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Kanpur News: जैन मंदिरों में हुआ उत्तम त्याग धर्म का पूजन
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कानपुर। दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन बुधवार को दिगंबर जैन मंदिरों में उत्तम त्याग धर्म का पूजन किया गया। श्रद्धालुओं ने अभिषेक और शांतिधारा में भाग लिया। भगवान की विधि विधान से पूजा हुई। प्रवचनकारों ने त्याग के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। मोह, लोभ और आसक्ति से दूर होकर धार्मिक जीवन जीने का संकल्प लिया गया।
कानपुर जैन समाज के महामंत्री त्रिभुवन चंद्र जैन ने बताया कि काकादेव स्थित श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पूजा हुई। यहां स्वतंत्र जैन, अरुण जैन, अजय पटौदी और अनिल जैन ने अभिषेक और शांतिधारा की। संध्या काल में सरिता, गौरव, सौरभ, निधि जैन, कमलेश ज्योति विकास जैन ने दीप अर्चना की। प्रवचनकार कोमल चंद्र जैन ने कहा कि उत्तम त्याग का अर्थ केवल धन, संपत्ति या सांसारिक वस्तुओं को दूसरों को सौंप देना मात्र नहीं है, बल्कि अपने भीतर पनपने वाले मोह, लोभ, अहंकार और कषायों का सर्वथा विसर्जन कर देना है। वहीं कोमल चंद्र जैन ने आध्यात्मिक दृष्टि से त्याग को समझाया। उन्होंने बताया कि अंतरंग राग-द्वेष और स्वामित्व की बुद्धि को छोड़ देना ही उत्तम त्याग की वास्तविक पराकाष्ठा है। यह सच्ची शांति और निर्मलता की ओर ले जाता है।
भक्तांबर आरती के साथ हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम
श्री पुष्पदंत दिगंबर जैन मंदिर स्वरूप नगर में भी कार्यक्रम हुए। यहां विनीत, रचित जैन और प्रताप मनन जैन ने शांतिधारा की। नित पूजा और रात्रि में भक्तांबर आरती संपन्न हुई। बालिकाओं ने नृत्य की प्रस्तुति दी और साक्षी जैन ने पुरस्कार वितरण कराया। मोहित जैन, रोहन जैन, विपुल जैन, प्रवीन जैन, अखिलेश जैन, निर्मला और लता जैन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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कानपुर जैन समाज के महामंत्री त्रिभुवन चंद्र जैन ने बताया कि काकादेव स्थित श्री चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पूजा हुई। यहां स्वतंत्र जैन, अरुण जैन, अजय पटौदी और अनिल जैन ने अभिषेक और शांतिधारा की। संध्या काल में सरिता, गौरव, सौरभ, निधि जैन, कमलेश ज्योति विकास जैन ने दीप अर्चना की। प्रवचनकार कोमल चंद्र जैन ने कहा कि उत्तम त्याग का अर्थ केवल धन, संपत्ति या सांसारिक वस्तुओं को दूसरों को सौंप देना मात्र नहीं है, बल्कि अपने भीतर पनपने वाले मोह, लोभ, अहंकार और कषायों का सर्वथा विसर्जन कर देना है। वहीं कोमल चंद्र जैन ने आध्यात्मिक दृष्टि से त्याग को समझाया। उन्होंने बताया कि अंतरंग राग-द्वेष और स्वामित्व की बुद्धि को छोड़ देना ही उत्तम त्याग की वास्तविक पराकाष्ठा है। यह सच्ची शांति और निर्मलता की ओर ले जाता है।
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भक्तांबर आरती के साथ हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम
श्री पुष्पदंत दिगंबर जैन मंदिर स्वरूप नगर में भी कार्यक्रम हुए। यहां विनीत, रचित जैन और प्रताप मनन जैन ने शांतिधारा की। नित पूजा और रात्रि में भक्तांबर आरती संपन्न हुई। बालिकाओं ने नृत्य की प्रस्तुति दी और साक्षी जैन ने पुरस्कार वितरण कराया। मोहित जैन, रोहन जैन, विपुल जैन, प्रवीन जैन, अखिलेश जैन, निर्मला और लता जैन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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