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Kasganj News: भीषण गर्मी भी नहीं डिगा सकी आस्था, हर-हर गंगे के जयकारों से गूंजे गंगा घाट
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फोटो10कासगंज में दशहरा पर्व पर बालक का मुंडन कराते श्रद्धालु। संवाद
कासगंज। आसमान से बरसती आग और नौतपा के पहले ही दिन की रिकॉर्डतोड़ गर्मी भी मां गंगा के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा को डिगा नहीं सकी। सोमवार को गंगा दशहरा के पावन अवसर पर कासगंज के विभिन्न गंगातटों पर आस्था का ऐसा ऐतिहासिक सैलाब उमड़ा कि चारों ओर सिर्फ और सिर्फ श्रद्धालु ही नजर आ रहे थे। पारा 46.2 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के बावजूद जिले के विभिन्न घाटों पर करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा की पावन धारा में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमाया।
सोमवार तड़के ही घाटों पर ''हर-हर गंगे, जय मां गंगे'' के गगनभेदी जयकारे गूंजने लगे। श्रद्धालुओं ने मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया, छप्पन भोग लगाए और महाआरती उतारकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
सुबह जैसे ही घाटों के मंदिरों में घंटे-घड़ियाल गूंजे, भक्तों का हुजूम गंगा की धार की ओर दौड़ पड़ा। सुबह 6 बजे तक आलम यह था कि घाटों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। हर कोई पवित्र जल में जल्द से जल्द डुबकी लगा लेना चाहता था, जिससे वहां एक अनूठा और विहंगम नजारा देखने को मिला। दोपहर तक घाटों पर श्रद्धालुओं का भारी दबाव बना रहा।
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रेतीली तलहटी में रातभर गूंजे ढोलक-मंजीरे
गंगा स्नान के लिए दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला रविवार शाम से ही शुरू हो गया था। तीर्थनगरी सोरों, लहरा, कछला, कादरगंज और इस्माइलपुर-अललीपुर बरबारा गंगाघाटों पर हजारों भक्तों ने रात में ही डेरा डाल दिया था। सूखी रेतीली तलहटी में रातभर कहीं मां गंगा की महिमा का गुणगान हुआ, तो कहीं ढोलक-मंजीरों की थाप पर भजन-कीर्तन के दौर चलते रहे, जिससे पूरा माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
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यादों को समेटने के लिए सेल्फी का क्रेज
इस पावन अध्यात्म के बीच आधुनिक रंग भी देखने को मिला। गंगास्नान के दौरान तमाम श्रद्धालु और परिवार के सदस्य अपने मोबाइल से सेल्फी लेना नहीं भूले। गंगा की लहरों के बीच लोग खूबसूरत यादों को कैमरे में कैद करते नजर आए, तो वहीं बहुत से लोगों ने घाटों पर मौजूद पेशेवर फोटोग्राफरों से अपनी तस्वीरें भी खिंचवाईं।
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सोमवार तड़के ही घाटों पर ''हर-हर गंगे, जय मां गंगे'' के गगनभेदी जयकारे गूंजने लगे। श्रद्धालुओं ने मां गंगा का दुग्धाभिषेक किया, छप्पन भोग लगाए और महाआरती उतारकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
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सुबह जैसे ही घाटों के मंदिरों में घंटे-घड़ियाल गूंजे, भक्तों का हुजूम गंगा की धार की ओर दौड़ पड़ा। सुबह 6 बजे तक आलम यह था कि घाटों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। हर कोई पवित्र जल में जल्द से जल्द डुबकी लगा लेना चाहता था, जिससे वहां एक अनूठा और विहंगम नजारा देखने को मिला। दोपहर तक घाटों पर श्रद्धालुओं का भारी दबाव बना रहा।
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रेतीली तलहटी में रातभर गूंजे ढोलक-मंजीरे
गंगा स्नान के लिए दूर-दराज के इलाकों से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला रविवार शाम से ही शुरू हो गया था। तीर्थनगरी सोरों, लहरा, कछला, कादरगंज और इस्माइलपुर-अललीपुर बरबारा गंगाघाटों पर हजारों भक्तों ने रात में ही डेरा डाल दिया था। सूखी रेतीली तलहटी में रातभर कहीं मां गंगा की महिमा का गुणगान हुआ, तो कहीं ढोलक-मंजीरों की थाप पर भजन-कीर्तन के दौर चलते रहे, जिससे पूरा माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
यादों को समेटने के लिए सेल्फी का क्रेज
इस पावन अध्यात्म के बीच आधुनिक रंग भी देखने को मिला। गंगास्नान के दौरान तमाम श्रद्धालु और परिवार के सदस्य अपने मोबाइल से सेल्फी लेना नहीं भूले। गंगा की लहरों के बीच लोग खूबसूरत यादों को कैमरे में कैद करते नजर आए, तो वहीं बहुत से लोगों ने घाटों पर मौजूद पेशेवर फोटोग्राफरों से अपनी तस्वीरें भी खिंचवाईं।