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Kaushambi News: 37 दिनों में तीसरी बार पानी में डूबी 10 हजार बीघे फसल
Thu, 28 Aug 2025 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 28 Aug 2025 02:09 AM IST
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बड़हरी गांव में जलमग्न फसल। संवाद
बीते 37 दिनों में यमुना का जलस्तर तीन बार बढ़ा। इससे तराई के किसानों की तिल और उड़द के अलावा बाजरे की फसल जलमग्न होकर बर्बाद होने के कगार पर पहुंची गई है। पानी में डूबी धान की फसल भी खराब हो सकती है। प्रभावित किसानों के मुताबिक करीब दस हजार बीघे में बोई गई फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है। ग्रामीण अपनी गृहस्थी बचाने और मवेशियों के चारे की व्यवस्था में लगे हैं। प्रभावित ग्रामीण मुआवजे की उम्मीद भी लगाए हैं।
तराई के इलाकों में यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बड़हरी, पभोषा, भवंसुरी, रायपुर, महेवा, मल्हीपुर और पिपरहटा समेत 11 गांव के लोग बाढ़ की आशंका से दहशत में हैं। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखने लगी हैं।
बड़हरी के राम आसरे, हटवा के राजा भइया द्विवेदी, भवंसुरी के पप्पू सिंह आदि ने बताया कि कुछ दिन पहले बाढ़ आई थी। इसमें करीब पांच दिनों तक गांव में बिजली नहीं आई थी। तब लोगों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया था। बाढ़ का पानी हटा तो ग्रामीण गंदगी और पानी की समस्या से परेशान हो उठे। सप्ताह भर गांव में सफाई अभियान चला। हैंडपंप की सफाई आदि के कार्य के बाद ही पानी मिला था।
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अब एक बार फिर बाढ़ का संकट खड़ा हो गया है। पानी अभी गांव तक नहीं आया। लेकिन गांव के बाहर खेतों में खड़ी फसल डूब गई है। बड़हरी गांव का संपर्क टूट गया है। यहां अब नाव से लोग आने-जाने लगे हैं। इसी प्रकार जल स्तर बढ़ता रहा तो अन्य गांव के लोगों का संपर्क भी टूट जाएगा।
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24 घंटे में 97 सेमी बढ़ा यमुना का जलस्तर
-- - पहाड़ों की बारिश का असर नदियों के जल स्तर पर दिखने लगा है। कौशाम्बी में यमुना का जल स्तर खतरे के निशान से अभी करीब चार मीटर नीचे हैं। बढ़ते जल स्तर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बीते 24 घंटे में 97 सेमी पानी बढ़ा है। सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार नदी का पानी 94 मीटर पार करता है तो क्षेत्र में बाढ़ के हालात बन जाते हैं। पानी अभी 90.20 मीटर पर है। अधिशासी अभियंता सिंचाई जगदीश लाल ने बताया कि इस साल 92 मीटर तक नदी का पानी पहुंचा है।
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बाढ़ में डूबी फसल का नहीं मिला मुआवजा
-- यमुना नदी के पानी में वृद्धि का बड़हरी गांव पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। जल स्तर बढ़ने से बीते दो दिनों से बड़हरी में लोग अब नाव से आने-जाने लगे हैं। गांव के किसान राम सूरत, मणिकांत, विजय सेन और केशव प्रसाद निषाद का कहना है कि बीते साल भी फसल पानी में डूबी थी। किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। इस साल भी फसल डूब गई है। भरोसा नहीं है कि इस बार भी मदद मिलेगी। फिर भी वे मुआवजा मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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- बड़हरी समेत अन्य गांवों में बाढ़ में डूबी फसल का सर्वे कराया जा रहा है। मदद का भी निर्देश दिया गया है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ है। बाढ़ प्रभावित किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होगी। - एसपी वर्मा, एसडीएम- मंझनपुर
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तराई के इलाकों में यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बड़हरी, पभोषा, भवंसुरी, रायपुर, महेवा, मल्हीपुर और पिपरहटा समेत 11 गांव के लोग बाढ़ की आशंका से दहशत में हैं। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखने लगी हैं।
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बड़हरी के राम आसरे, हटवा के राजा भइया द्विवेदी, भवंसुरी के पप्पू सिंह आदि ने बताया कि कुछ दिन पहले बाढ़ आई थी। इसमें करीब पांच दिनों तक गांव में बिजली नहीं आई थी। तब लोगों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया था। बाढ़ का पानी हटा तो ग्रामीण गंदगी और पानी की समस्या से परेशान हो उठे। सप्ताह भर गांव में सफाई अभियान चला। हैंडपंप की सफाई आदि के कार्य के बाद ही पानी मिला था।
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अब एक बार फिर बाढ़ का संकट खड़ा हो गया है। पानी अभी गांव तक नहीं आया। लेकिन गांव के बाहर खेतों में खड़ी फसल डूब गई है। बड़हरी गांव का संपर्क टूट गया है। यहां अब नाव से लोग आने-जाने लगे हैं। इसी प्रकार जल स्तर बढ़ता रहा तो अन्य गांव के लोगों का संपर्क भी टूट जाएगा।
24 घंटे में 97 सेमी बढ़ा यमुना का जलस्तर
बाढ़ में डूबी फसल का नहीं मिला मुआवजा
- बड़हरी समेत अन्य गांवों में बाढ़ में डूबी फसल का सर्वे कराया जा रहा है। मदद का भी निर्देश दिया गया है। प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ है। बाढ़ प्रभावित किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं होगी। - एसपी वर्मा, एसडीएम- मंझनपुर