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Kasganj News: स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट वार्ड में नहीं है सीपैप मशीन
Wed, 21 Jan 2026 01:27 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Wed, 21 Jan 2026 01:27 AM IST
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फोटो19जिला अस्पताल में बना एसएनसीयू वार्ड ।संवाद
कासगंज। जिला अस्पताल के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) वार्ड में नवजात शिशुओं के इलाज के लिए जरूरी सीपैप मशीन उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे बच्चों के इलाज में कठिनाई आ रही है। 15 से 20 नवजात बच्चे प्रतिमाह जिला अस्पताल आ रहे हैं। इनको रेफर करना पड़ रहा है।
ठंड के मौसम में नवजात शिशुओं में सांस लेने में दिक्कत, हाइपोथर्मिया और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। जिला अस्पताल में हर माह करीब 15 से 20 नवजात बच्चे सांस की समस्या लेकर भर्ती हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे बच्चों को तुरंत सीपैप मशीन की जरूरत होती है, ताकि उन्हें सांस लेने में मदद मिल सके। लेकिन मशीन न होने के कारण अस्पताल में उनका समुचित इलाज संभव नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में गंभीर हालत वाले नवजातों को मेडिकल कॉलेज या दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।
नवजात शिशुओं को रेफर करने से इलाज में समय लग जाता है, जिससे उनकी हालत और बिगड़ने का खतरा बना रहता है। वहीं परिजनों को भी बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने में आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार दूर के अस्पताल भेजे जाने से इलाज में देरी हो जाती है, जो बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
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ये हैं लक्षण
-तेज सांस लेना
-सांस में रुकी-रुकी आवाज
-त्वचा का नीला पड़ना
-हाथ-पैर ठंडे होना और कमजोरी
एसएनसीयू वार्ड में सीपैप मशीन की डिमांड भेजी गई है। जल्द मशीन मिलने की उम्मीद है। मशीन मिलने के बाद ऐसे बच्चों के इलाज में आसानी हो जाएगी। - डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
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ठंड के मौसम में नवजात शिशुओं में सांस लेने में दिक्कत, हाइपोथर्मिया और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। जिला अस्पताल में हर माह करीब 15 से 20 नवजात बच्चे सांस की समस्या लेकर भर्ती हो रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे बच्चों को तुरंत सीपैप मशीन की जरूरत होती है, ताकि उन्हें सांस लेने में मदद मिल सके। लेकिन मशीन न होने के कारण अस्पताल में उनका समुचित इलाज संभव नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में गंभीर हालत वाले नवजातों को मेडिकल कॉलेज या दूसरे बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।
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नवजात शिशुओं को रेफर करने से इलाज में समय लग जाता है, जिससे उनकी हालत और बिगड़ने का खतरा बना रहता है। वहीं परिजनों को भी बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने में आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार दूर के अस्पताल भेजे जाने से इलाज में देरी हो जाती है, जो बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
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ये हैं लक्षण
-तेज सांस लेना
-सांस में रुकी-रुकी आवाज
-त्वचा का नीला पड़ना
-हाथ-पैर ठंडे होना और कमजोरी
एसएनसीयू वार्ड में सीपैप मशीन की डिमांड भेजी गई है। जल्द मशीन मिलने की उम्मीद है। मशीन मिलने के बाद ऐसे बच्चों के इलाज में आसानी हो जाएगी। - डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस