योगी सरकार ने भी किसानों की मौतों पर फेरा पानी, बता रही ये रिपोर्ट...
-बुंदेलखंड में दैवी आपदा से मौतों से किया इनकार
-जनसूचना अधिकार अधिनियम में दी जानकारी
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पूर्व सरकारें भी किसानों की मौतों पर धूल झोंकती रही हैं। सपा सरकार में किसानों की मौतों के दौरान महोखर गांव में किसान द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और मौजूदा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह खुद महोखर गांव गए थे।
उस दौरान भाजपा नेताओं ने बुंदेलखंड के किसानों की बढ़ चढ़कर वकालत की थी लेकिन अब सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार भी पुरानी सरकाराें के ढर्रे पर चल रही है। बुंदेलखंड तिरहार विकास मंच अध्यक्ष प्रमोद आजाद ने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत प्रदेश के मुख्य सचिव से बुंदेलखंड में कर्ज, भूख और दैवी आपदाओं से होने वाली मौतों की जानकारी मांगी थी।
मुख्य सचिव के निर्देश पर बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर के राजस्व अधिकारियों ने श्री आजाद को अपने जनपद की सूचनाएं उपलब्ध कराई हैं। इसमें दोटूक शब्दों में कहा गया है कि सूखा, भूख, ओला, पाला, अतिवृष्टि या कर्ज से कोई मौत नहीं हुई है। न ही इन कारणों से किसी ने आत्महत्या की है।
बांदा के अपर जिलाधिकारी (वित्त राजस्व) द्वारा दी गई सूचना में कहा कि वर्ष 2013-14 से अब तक जनपद में सूखा, भूख, ओला, पाला, अतिवृष्टि या कर्ज से कोई मौत नहीं हुई है। चित्रकूट के अपर जिलाधिकारी ने भी ठीक यही जवाब दिया है। महोबा के जिलाधिकारी कार्यालय से दी गई सूचना में कहा गया है कि उनके यहां भी दैवी आपदाओं या भूख, कर्ज आदि से कोई जनहानि नहीं हुई है।
अलबत्ता बछेछर खुर्द (कुलपहाड़) में 30 जुलाई 2016 को नरेेंद्र पुत्र रामकिशुन और मिहीलाल पुत्र खिल्लू की बाढ़ के पानी में बह जाने से मौत हो गई थी। इसी तरह भटीपुरा (महोबा) में बारिश में दीवार गिरने से रामकिशोर की मौत हो गई थी। हमीरपुर के राजस्व अधिकारियों ने भी किसी मौत की पुष्टि नहीं की है। जालौन, ललितपुर और झांसी के राजस्व प्रशासनों ने भी दैवी आपदा से मौत या कर्ज से आहत होकर किसान द्वारा आत्महत्या की बात को खारिज कर दिया है।