{"_id":"6acd21d307835b6ee5062fb7","slug":"enactment-of-the-divine-play-of-shri-ram-breaking-the-bow-applause-rang-out-kasganj-news-c-175-1-kas1009-155418-2026-10-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kasganj News: श्रीराम के धनुष तोड़ने की लीला का मंचन, गूंजी तालियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kasganj News: श्रीराम के धनुष तोड़ने की लीला का मंचन, गूंजी तालियां
विज्ञापन
फोटो59कासगंज में आयोजित श्रीराम लीला मंचन के दौरान स्वरूपों की आरती उतारते भक्त। संवाद
कासगंज। बारहद्वारी स्थित रामलीला मंच पर सोमवार रात भक्ति, वीरता और हास्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामलीला के छठे दिन वृंदावन के कलाकारों ने धनुष यज्ञ और लक्ष्मण-परशुराम संवाद का ऐसा सजीव मंचन किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों के तीखे संवादों और प्रभावशाली अभिनय से पूरा पंडाल तालियों तथा श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ कमेटी अध्यक्ष गोपाल मराठा, महामंत्री अरविंद वार्ष्णेय और कोषाध्यक्ष अमरीश वशिष्ठ ने श्रीराम-जानकी की आरती उतारकर किया। इसके बाद श्रीरामकृष्ण लीला अनुकरण मंडल, वृंदावन के कलाकारों ने मंचन की शुरुआत की।
लीला में मंचन के दाैरान धनुष टूटने की गड़गड़ाहट सुनकर परशुराम क्रोधित होकर दरबार पहुंचे। इस दौरान भगवान श्रीराम और परशुराम के बीच हुए संवाद में लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण जवाबों ने माहौल को बेहद रोचक बना दिया, जिसे देखकर दर्शक ठहाके लगाने लगे।
विज्ञापन
हालांकि, अंत में श्रीराम के मधुर वचनों और विनम्रता से परशुराम का क्रोध शांत हुआ। श्रीराम के दिव्य स्वरूप को पहचानकर परशुराम ने उन्हें प्रणाम किया और प्रस्थान किया। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला डालकर उनका वरण किया।
विज्ञापन
कार्यक्रम का शुभारंभ कमेटी अध्यक्ष गोपाल मराठा, महामंत्री अरविंद वार्ष्णेय और कोषाध्यक्ष अमरीश वशिष्ठ ने श्रीराम-जानकी की आरती उतारकर किया। इसके बाद श्रीरामकृष्ण लीला अनुकरण मंडल, वृंदावन के कलाकारों ने मंचन की शुरुआत की।
विज्ञापन
लीला में मंचन के दाैरान धनुष टूटने की गड़गड़ाहट सुनकर परशुराम क्रोधित होकर दरबार पहुंचे। इस दौरान भगवान श्रीराम और परशुराम के बीच हुए संवाद में लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण जवाबों ने माहौल को बेहद रोचक बना दिया, जिसे देखकर दर्शक ठहाके लगाने लगे।
विज्ञापन
हालांकि, अंत में श्रीराम के मधुर वचनों और विनम्रता से परशुराम का क्रोध शांत हुआ। श्रीराम के दिव्य स्वरूप को पहचानकर परशुराम ने उन्हें प्रणाम किया और प्रस्थान किया। इसके बाद माता सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला डालकर उनका वरण किया।