{"_id":"6a91c818186481d3e90292b5","slug":"accused-acquitted-in-rape-and-intimidation-case-kasganj-news-c-175-1-kas1003-152895-2026-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kasganj News: दुष्कर्म और धमकी के मामले का आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kasganj News: दुष्कर्म और धमकी के मामले का आरोपी बरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कासगंज। अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय अनुतोष कुमार शर्मा की अदालत ने दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी के आरोपी दर्वेश को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया है। साक्ष्यों के अभाव और बयानों में भारी विरोधाभास के कारण अदालत ने यह फैसला सुनाया।
सुन्नगढ़ी थाना क्षेत्र की एक पीड़िता ने 25 अप्रैल 2018 को 181 महिला हेल्पलाइन पर सूचना देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि साल 2017 में दीपावली से करीब आठ दिन पहले आरोपी ने खेत में तमंचे के बल पर दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। मामला तब खुला जब पीड़िता के गर्भवती होने की बात सामने आई।
-- -- -- -- -- -- -- --
इस आधार पर किया फैसला
प्राथमिकी और धारा 161 के बयानों में पीड़िता ने केवल एक बार खेत में दुष्कर्म का जिक्र किया था जबकि अदालत और बयानों में होली के दिन घर में दुष्कर्म होने की एक नई घटना जोड़ दी गई।
विज्ञापन
मेडिकल जांच व अल्ट्रासाउंड में गर्भ की अवधि (22 सप्ताह 2 दिन) पीड़िता के बयानों से मेल नहीं खा रही थी। इसके अलावा, दिल्ली के थाना सागरपुर में पीड़िता के भाई के खिलाफ दर्ज पुरानी प्राथमिकी के कारण आपसी रंजिश की आशंका नजर आई। अदालत ने रेखांकित किया कि इस मामले में सबसे अहम साक्ष्य गर्भस्थ शिशु की डीएनए जांच हो सकती थी, जिसे विवेचक द्वारा नहीं कराया गया।
अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा जिसके आधार पर कोर्ट ने दर्वेश को बरी कर दिया।
विज्ञापन
सुन्नगढ़ी थाना क्षेत्र की एक पीड़िता ने 25 अप्रैल 2018 को 181 महिला हेल्पलाइन पर सूचना देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि साल 2017 में दीपावली से करीब आठ दिन पहले आरोपी ने खेत में तमंचे के बल पर दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। मामला तब खुला जब पीड़िता के गर्भवती होने की बात सामने आई।
विज्ञापन
इस आधार पर किया फैसला
प्राथमिकी और धारा 161 के बयानों में पीड़िता ने केवल एक बार खेत में दुष्कर्म का जिक्र किया था जबकि अदालत और बयानों में होली के दिन घर में दुष्कर्म होने की एक नई घटना जोड़ दी गई।
विज्ञापन
मेडिकल जांच व अल्ट्रासाउंड में गर्भ की अवधि (22 सप्ताह 2 दिन) पीड़िता के बयानों से मेल नहीं खा रही थी। इसके अलावा, दिल्ली के थाना सागरपुर में पीड़िता के भाई के खिलाफ दर्ज पुरानी प्राथमिकी के कारण आपसी रंजिश की आशंका नजर आई। अदालत ने रेखांकित किया कि इस मामले में सबसे अहम साक्ष्य गर्भस्थ शिशु की डीएनए जांच हो सकती थी, जिसे विवेचक द्वारा नहीं कराया गया।
अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा जिसके आधार पर कोर्ट ने दर्वेश को बरी कर दिया।