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Kanpur News: हल्के दर्द के साथ महिलाओं को चुपके से आ रहा हार्ट अटैक

Sat, 07 Feb 2026 01:50 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 07 Feb 2026 01:50 AM IST
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Women are secretly having heart attacks with mild pain
कानपुर। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोगों की स्थिति अधिक गंभीर पाई जा रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि महिलाओं में हार्ट अटैक जैसे लक्षण अक्सर चुपके से आते हैं जिनमें दर्द कम या बिल्कुल नहीं होता। महिलाएं इन संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं और जब तक स्थिति गंभीर हो जाती है, तब तक उपचार मुश्किल हो जाता है। यह निष्कर्ष कार्डियोलॉजी में इस ठंड की सीजन में हुए अध्ययन में सामने आया है। अध्ययन में 426 महिलाओं और 426 पुरुषों को शामिल किया गया है।
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अध्ययन करने वाले कार्डियोलॉजिस्ट डाॅ. अवधेश शर्मा ने बताया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की हृदय की नसें (कोरोनरी आर्टरी) छोटी होती हैं। जब इन नसों में थक्का जमता है तो महिलाओं को दर्द का अनुभव कम होता है या बिल्कुल नहीं होता। वे अक्सर सीने में होने वाले हल्के दर्द को सहन कर लेती हैं जिससे अस्पताल पहुंचने में देरी होती है। इसके विपरीत पुरुषों की नसें बड़ी होने के कारण थक्का जमने पर तेज दर्द होता है जो उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रेरित करता है। अध्ययन में पाया गया कि हार्ट अटैक से पीड़ित महिलाओं की नसें कई जगह से अवरुद्ध थीं या पूरी तरह से ब्लॉक थीं जो बीमारी की अधिक गंभीरता को दर्शाता है।
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महिलाओं द्वारा लक्षणों को नजरअंदाज करना हृदय रोगों की गंभीरता का एक प्रमुख कारण है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 35 वर्ष या उससे कम उम्र की किसी भी महिला को हार्ट अटैक नहीं आय जबकि पुरुष 30 वर्ष की आयु तक के थे। इसका एक कारण महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन है जो उन्हें मीनोपॉज तक हृदय रोगों से बचाता है। मीनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन का स्तर कम होने और प्रोजेस्ट्रॉन बढ़ने से हार्मोनल असंतुलन होता है जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।
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महिलाओं के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वे सीने में हल्का दर्द महसूस होने पर भी उसे नजरअंदाज न करें। यदि सीने में हल्के दर्द के साथ थकान, सांस फूलना, चक्कर आना या मिचली जैसे लक्षण हों, तो इसे हृदय रोग का संकेत समझकर तुरंत जांच करानी चाहिए। मासिक धर्म बंद होने के बाद महिलाओं को नियमित रूप से ईसीजी, टीएमटी और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचें करानी चाहिए और तनाव से बचना चाहिए।
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