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Kasganj News: पटियाली के 10 गांवों का संपर्क टूटा, नाव बनी जिंदगी का सहारा
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फोटो41सनौढ़ी पुल के पास भरे बाढ़ के पानी के बीच से लोगों को नाव में बैठाकर ले जाते नाविक पेशक
कासगंज। पटियाली तहसील से करीब 20 किमी दूर नगला जयकिशन गांव लगभग 30 दिन से बाढ़ की आपदा झेल रहा है। गांव को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर करीब दो किमी पहले बना पुल तीन साल पहले आई बाढ़ में बह गया था। आम दिनों में वाहन पुल के पास बने कच्चे रास्ते से निकलते हैं, लेकिन इस समय पूरे इलाके में गंगा का कई फीट पानी भर गया है।
इससे नगला जयकिशन, नगला दुर्जन, नगला जैदी और नगला खना समेत करीब 10 से अधिक गांवों का मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट चुका है। आवागमन का एकमात्र जरिया नाव और स्टीमर बचे हैं। हर साल बाढ़ का पानी इन गांवों के लोगों को खून के आंसू रुलाता है, लेकिन न तो अब तक पुल का दोबारा निर्माण हुआ और न ही कच्चा बांध बना।
स्थिति का जायजा लेने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम मंगलवार को ग्राउंड जीरो पर पहुंची। पटियाली से सनौड़ी खास होते हुए आगे बढ़ने पर नगला जयकिशन से करीब 3 किमी पहले ही चारों ओर बाढ़ का पानी दिखने लगा। एक किमी आगे रास्ता थम गया। सामने टूटा पुल नजर आया, जिसके पास कुछ युवक नाव पर वाहन चढ़ा रहे थे।
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नाव चला रहे बुजुर्ग पेशकार ने बताया कि तीन साल पहले बाढ़ में पुल टूटा था, लेकिन अब तक दोबारा नहीं बना। हर साल बाढ़ आने पर वह नाव से ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और बीमारों को पार पहुंचाते हैं। करीब 30 दिनों से वह लोगों, दो पहिया वाहनों और सामान को दूसरे छोर तक ले जा रहे हैं। रात 11 बजे तक अंधेरे में नाव चलानी पड़ रही है। अगर किसी गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो आधी रात में भी जागना पड़ता है। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 350 बच्चों को टूटे पुल के पार पहुंचाना होता है, ताकि वे स्कूल जा सकें।
दूसरी ओर पहुंचने पर कई ग्रामीण नाव का इंतजार करते मिले। नगला जयकिशन के साधु सिंह यादव ने कहा कि नाव ही आवागमन का सहारा है। गांव के चारों ओर कई फीट पानी घुस आया है। नगला खना के श्री किशन ने बताया कि सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न हो गए हैं और फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ तबाही मचाती है, लेकिन उनका दर्द समझने वाला कोई नहीं है। अधिकारी, जनप्रतिनिधि हर साल बांध और पुल बनवाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन अब तक एक भी ईंट नहीं लगी है।
टूटे पुल से नगला जयकिशन की ओर बढ़ने पर रास्ता दो जगह बाढ़ के पानी से कटा मिला। गांव के लोगों ने बालू की बोरियां भरकर अस्थायी रूप से जोड़ रखा है, ताकि आगे कटान न हो सके। नगला जयकिशन पहुंचने पर बुग्गी पर बैठे बुजुर्ग राजवीर ने बताया कि गांव टापू बन चुका है और लोग फंसे हुए हैं। हर साल बाढ़ तबाही मचाती है और कुछ नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि अगर नगला हंसी से राजेपुर कुर्रा तक कच्चा बांध बन जाए तो गंगा का पानी फर्रुखाबाद सीमा की ओर निकल जाएगा और इलाके के गांवों को बाढ़ की त्रासदी से मुक्ति मिल जाएगी। डीएम से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से बांध बनवाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन कोरे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
गांव के बुजुर्ग सत्यराम ने बताया कि बाढ़ के प्रकोप से कुछ नहीं बचा है। फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। चारों ओर पानी और गंदगी फैली है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। हर घर में लोग बीमार हैं, लेकिन सड़क संपर्क टूटने से वे अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे।
नगला जयकिशन से नगला दुर्जन जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी भरा था। वहां के हालात भी ऐसे ही थे। चारों ओर पानी भरा था, बीच में लोग घरों में दुबके थे। बच्चे घरों के बाहर खेल रहे थे। गांव के उर्वेश ने बताया कि जलभराव और गंदगी से मवेशी बीमार पड़ रहे हैं। पानी कम होने पर पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने पहुंचकर दवाइयां दी थीं, लेकिन उसके बाद टीम वापस नहीं आई। पशुओं का चारा बाढ़ के पानी में बह चुका है। उन्हें चराने के लिए 5 किमी दूर जाना पड़ रहा है।
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लोगों की बातचीत
गुरुग्राम से आ रहा हूं। नाव के जरिये गांव तक पहुंचना पड़ रहा है। अंदर गांव के रास्ते में भी पानी भरा है। काफी दिक्कत हो रही है। -साधु, नगला जयकिशन
बाढ़ का पानी भरने से फसलें बर्बाद हो चुकी है। बाजरे की पांच बीघा में फसल लगाई थी। अब कुछ नहीं बचा है। प्रशासन को मदद करनी चाहिए। -श्री किशन, नगला खना
