Kanpur: युवाओं को हो रही नई किस्म की डायबिटीज टाइप-, मोटापा भी नहीं होता…बढ़ता रहता है शुगर लेवल
Kanpur News: डॉक्टर्स ने कहा कि वैसे डायबिटीज की हर किस्म के रोगियों में बढ़ोतरी हो रही है। देश में 11 प्रतिशत डायबिटीज रोगी है। साथ ही 14 प्रतिशत प्री डायबिटिक हैं। इस तरह 25 फीसदी लोग डायबिटीज के दायरे में हैं।
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18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में एक नई किस्म की डायबिटीज हो रही है। इस डायबिटीज को टाइप-5 नाम दिया गया है। इसके रोगियों में इंसुलिन रेसिस्टेंट बढ़ जाता है। इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ा रहता है। डायबिटीज टाइप-5 के रोगियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। सात से 10 अप्रैल तक बैंकाॅक में हुई इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की कॉन्फ्रेंस में इस नई डायबिटीज को भी मान्यता देने का प्रस्ताव दिया गया जिससे शोध कार्यों और रोकथाम के कार्यों में तेजी आए।
आईएमए सीजीपी रिफ्रेशर कोर्स में यह बात एसजीपीजीआई के सीनियर इंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. शिवेंद्र वर्मा ने बताई। सीनियर इंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. वर्मा ने बताया कि टाइप-5 डायबिटीज के रोगी युवा होते हैं। उनमें मोटापा भी नहीं होता, फिर ब्लड शुगर लेवल बढ़ा रहता है। इसके कारण पता किए जा रहे हैं। इन रोगियों की जांच में एक तथ्य पता चला है कि उनमें इनक्रेटिन हार्मोंस की कमी हो जाती है। यह हार्मोन आंतों से निकलता है। टाइप-5 डायबिटीज की जटिलताओं का भी अध्ययन किया जा रहा है।
25 फीसदी लोग डायबिटीज के दायरे में हैं
उन्होंने बताया कि वैसे डायबिटीज की हर किस्म के रोगियों में बढ़ोतरी हो रही है। देश में 11 प्रतिशत डायबिटीज रोगी है। साथ ही 14 प्रतिशत प्री डायबिटिक हैं। इस तरह 25 फीसदी लोग डायबिटीज के दायरे में हैं। डॉ. वर्मा ने बताया कि नई दवाओं को ऐसे तैयार किया गया है जिससे डायबिटीज के दुष्प्रभाव से दूसरे अंग भी बचे रहें। डायबिटीज से हृदय, गुर्दा, लिवर, स्नायुतंत्र आदि प्रभावित होते हैं। नई दवाओं से इन्हें बचाया जा सकता है।
लोगों में सहन क्षमता हुई है कम
इंस्टीट्यूट ऑफ ह्युमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेस के पूर्व निदेशक डॉ. निमेश जी देसाई ने रिफ्रेशर कोर्स में बताया कि मोबाइल से जीवन में आसानी तो बढ़ी है, लेकिन लोगों में सहन क्षमता कम हुई है। उन्होंने कहा कि हर आसानी पैदा करने वाली चीज का यह एक प्रकार का साइड इफेक्ट है। इसमें टॉक्सिटी होती है। इसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की भी टॉक्सिटी होगी। लोगों में निराशा को लेकर सहन शक्ति कम होने से आत्महत्या जैसी घटनाएं हो जाती हैं।
लिवर ट्रांसप्लांट अब 95 फीसदी तक रहता है सफल
इसे न्यूरोसिस कहते हैं। मोबाइल से अन्य व्यसनों की तरह डोपामीन न्यूरो केमिकल का रिसाव होता है। इसी से लत पड़ती है। रिफ्रेशर कोर्स में सीनियर लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. आशीष मिश्रा ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट अब 95 फीसदी तक सफल रहता है। दानदाता से 60 फीसदी लिवर लेकर रोगी को ट्रांसप्लांट किया जाता है। चार सप्ताह में दानदाता और रोगी का लिवर 100 फीसदी बन जाता है।
विशेषज्ञों ने विषयों पर दिए व्याख्यान
18 से 50 साल के बीच आयु के व्यक्ति का ही लिवर दान में लिया जाता है। अगर रोगी शराब न पिए और परहेज करे, तो दान के लिवर से वह पूरी जिंदगी जी सकता है। रिफ्रेशर कोर्स डॉ. डॉ. सुशील पी. अंबेश ने एक्यूट रेस्पेरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम के बारे में जानकारी दी। डॉ. वर्षा अंबवानी ने ऑटो इम्युन इंसेफ्लाइटिस के संबंध में व्याख्यान दिया। डॉ. विशाल सिंह ने आरके शुक्ला ओरेशन ट्रॉमा एंड रेडियोलॉजी पर व्याख्यान दिया।
डायबिटीज के प्रकार
- डायबिटीज टाइप-1: यह जेनेटिक रोग है। इसमें बच्चे में पैदाइशी डायबिटीज होती है। यह ऑटो इम्युन डिस्ऑर्डर है।
- डायबिटीज टाइप-2: यह रोग बड़ों में मोटापा बढ़ने, संक्रमण, अग्नाशय की बीटा सेल क्षतिग्रस्त होने से होता है।
- डायबिटीज टाइप-3: यह रोग अधिक शराब पीने, अग्नाशय में कैल्शियम का जमाव होने से होता है।
- डायबिटीज टाइप-4: यह डायबिटीज बुजुर्गों में होती है। इसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन से रिस्पांड नहीं करतीं।