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काम बहुत धीरे, शौचालय अधूरे
अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 01 Jun 2015 02:07 AM IST
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गंगा नदी में मैला जाने से रोकने के लिए इसके सीमावर्ती 37 गांवों में पिछले वर्ष 6600 शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था लेकिन एक वर्ष बाद इन गांवों में सिर्फ 900 शौचालयों का निर्माण हो पाया है। इनमें से भी कई ऐसे हैं, जिसमें किसी की छत गायब है तो किसी का दरवाजा। गांव वालों की तरफ से शौचालय बनवाने के आवेदन स्वीकृत होने के बावजूद उन्हें बार बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि शासन से शौचालयों के लिए धन देर से जारी हुआ। इसलिए लक्ष्य के अनुरूप निर्माण नहीं हो पाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान योजना के साथ ही प्रदेश सरकार ने भी उन गांवों में शौचालय निर्माण की योजना बनाई थी, जो नदियों के किनारे बसे हैं। इस योजना के तहत विशेष रूप से गंगा नदी को ध्यान में रखा गया है। ऐसे गांवाें की देखरेख के लिए कुछ संस्थाओं को गांव गोद भी दिए गए हैं। इन्हीं में से एक चौबेपुर ब्लाक के कुछ गांवों की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आई।
सीन
-सुनौड़ा गांव की कुल जनसंख्या तीन हजार से अधिक है। यहां पर पिछले वित्तीय वर्ष में 145 शौचालयों का निर्माण कराए जाने का लक्ष्य रखा गया था। एक साल बाद सिर्फ 90 शौचालय ही बनाए गए। इसमें भी कई शौचालयों की दशा काफी खराब है।
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सीन दो...
फत्तेपुर गांव में करीब दो सौ परिवार हैं। पहली लिस्ट में यहां पर कुल 70 शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें से मात्र 45 शौचालय ही बन सके। इसमें भी कई ऐसे हैं, जिनकी सिर्फ दीवार खड़ी है। उसमें लकड़ी और अन्य सामान रखा गया है। यहां कम से कम 150 से अधिक शौचालयों की आवश्यकता है।
सीन तीन....
राजारामपुर गांव की हालत काफी खराब है। यहां के सिर्फ एक मजरे में ही कुछ शौचालय बनाए गए हैं। बाकी मजरों के लोगों को अभी भी खुले में ही जाना पड़ता है। पूरे गांव में शौैचालय की कुल डिमांड 100 से ज्यादा है। पहली खेप में 25 शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बनाए गए सिर्फ 18।
आईएमए ने लिया है गोद
चौबेपुर ब्लाक के कई गांवों को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने गोद लिया है। एसोसिएशन यहां पर हर महीने चिकित्सा शिविर आयोजित करेगा। ग्रामीणों को स्वस्थ रहने के लिए एसोसिएशन के पदाधिकारी साफ सफाई और अन्य सलाह भी देंगे। समस्या यह है कि जब तक गांवोें के सभी घरों में शौचालय नहीं बन जाते हैं और लोग उनका प्रयोग नहीं करने लगते हैं, तब तक सभी को स्वस्थ रखना कितना संभव होगा।
एक शौचालय के लिए मिलता है 12 हजार
एक वर्ष पूर्व एक शौचालय बनाने के लिए सरकार की तरफ से साढ़े नौ हजार की राशि दी जाती थी। जिसे लेकर कई बार सवाल भी खड़े किए गए थे। कहा गया था कि इतनी राशि से शौचालय कैसे बन पाएगा। अब इसकी राशि बढ़ाकर 12 हजार प्रति शौचालय कर दी गई है। शौचालय का निर्माण लाभार्थी को कराना पड़ता है लेकिन उसकी मानीटरिंग जिला पंचायतराज विभाग करता है।
कोट...
गंगा नदी के सीमावर्ती गांवों के हर घर में शौचालय होना जरूरी है। इसी के मद्देनजर पिछले वर्ष यहां के 37 गांवों में 6600 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था जो धन के अभाव में पूरा नहीं हो पाया। शौचालयों का निर्माण जारी है, अभी समय लग सकता है।
-हरिश्चंद्र सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान योजना के साथ ही प्रदेश सरकार ने भी उन गांवों में शौचालय निर्माण की योजना बनाई थी, जो नदियों के किनारे बसे हैं। इस योजना के तहत विशेष रूप से गंगा नदी को ध्यान में रखा गया है। ऐसे गांवाें की देखरेख के लिए कुछ संस्थाओं को गांव गोद भी दिए गए हैं। इन्हीं में से एक चौबेपुर ब्लाक के कुछ गांवों की पड़ताल की गई तो हकीकत सामने आई।
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सीन
-सुनौड़ा गांव की कुल जनसंख्या तीन हजार से अधिक है। यहां पर पिछले वित्तीय वर्ष में 145 शौचालयों का निर्माण कराए जाने का लक्ष्य रखा गया था। एक साल बाद सिर्फ 90 शौचालय ही बनाए गए। इसमें भी कई शौचालयों की दशा काफी खराब है।
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सीन दो...
फत्तेपुर गांव में करीब दो सौ परिवार हैं। पहली लिस्ट में यहां पर कुल 70 शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें से मात्र 45 शौचालय ही बन सके। इसमें भी कई ऐसे हैं, जिनकी सिर्फ दीवार खड़ी है। उसमें लकड़ी और अन्य सामान रखा गया है। यहां कम से कम 150 से अधिक शौचालयों की आवश्यकता है।
सीन तीन....
राजारामपुर गांव की हालत काफी खराब है। यहां के सिर्फ एक मजरे में ही कुछ शौचालय बनाए गए हैं। बाकी मजरों के लोगों को अभी भी खुले में ही जाना पड़ता है। पूरे गांव में शौैचालय की कुल डिमांड 100 से ज्यादा है। पहली खेप में 25 शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बनाए गए सिर्फ 18।
आईएमए ने लिया है गोद
चौबेपुर ब्लाक के कई गांवों को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने गोद लिया है। एसोसिएशन यहां पर हर महीने चिकित्सा शिविर आयोजित करेगा। ग्रामीणों को स्वस्थ रहने के लिए एसोसिएशन के पदाधिकारी साफ सफाई और अन्य सलाह भी देंगे। समस्या यह है कि जब तक गांवोें के सभी घरों में शौचालय नहीं बन जाते हैं और लोग उनका प्रयोग नहीं करने लगते हैं, तब तक सभी को स्वस्थ रखना कितना संभव होगा।
एक शौचालय के लिए मिलता है 12 हजार
एक वर्ष पूर्व एक शौचालय बनाने के लिए सरकार की तरफ से साढ़े नौ हजार की राशि दी जाती थी। जिसे लेकर कई बार सवाल भी खड़े किए गए थे। कहा गया था कि इतनी राशि से शौचालय कैसे बन पाएगा। अब इसकी राशि बढ़ाकर 12 हजार प्रति शौचालय कर दी गई है। शौचालय का निर्माण लाभार्थी को कराना पड़ता है लेकिन उसकी मानीटरिंग जिला पंचायतराज विभाग करता है।
कोट...
गंगा नदी के सीमावर्ती गांवों के हर घर में शौचालय होना जरूरी है। इसी के मद्देनजर पिछले वर्ष यहां के 37 गांवों में 6600 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था जो धन के अभाव में पूरा नहीं हो पाया। शौचालयों का निर्माण जारी है, अभी समय लग सकता है।
-हरिश्चंद्र सिंह, जिला पंचायती राज अधिकारी