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Kasganj News: महिलाओं में शुगर का आंकड़ा बढ़कर हुआ 9.8 प्रतिशत
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कासगंज। बदलती जीवनशैली के बीच महिलाओं की सेहत में शुगर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों में पांच साल के भीतर 140 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक रक्त शर्करा या शुगर नियंत्रित करने की दवा लेने वाली महिलाओं का अनुपात 6.7 से बढ़कर 9.8 प्रतिशत हो गया है। वहीं बहुत अधिक रक्त शर्करा वाली महिलाओं के अनुपात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण आंकड़ों के मुताबिक, 141 से 160 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त शर्करा वाली महिलाओं का अनुपात 3.6 से बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गया। वहीं 160 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक रक्त शर्करा वाली महिलाओं का अनुपात 2.8 से बढ़कर 4.6 प्रतिशत पहुंच गया। सबसे ज्यादा चिंता 140 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक शुगर या शुगर नियंत्रित करने की दवा लेने वाली महिलाओं के आंकड़े में हुई 3.1 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को लेकर है।
महिलाओं में शुगर बढ़ने के पीछे खानपान में बदलाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन और दिनचर्या में अनियमितता जैसे कारण प्रमुख हो सकते हैं। कई बार थकान, कमजोरी, अधिक प्यास लगना और बार-बार पेशाब आने जैसे संकेतों को सामान्य मान लिया जाता है। इससे जांच में देरी हो सकती है।
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प्रमुख कारण
-शारीरिक गतिविधि की कमी
-अधिक वजन और मोटापा
-अत्यधिक मीठा व असंतुलित खानपान
-लंबे समय तक बैठे रहने की आदत
-परिवार में मधुमेह का इतिहास
-गर्भावस्था के दौरान बढ़ी रक्त शर्करा का इतिहास
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बचाव के तरीके
-नियमित रक्त शर्करा की जांच कराएं
-रोजाना शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें
-संतुलित और पौष्टिक भोजन लें
-मीठे पेय और अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ सीमित करें
-वजन को नियंत्रित रखने का प्रयास करें
-बार-बार प्यास, पेशाब, थकान या कमजोरी जैसे लक्षणों पर जांच कराएं
वर्जन
जिला अस्पताल में जांच के लिए आने वाली महिलाओं में शुगर के मामले सामने आ रहे हैं। प्रतिदिन करीब 15 से 20 महिलाएं जांच में शुगर से प्रभावित मिल रही हैं। समय रहते जांच और उपचार से स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। -डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस, जिला अस्पताल
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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण आंकड़ों के मुताबिक, 141 से 160 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त शर्करा वाली महिलाओं का अनुपात 3.6 से बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गया। वहीं 160 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक रक्त शर्करा वाली महिलाओं का अनुपात 2.8 से बढ़कर 4.6 प्रतिशत पहुंच गया। सबसे ज्यादा चिंता 140 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक शुगर या शुगर नियंत्रित करने की दवा लेने वाली महिलाओं के आंकड़े में हुई 3.1 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को लेकर है।
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महिलाओं में शुगर बढ़ने के पीछे खानपान में बदलाव, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन और दिनचर्या में अनियमितता जैसे कारण प्रमुख हो सकते हैं। कई बार थकान, कमजोरी, अधिक प्यास लगना और बार-बार पेशाब आने जैसे संकेतों को सामान्य मान लिया जाता है। इससे जांच में देरी हो सकती है।
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प्रमुख कारण
-शारीरिक गतिविधि की कमी
-अधिक वजन और मोटापा
-अत्यधिक मीठा व असंतुलित खानपान
-लंबे समय तक बैठे रहने की आदत
-परिवार में मधुमेह का इतिहास
-गर्भावस्था के दौरान बढ़ी रक्त शर्करा का इतिहास
बचाव के तरीके
-नियमित रक्त शर्करा की जांच कराएं
-रोजाना शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें
-संतुलित और पौष्टिक भोजन लें
-मीठे पेय और अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ सीमित करें
-वजन को नियंत्रित रखने का प्रयास करें
-बार-बार प्यास, पेशाब, थकान या कमजोरी जैसे लक्षणों पर जांच कराएं
वर्जन
जिला अस्पताल में जांच के लिए आने वाली महिलाओं में शुगर के मामले सामने आ रहे हैं। प्रतिदिन करीब 15 से 20 महिलाएं जांच में शुगर से प्रभावित मिल रही हैं। समय रहते जांच और उपचार से स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। -डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस, जिला अस्पताल