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Kasganj News: खेतों की पगडंडी से गोल्ड मेडल तक, अब पीसीएस अफसर बनने का सपना
Mon, 06 Jul 2026 11:30 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Mon, 06 Jul 2026 11:30 PM IST
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श्रीशंकर सिंह महाविद्यालय विकास नगर सिढ्पुरा की गोल्ड मेडल प्राप्त छात्रा शिल्पी। स्रोत स्वयं
कासगंज। श्रीशंकर सिंह महाविद्यालय, विकास नगर सिढ़पुरा की छात्रा शिल्पी ने बीएससी में स्वर्ण पदक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली शिल्पी की सफलता संघर्ष, अनुशासन और कड़ी मेहनत की मिसाल बन गई है। अब उनका लक्ष्य पीसीएस अधिकारी बनकर समाज और प्रदेश की सेवा करना है।
शिल्पी चार भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर हैं। उनके पिता भगवान दास खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता मुन्नी देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग किया, जिसका परिणाम आज स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है।
शिल्पी ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया का सीमित उपयोग किया और अधिकतर समय अपनी पढ़ाई व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को दिया। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो अनुशासन और निरंतर मेहनत से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।
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महाविद्यालय के शिक्षकों ने शिल्पी की सफलता को अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि उन्होंने साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। शिल्पी की इस उपलब्धि से परिवार, गांव और महाविद्यालय में खुशी का माहौल है।
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शिल्पी चार भाई-बहनों में तीसरे स्थान पर हैं। उनके पिता भगवान दास खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता मुन्नी देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग किया, जिसका परिणाम आज स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है।
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शिल्पी ने बताया कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया का सीमित उपयोग किया और अधिकतर समय अपनी पढ़ाई व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को दिया। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो अनुशासन और निरंतर मेहनत से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।
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महाविद्यालय के शिक्षकों ने शिल्पी की सफलता को अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि उन्होंने साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। शिल्पी की इस उपलब्धि से परिवार, गांव और महाविद्यालय में खुशी का माहौल है।