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Kasganj News: न पीने का पानी, न शौचालय, रात में असामाजिक तत्वों का डेरा
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फोटो संख्या 13- प्रशांत माहेश्वरी। स्रोत संवाद
सोरोंजी। पौराणिक तीर्थनगरी का बस स्टैंड लंबे समय से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। परिवहन निगम के अधिकारियों की लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं की आस्था का यह प्रमुख केंद्र पूरी तरह उपेक्षित है। हैरानी की बात यह है कि यहां राजस्थान परिवहन निगम की बसें तो नियमित रूप से आ रही हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसें अंदर आने के बजाय बाईपास से ही सीधे निकल जाती हैं।
इससे यात्रियों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ता है। निगम के चालक, परिचालक और अधिकारी न तो यात्रियों की सुविधा के लिए गंभीर हैं और न ही विभाग की कमाई बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
बस स्टैंड परिसर की हालत भी बेहद दयनीय हो चुकी है। देखरेख न होने से फर्श जगह-जगह से धंस गया है और गहरे गड्ढे बन गए हैं। यात्रियों के लिए लगा इंडिया मार्का हैंडपंप महीनों से सूखा पड़ा है। सबसे खतरनाक स्थिति यहां के शौचालय की है, जिसका जर्जर लिंटर कभी भी गिर सकता है और कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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रही-सही कसर चोरों ने पूरी कर दी। परिसर में लगी सोलर लाइटें पहले से खराब थीं, और पिछले दिनों अराजक तत्व उनकी प्लेट और बैटरियां भी चोरी कर ले गए। अब पूरा बस स्टैंड रात के समय अंधेरे में डूबा रहता है। रोशनी न होने से यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे रात में आने-जाने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और श्रद्धालुओं में असुरक्षा का माहौल है।
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प्रभावित हो रहा कारोबार
- तीर्थनगरी में प्रतिदिन कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में परिवहन निगम द्वारा इन राज्यों के प्रमुख गंतव्य स्थलों के लिए सीधी बस सेवा शुरू न करना बेहद अनुचित है। इससे पर्यटन और स्थानीय कारोबार दोनों प्रभावित हो रहा है। - प्रशांत माहेश्वरी, कारोबारी
- तीर्थनगरी के बस स्टैंड से यूपी रोडवेज की बसें न चलाना और इस परिसर को उपेक्षित छोड़ देना अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है। परिसर में यात्रियों के लिए सुविधाएं भी नहीं हैं।- विशंभर दयाल चौधरी, तीर्थपुरोहित
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वर्जन-
तीर्थनगरी के बस स्टैंड की समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे है। समस्याओं के बारे में जानकारी ली जाएगी। -संजीव कुमार, एसडीएम सदर
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इससे यात्रियों को घंटों तक बसों का इंतजार करना पड़ता है। निगम के चालक, परिचालक और अधिकारी न तो यात्रियों की सुविधा के लिए गंभीर हैं और न ही विभाग की कमाई बढ़ाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
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बस स्टैंड परिसर की हालत भी बेहद दयनीय हो चुकी है। देखरेख न होने से फर्श जगह-जगह से धंस गया है और गहरे गड्ढे बन गए हैं। यात्रियों के लिए लगा इंडिया मार्का हैंडपंप महीनों से सूखा पड़ा है। सबसे खतरनाक स्थिति यहां के शौचालय की है, जिसका जर्जर लिंटर कभी भी गिर सकता है और कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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रही-सही कसर चोरों ने पूरी कर दी। परिसर में लगी सोलर लाइटें पहले से खराब थीं, और पिछले दिनों अराजक तत्व उनकी प्लेट और बैटरियां भी चोरी कर ले गए। अब पूरा बस स्टैंड रात के समय अंधेरे में डूबा रहता है। रोशनी न होने से यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे रात में आने-जाने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और श्रद्धालुओं में असुरक्षा का माहौल है।
प्रभावित हो रहा कारोबार
- तीर्थनगरी में प्रतिदिन कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में परिवहन निगम द्वारा इन राज्यों के प्रमुख गंतव्य स्थलों के लिए सीधी बस सेवा शुरू न करना बेहद अनुचित है। इससे पर्यटन और स्थानीय कारोबार दोनों प्रभावित हो रहा है। - प्रशांत माहेश्वरी, कारोबारी
- तीर्थनगरी के बस स्टैंड से यूपी रोडवेज की बसें न चलाना और इस परिसर को उपेक्षित छोड़ देना अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है। परिसर में यात्रियों के लिए सुविधाएं भी नहीं हैं।- विशंभर दयाल चौधरी, तीर्थपुरोहित
वर्जन-
तीर्थनगरी के बस स्टैंड की समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे है। समस्याओं के बारे में जानकारी ली जाएगी। -संजीव कुमार, एसडीएम सदर

फोटो संख्या 13- प्रशांत माहेश्वरी। स्रोत संवाद

फोटो संख्या 13- प्रशांत माहेश्वरी। स्रोत संवाद