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कानपुर: राष्ट्रपति के आगमन पर जाम में फंसी महिला की मौत का मामला, पुलिस कमिश्नर के खिलाफ सीएमएम कोर्ट में परिवाद दर्ज
Wed, 30 Jun 2021 12:20 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 30 Jun 2021 12:20 PM IST
सार
महिला उद्यमी के पति शरद मिश्रा ने पुलिसकर्मियों से मिन्नतें कीं कि अगर समय से अस्पताल पहुंच जाएंगे तो वंदना की जान बच जाएगी, लेकिन किसी को दया नहीं आई। पुलिस की उदासीनता और लापरवाही के चलते अस्पताल पहुंचते-पहुंचते वंदना की मौत हो गई।
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जाम में फंसकर महिला उद्यमी की मौत का मामला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नगर आगमन पर रोके गए ट्रैफिक के चलते लगे जाम में फंसकर गंभीर रूप से बीमार आईआईए महिला विंग की अध्यक्ष वंदना मिश्रा की मौत के मामले में विधि छात्र जितेंद्र शुक्ला ने सीएमएम कोर्ट में परिवाद दर्ज कराया है।
इसमें पुलिस आयुक्त, डीसीपी ट्रैफिक, गोविंदनगर एसीपी, एसओ, ड्यूटी पर तैनात टीएसआई और अन्य पुलिसकर्मियों को तलब कर दंडित करने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई 23 जुलाई को होगी। विधि छात्र के अधिवक्ता प्रत्यूष मणि मिश्रा की ओर से दाखिल परिवाद में कहा गया है कि किदवईनगर के ब्लॉक निवासी महिला उद्यमी वंदना को डेढ़ माह पहले कोरोना हुआ था।
25 जून को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवारीजन उन्हें रीजेंसी अस्पताल ले जा रहे थे, जब वह गोविंदनगर पहुंचे तो राष्ट्रपति का काफिला गुजरने की बात कहते हुए पूरा ट्रैफिक नए पुल पर चढ़ने से रोक दिया गया।
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महिला उद्यमी के पति शरद मिश्रा ने पुलिसकर्मियों से मिन्नतें कीं कि अगर समय से अस्पताल पहुंच जाएंगे तो वंदना की जान बच जाएगी, लेकिन किसी को दया नहीं आई। पुलिस की उदासीनता और लापरवाही के चलते अस्पताल पहुंचते-पहुंचते वंदना की मौत हो गई।
अगले दिन पुलिस आयुक्त ने इसे सिस्टम की नाकामी माना और घटना से सबक लेने की बात कहते हुए माफी भी मांगी। जांच के बाद एसआई सुशील कुमार और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। जितेंद्र ने तर्क रखा कि किसी की लापरवाही से व्यक्ति की मौत पर माफी मांग लेने से अपराध कम नहीं हो जाता। यह गंभीर अपराध है। इसके लिए आरोपियों को तलब कर दंडित किया जाना चाहिए।
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इसमें पुलिस आयुक्त, डीसीपी ट्रैफिक, गोविंदनगर एसीपी, एसओ, ड्यूटी पर तैनात टीएसआई और अन्य पुलिसकर्मियों को तलब कर दंडित करने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई 23 जुलाई को होगी। विधि छात्र के अधिवक्ता प्रत्यूष मणि मिश्रा की ओर से दाखिल परिवाद में कहा गया है कि किदवईनगर के ब्लॉक निवासी महिला उद्यमी वंदना को डेढ़ माह पहले कोरोना हुआ था।
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25 जून को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवारीजन उन्हें रीजेंसी अस्पताल ले जा रहे थे, जब वह गोविंदनगर पहुंचे तो राष्ट्रपति का काफिला गुजरने की बात कहते हुए पूरा ट्रैफिक नए पुल पर चढ़ने से रोक दिया गया।
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महिला उद्यमी के पति शरद मिश्रा ने पुलिसकर्मियों से मिन्नतें कीं कि अगर समय से अस्पताल पहुंच जाएंगे तो वंदना की जान बच जाएगी, लेकिन किसी को दया नहीं आई। पुलिस की उदासीनता और लापरवाही के चलते अस्पताल पहुंचते-पहुंचते वंदना की मौत हो गई।
अगले दिन पुलिस आयुक्त ने इसे सिस्टम की नाकामी माना और घटना से सबक लेने की बात कहते हुए माफी भी मांगी। जांच के बाद एसआई सुशील कुमार और तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। जितेंद्र ने तर्क रखा कि किसी की लापरवाही से व्यक्ति की मौत पर माफी मांग लेने से अपराध कम नहीं हो जाता। यह गंभीर अपराध है। इसके लिए आरोपियों को तलब कर दंडित किया जाना चाहिए।