूमि की मालकिन निकली। इस पर उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया।
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योजना की पात्रता-
0 आवेदक की आमदनी शहरी क्षेत्र में 56,450 व ग्रामीण में 46,080 रुपये सालाना से अधिक न हो।
0 परिवार का कमाऊ मुखिया महिला अथवा पुरुष हो।
0 मौत के एक वर्ष के भीतर आवेदन किया गया हो।
0 ऑनलाइन आवेदन की प्रति डाउनलोड कर आय, जाति, निवास एवं मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र एवं बैक खाते की हार्ड कॉपी हस्ताक्षर/अंगूठा निशान के साथ तीन दिन के भीतर विभाग में जमा हो।
0 ऑनलाइन आवेदन के 45 दिन के भीतर योजना का लाभ मुहैया कराया जाएगा।
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इनका कहना है
पारिवारिक लाभ योजना के तहत प्राप्त हुए 1510 आवेदनों में 150 फर्जी निकले हैं। सत्यापन के बाद इन्हें निरस्त करने के साथ ही पात्र लाभार्थियों के खाते में रकम भेज दी गई है। गलत रिपोर्ट लगाने वाले लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसडीएम को पत्र भी लिखा गया है।
सुधीर कुमार-जिला समाज कल्याण अधिकारी