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Kasganj News: जन्माष्टमी पर खास अंदाज में सजेगा कान्हा का दरबार
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फोटो 10 कासगंज में जन्माष्टमी के लिए तैयार की गई कान्हा की पगड़ी। स्रोत: संवाद
कासगंज। इस बार जन्माष्टमी पर कान्हा का शृंगार अकेला नहीं बल्कि पूरे मंदिर की प्रतिमाओं के साथ मैचिंग रंग और थीम में नजर आएगा। भक्तों की बदलती पसंद ने भगवान के परिधानों को एक नया और आधुनिक अंदाज दे दिया है, जिससे इस कला से जुड़ी महिला कारीगरों की व्यस्तता काफी बढ़ गई है।
पारंपरिक रूप से पर्व पर केवल कान्हा की पोशाक और मुकुट की मांग रहती थी लेकिन अब भक्त पूरे मंदिर के लिए एक जैसी थीम चुन रहे हैं। पोशाक के रंग से लेकर मुकुट, मोती की माला और अन्य शृंगार सामग्री को आपस में पूरी तरह मैच कराया जा रहा है। बाजार में लाल, गुलाबी, पीले, नीले और सफेद रंगों की फैदर वाली स्टोन वर्क पोशाकें सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं।
महिला कारीगर शैफाली माहेश्वरी बताती हैं कि फैदर की ड्रेस पर स्टोन वर्क करना बेहद बारीकी का काम है। पहले पोशाक तैयार की जाती है और फिर उसके डिजाइन के मुताबिक मुकुट और माला बनाई जाती है। पर्व नजदीक होने के कारण काम के घंटे भी बढ़ाने पड़े हैं।
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वहीं, विक्रेता टीना के अनुसार, पहले रेडीमेड कपड़ों की बिक्री ज्यादा होती थी लेकिन अब ग्राहक अपनी पसंद के आकार और रंग बताकर कस्टमाइज्ड ऑर्डर दे रहे हैं।इससे महिला कारीगरों को नए रोजगार और अच्छे अवसर मिल रहे हैं।
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पारंपरिक रूप से पर्व पर केवल कान्हा की पोशाक और मुकुट की मांग रहती थी लेकिन अब भक्त पूरे मंदिर के लिए एक जैसी थीम चुन रहे हैं। पोशाक के रंग से लेकर मुकुट, मोती की माला और अन्य शृंगार सामग्री को आपस में पूरी तरह मैच कराया जा रहा है। बाजार में लाल, गुलाबी, पीले, नीले और सफेद रंगों की फैदर वाली स्टोन वर्क पोशाकें सबसे ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं।
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महिला कारीगर शैफाली माहेश्वरी बताती हैं कि फैदर की ड्रेस पर स्टोन वर्क करना बेहद बारीकी का काम है। पहले पोशाक तैयार की जाती है और फिर उसके डिजाइन के मुताबिक मुकुट और माला बनाई जाती है। पर्व नजदीक होने के कारण काम के घंटे भी बढ़ाने पड़े हैं।
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वहीं, विक्रेता टीना के अनुसार, पहले रेडीमेड कपड़ों की बिक्री ज्यादा होती थी लेकिन अब ग्राहक अपनी पसंद के आकार और रंग बताकर कस्टमाइज्ड ऑर्डर दे रहे हैं।इससे महिला कारीगरों को नए रोजगार और अच्छे अवसर मिल रहे हैं।

फोटो 10 कासगंज में जन्माष्टमी के लिए तैयार की गई कान्हा की पगड़ी। स्रोत: संवाद