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Kasganj News: कान में बज रही सीटी तो न करें नजर अंदाज
Mon, 22 Dec 2025 11:22 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Mon, 22 Dec 2025 11:22 PM IST
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फोटो07जिला अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे मरीज। संवाद
कासगंज। कान में सीटी बजना, भारीपन महसूस होना या सुनने में कमी को हल्के में लेना आपकी सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। कड़ाके की ठंड के बीच जिले में कान में संक्रमण (ईयर इंफेक्शन) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं जिला अस्पताल में पिछले करीब सवा साल से ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं होने के कारण मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
इन दिनों बर्फीली हवाओं के चलते तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कंपकंपी छुटा देने वाली ठंड का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सर्दी-जुकाम, खांसी के साथ अब कान से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगी हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कान शरीर का ऐसा अंग है जिसे लोग अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर युवा वर्ग टोपी या मफलर पहनने से परहेज करता है, जिससे ठंडी हवा सीधे कानों को प्रभावित कर रही है। समय पर इलाज न मिलने पर समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में ईएनटी चिकित्सक न होने से कान की बीमारी लेकर आने वाले मरीजों को अन्य विभागों के चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ रहा है। इससे जटिल मरीजों को बाहर रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम होने पर नाक और कान के बीच स्थित यूस्टेशियन ट्यूब के माध्यम से नाक का पानी कान तक पहुंच जाता है। इससे कान के मध्य भाग में संक्रमण हो जाता है। कई मामलों में कफ जमने से यह ट्यूब ब्लॉक हो जाती है, इससे न केवल संक्रमण बढ़ता है बल्कि सुनने की क्षमता भी प्रभावित होने लगती है।
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इन दिनों बर्फीली हवाओं के चलते तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कंपकंपी छुटा देने वाली ठंड का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सर्दी-जुकाम, खांसी के साथ अब कान से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगी हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कान शरीर का ऐसा अंग है जिसे लोग अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर युवा वर्ग टोपी या मफलर पहनने से परहेज करता है, जिससे ठंडी हवा सीधे कानों को प्रभावित कर रही है। समय पर इलाज न मिलने पर समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसके बावजूद जिला अस्पताल में ईएनटी चिकित्सक न होने से कान की बीमारी लेकर आने वाले मरीजों को अन्य विभागों के चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ रहा है। इससे जटिल मरीजों को बाहर रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजीव सक्सेना ने बताया कि ठंड के मौसम में सर्दी-जुकाम होने पर नाक और कान के बीच स्थित यूस्टेशियन ट्यूब के माध्यम से नाक का पानी कान तक पहुंच जाता है। इससे कान के मध्य भाग में संक्रमण हो जाता है। कई मामलों में कफ जमने से यह ट्यूब ब्लॉक हो जाती है, इससे न केवल संक्रमण बढ़ता है बल्कि सुनने की क्षमता भी प्रभावित होने लगती है।
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