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Kasganj News: बाढ़ ने रोकी एंबुलेंस, प्रसव पीड़ा में अपनों की गोद बनी सहारा
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फोटो 34- ग्राम मूंझखेड़ा में बाढ़ के पानी के बीच नाव से प्रसव पीड़िता को अस्पताल ले जाते परिजन।
पटियाली। जब चारों ओर सिर्फ पानी हो। रास्ते डूब चुके हों। जिंदगी पेट में पल रहे नौ माह के गर्भ के साथ दर्द से छटपटा रही हो तो बेबसी क्या होती है, यह मुंजखेड़ा गांव में शुक्रवार शाम को साफ दिखी। बाढ़ के पानी ने जब 108 एंबुलेंस के पहिये रोक दिए तो परिजनों का हौसला और अपनों की गोद ही एंबुलेंस बन गई। पानी के बीच गुजरी प्रसव पीड़ा आखिरकार अस्पताल तक सुरक्षित पहुंची और वहां बेटी का जन्म हुआ।
तहसील क्षेत्र का मुंजखेड़ा गांव इन दिनों गंगा की बाढ़ से घिरा हुआ है। गांव के रिंकू की पत्नी निहारिका (25) को शुक्रवार शाम अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। दर्द से कराहती गर्भवती को देख परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई लेकिन गांव का मुख्य संपर्क मार्ग जलमग्न होने के कारण एंबुलेंस गांव के भीतर तक पहुंचने में लाचार साबित हुई।
पानी से होकर नाव तक पहुंचे
हर बीतते पल के साथ महिला का दर्द बढ़ रहा था। परिजनों ने हिम्मत नहीं हारी। निहारिका को अपनी गोद में उठाया और पानी से होते हुए गांव के छोर पर बंधी नाव तक लेकर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से बाढ़ के पानी को पार कर गर्भवती को दूसरे किनारे पर पहुंचाया गया, जहां पहले से एंबुलेंस उनका इंतजार कर रही थी। एंबुलेंस से तत्काल पटियाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव हुआ और निहारिका ने एक नन्हीं परी को जन्म दिया।
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एक दर्जन गांवों में पानी का पहरा
बाढ़ग्रस्त गांवों की हकीकत परेशान करने वाली है। मुंजखेड़ा, नगला जैली और राजेपुर कुर्रा सहित करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट चुका है। आवागमन पूरी तरह ठप होने से गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना रोज जान पर खेलने जैसा साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासनिक स्तर पर मोटरबोट या वाटर-एंबुलेंस जैसी स्थायी राहत व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
महिला को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सीएचसी लाया गया था। यहां सुरक्षित प्रसव कराया गया है। उसने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया है। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और मेडिकल टीम की निगरानी में हैं।
-डॉ. शिवा श्री, चिकित्सा अधीक्षक, पटियाली सीएचसी
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तहसील क्षेत्र का मुंजखेड़ा गांव इन दिनों गंगा की बाढ़ से घिरा हुआ है। गांव के रिंकू की पत्नी निहारिका (25) को शुक्रवार शाम अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। दर्द से कराहती गर्भवती को देख परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में 108 एंबुलेंस को सूचना दी गई लेकिन गांव का मुख्य संपर्क मार्ग जलमग्न होने के कारण एंबुलेंस गांव के भीतर तक पहुंचने में लाचार साबित हुई।
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पानी से होकर नाव तक पहुंचे
हर बीतते पल के साथ महिला का दर्द बढ़ रहा था। परिजनों ने हिम्मत नहीं हारी। निहारिका को अपनी गोद में उठाया और पानी से होते हुए गांव के छोर पर बंधी नाव तक लेकर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से बाढ़ के पानी को पार कर गर्भवती को दूसरे किनारे पर पहुंचाया गया, जहां पहले से एंबुलेंस उनका इंतजार कर रही थी। एंबुलेंस से तत्काल पटियाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की देखरेख में सुरक्षित प्रसव हुआ और निहारिका ने एक नन्हीं परी को जन्म दिया।
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एक दर्जन गांवों में पानी का पहरा
बाढ़ग्रस्त गांवों की हकीकत परेशान करने वाली है। मुंजखेड़ा, नगला जैली और राजेपुर कुर्रा सहित करीब एक दर्जन गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट चुका है। आवागमन पूरी तरह ठप होने से गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना रोज जान पर खेलने जैसा साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासनिक स्तर पर मोटरबोट या वाटर-एंबुलेंस जैसी स्थायी राहत व्यवस्था नहीं की गई तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
महिला को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से सीएचसी लाया गया था। यहां सुरक्षित प्रसव कराया गया है। उसने एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया है। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं और मेडिकल टीम की निगरानी में हैं।
-डॉ. शिवा श्री, चिकित्सा अधीक्षक, पटियाली सीएचसी