20 बीघा बाजरा की फसल बोई थी। खेत में बाढ़ का पानी भरने से फसल बर्बाद हो गई है। बाढ़ से बचाव के लिए कच्चा बांध बनाया जाए। -भूरे, नगला खना
एटा से रिश्तेदारी में नगला जयकिशन गांव आया हूं। पुल टूटा है और बाढ़ का पानी चारों ओर भरा हुआ है। नाव के जरिये बाइक दूसरे छोर ले जानी पड़ रही है। -चंचल पहलवान, गांव जैथरा
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इससे नगला जयकिशन, नगला दुर्जन, नगला जैदी और नगला खना समेत करीब 10 से अधिक गांवों का मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट चुका है। आवागमन का एकमात्र जरिया नाव और स्टीमर बचे हैं। हर साल बाढ़ का पानी इन गांवों के लोगों को खून के आंसू रुलाता है, लेकिन न तो अब तक पुल का दोबारा निर्माण हुआ और न ही कच्चा बांध बना।
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स्थिति का जायजा लेने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम मंगलवार को ग्राउंड जीरो पर पहुंची। पटियाली से सनौड़ी खास होते हुए आगे बढ़ने पर नगला जयकिशन से करीब 3 किमी पहले ही चारों ओर बाढ़ का पानी दिखने लगा। एक किमी आगे रास्ता थम गया। सामने टूटा पुल नजर आया, जिसके पास कुछ युवक नाव पर वाहन चढ़ा रहे थे।
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नाव चला रहे बुजुर्ग पेशकार ने बताया कि तीन साल पहले बाढ़ में पुल टूटा था, लेकिन अब तक दोबारा नहीं बना। हर साल बाढ़ आने पर वह नाव से ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और बीमारों को पार पहुंचाते हैं। करीब 30 दिनों से वह लोगों, दो पहिया वाहनों और सामान को दूसरे छोर तक ले जा रहे हैं। रात 11 बजे तक अंधेरे में नाव चलानी पड़ रही है। अगर किसी गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो आधी रात में भी जागना पड़ता है। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 350 बच्चों को टूटे पुल के पार पहुंचाना होता है, ताकि वे स्कूल जा सकें।
दूसरी ओर पहुंचने पर कई ग्रामीण नाव का इंतजार करते मिले। नगला जयकिशन के साधु सिंह यादव ने कहा कि नाव ही आवागमन का सहारा है। गांव के चारों ओर कई फीट पानी घुस आया है। नगला खना के श्री किशन ने बताया कि सैकड़ों बीघा खेत जलमग्न हो गए हैं और फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ तबाही मचाती है, लेकिन उनका दर्द समझने वाला कोई नहीं है। अधिकारी, जनप्रतिनिधि हर साल बांध और पुल बनवाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन अब तक एक भी ईंट नहीं लगी है।
टूटे पुल से नगला जयकिशन की ओर बढ़ने पर रास्ता दो जगह बाढ़ के पानी से कटा मिला। गांव के लोगों ने बालू की बोरियां भरकर अस्थायी रूप से जोड़ रखा है, ताकि आगे कटान न हो सके। नगला जयकिशन पहुंचने पर बुग्गी पर बैठे बुजुर्ग राजवीर ने बताया कि गांव टापू बन चुका है और लोग फंसे हुए हैं। हर साल बाढ़ तबाही मचाती है और कुछ नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि अगर नगला हंसी से राजेपुर कुर्रा तक कच्चा बांध बन जाए तो गंगा का पानी फर्रुखाबाद सीमा की ओर निकल जाएगा और इलाके के गांवों को बाढ़ की त्रासदी से मुक्ति मिल जाएगी। डीएम से लेकर जनप्रतिनिधियों तक से बांध बनवाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन कोरे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
गांव के बुजुर्ग सत्यराम ने बताया कि बाढ़ के प्रकोप से कुछ नहीं बचा है। फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। चारों ओर पानी और गंदगी फैली है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। हर घर में लोग बीमार हैं, लेकिन सड़क संपर्क टूटने से वे अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे।
नगला जयकिशन से नगला दुर्जन जाने वाले रास्ते पर कमर तक पानी भरा था। वहां के हालात भी ऐसे ही थे। चारों ओर पानी भरा था, बीच में लोग घरों में दुबके थे। बच्चे घरों के बाहर खेल रहे थे। गांव के उर्वेश ने बताया कि जलभराव और गंदगी से मवेशी बीमार पड़ रहे हैं। पानी कम होने पर पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने पहुंचकर दवाइयां दी थीं, लेकिन उसके बाद टीम वापस नहीं आई। पशुओं का चारा बाढ़ के पानी में बह चुका है। उन्हें चराने के लिए 5 किमी दूर जाना पड़ रहा है।
लोगों की बातचीत
गुरुग्राम से आ रहा हूं। नाव के जरिये गांव तक पहुंचना पड़ रहा है। अंदर गांव के रास्ते में भी पानी भरा है। काफी दिक्कत हो रही है। -साधु, नगला जयकिशन
बाढ़ का पानी भरने से फसलें बर्बाद हो चुकी है। बाजरे की पांच बीघा में फसल लगाई थी। अब कुछ नहीं बचा है। प्रशासन को मदद करनी चाहिए। -श्री किशन, नगला खना
20 बीघा बाजरा की फसल बोई थी। खेत में बाढ़ का पानी भरने से फसल बर्बाद हो गई है। बाढ़ से बचाव के लिए कच्चा बांध बनाया जाए। -भूरे, नगला खना
एटा से रिश्तेदारी में नगला जयकिशन गांव आया हूं। पुल टूटा है और बाढ़ का पानी चारों ओर भरा हुआ है। नाव के जरिये बाइक दूसरे छोर ले जानी पड़ रही है। -चंचल पहलवान, गांव जैथरा