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नौकर को आजीवन कारावास: रिटायर्ड एडीएम का बेरहमी से किया कत्ल, पुलिस ने खून से सने जूते से दबोचा था आरोपी
Mon, 12 Oct 2026 10:25 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: Arun Parashar
Updated Mon, 12 Oct 2026 10:25 PM IST
सार
पुलिस को घटनास्थल से वहां खून से सना एक जूता मिला था। जूते और तकनीकी साक्ष्यों (सीडीआर) के आधार पर पुलिस धर्मेंद्र तक पहुंची। उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त सब्बल और चोरी की गई बैटरी-इन्वर्टर बरामद हुए। अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह और 15 अभिलेखीय साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए गए।
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कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
कासगंज के मीनाक्षी गेस्ट हाउस के संचालक व सेवानिवृत्त एडीएम राजेंद्र प्रसाद की हत्या के मामले में अदालत ने सोमवार को नौकर धर्मेंद्र कश्यप को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने वारदात के महज 20 माह 21 दिन बाद फैसला सुनाते हुए दोषी पर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
राजेंद्र प्रसाद मूलरूप से जनपद के गांव गोरहा के रहने वाले थे। उनका परिवार गाजियाबाद में रहता है। वादी शुभम कश्यप की एफआईआर के अनुसार, 20-21 जनवरी 2025 की रात सोरोंजी रोड स्थित गेस्ट हाउस में सोते समय उनके पिता राजेंद्र प्रसाद के सिर पर भारी हथियार से वार कर हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम में शरीर पर 11 गंभीर चोटें मिली थीं।
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राजेंद्र प्रसाद मूलरूप से जनपद के गांव गोरहा के रहने वाले थे। उनका परिवार गाजियाबाद में रहता है। वादी शुभम कश्यप की एफआईआर के अनुसार, 20-21 जनवरी 2025 की रात सोरोंजी रोड स्थित गेस्ट हाउस में सोते समय उनके पिता राजेंद्र प्रसाद के सिर पर भारी हथियार से वार कर हत्या कर दी गई थी। पोस्टमार्टम में शरीर पर 11 गंभीर चोटें मिली थीं।
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जांच में सामने आया कि घटना से कुछ दिन पूर्व गेस्ट हाउस में चोरी हुई थी। चोरी का कुछ सामान दूसरे नौकर पुष्पेंद्र के पास होने की जानकारी राजेंद्र प्रसाद को मिली थी और 18 जनवरी को उन्होंने उससे पूछताछ भी की थी। इसी चोरी का राज खुलने के डर से नौकर धर्मेंद्र कश्यप निवासी नगला कंचन ने हत्या को अंजाम दिया था। पुलिस ने जांच के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
खून से सने जूते ने पुलिस को हत्यारे तक पहुंचाया
तत्कालीन इंस्पेक्टर लोकेश भाटी के नेतृत्व में पुलिस, डॉग स्क्वॉड, एफएसएल टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए तो वहां खून से सना एक जूता मिला। जूते और तकनीकी साक्ष्यों (सीडीआर) के आधार पर पुलिस धर्मेंद्र तक पहुंची। उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त सब्बल और चोरी की गई बैटरी-इन्वर्टर बरामद हुए। अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह और 15 अभिलेखीय साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए गए।
नए कानून के तहत मिली सजा
ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) हत्या और 317 (2) चोरी के तहत धर्मेंद्र को दोषी करार दिया। धारा 103 (1) में उसे आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 317 (2) में 2 वर्ष का साधारण कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। जुर्माना न देने पर 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने आदेश दिया है कि वसूल किए गए अर्थदंड का 75 प्रतिशत हिस्सा पीड़ित पक्ष को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।
खून से सने जूते ने पुलिस को हत्यारे तक पहुंचाया
तत्कालीन इंस्पेक्टर लोकेश भाटी के नेतृत्व में पुलिस, डॉग स्क्वॉड, एफएसएल टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए तो वहां खून से सना एक जूता मिला। जूते और तकनीकी साक्ष्यों (सीडीआर) के आधार पर पुलिस धर्मेंद्र तक पहुंची। उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त सब्बल और चोरी की गई बैटरी-इन्वर्टर बरामद हुए। अभियोजन पक्ष की ओर से 11 गवाह और 15 अभिलेखीय साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए गए।
नए कानून के तहत मिली सजा
ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (1) हत्या और 317 (2) चोरी के तहत धर्मेंद्र को दोषी करार दिया। धारा 103 (1) में उसे आजीवन कारावास व 50 हजार रुपये जुर्माना और धारा 317 (2) में 2 वर्ष का साधारण कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। जुर्माना न देने पर 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने आदेश दिया है कि वसूल किए गए अर्थदंड का 75 प्रतिशत हिस्सा पीड़ित पक्ष को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।