एक मामला ऐसा भी: 36 साल पहले मरी पत्नी, अब वृद्ध पति काटेगा सात साल जेल, मृतका की चिटि्ठयां बनीं सजा का आधार
यूपी के कानपुर में आजीबोगरीब मामला सामने आया है। 36 साल पहले पत्नी की मौत हो चुकी है। अब वृद्ध पति को कोर्ट ने सात साल कैद की सजा सुनाई है।
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कानपुर में पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने के 36 साल पुराने मामले में अब जाकर कोर्ट का फैसला आया है। अपर जिला जज अष्टम राम अवतार प्रसाद ने दोषी 75 वर्षीय पति को सात साल और बैंक कर्मी देवर को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। आरोपी सास की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है, जबकि ननद और सौतेली बीवी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
हमीरपुर निवासी उर्मिला का विवाह हरबंश मोहाल के कछियाना निवासी विष्णुकांत पांडे से वर्ष 1967 में हुआ था। शादी के कुछ दिन बाद से ही ससुरालीजन उर्मिला को प्रताड़ित करने लगे। शादी के चार-पांच साल बाद ससुरालवालों ने मार-पीटकर उर्मिला को घर से निकाल दिया था। उर्मिला ने वर्ष 1974 में हमीरपुर में गुजारा भत्ता का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी बीच विष्णुकांत ने आशा पांडेय नाम की महिला से वर्ष 1977 में दूसरी शादी कर ली। वर्ष 1985 में समझौता करके विष्णुकांत पत्नी उर्मिला को अपने साथ कछियाना ले गया।
प्रताड़ना से परेशान उर्मिला ने 28 अक्टूबर 1987 को फांसी लगाकर जान दे दी थी। टेलीग्राम से मिली सूचना पर पहुंचे उर्मिला के पिता धनद कुमार त्रिपाठी ने हरबंशमोहाल थाने में खुदकुशी के लिए उकसाने के मामले में पति विष्णुकांत, सास जनकदुलारी, ननद रजनी, देवर श्रीकांत व सौतेली पत्नी आशा पांडेय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एडीजीसी अरविंद डिमरी ने बताया कि पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। वर्ष 1992 में सेशन ट्रायल शुरू हुआ। मुकदमे में आरोपियों को जमानत मिलने के साथ ही हाईकोर्ट से स्टे भी मिल गया था। 26 साल बाद वर्ष 2018 में दोबारा मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन की ओर से चार गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने पति विष्णुकांत को दोषी मानकर सात साल और देवर श्रीकांत को दोषी मानकर पांच साल कैद की सजा सुनाई। ननद रजनी व सौतेली पत्नी आशा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। सास जनकदुलारी की मौत हो चुकी है।
मृतका की चिटि्ठयां बनीं सजा का आधार
उर्मिला अपने घरवालों को चिट्ठी में ससुरालीजनों की प्रताड़ना की बात लिखती थी। वह किसी राहगीर को चिट्ठी देती थी जो डाकघर में पोस्ट कर देता था। मरने से पहले 12 अक्टूबर 1987 की आखिरी चिट्ठी में उसने लिखा था कि दो दिन तक भूखी रहती हूं, कुछ कहती हूं तो कहते हैं पुलिसवालों से मांगो। श्रीकांत कह गए थे भाई मार डालो, जो कुछ होगा मैं देख लूंगा। श्रीकांत बैंक में हैं, इन्हें अपनी सर्विस व पैसे का घमंड है। मुझे मारने की कोशिश की जा रही है। कहते हैं तड़पा-तड़पाकर मारूंगा, ऐसे प्राण नहीं लूंगा। किसी भी दिन जान से मार सकते हैं। दूसरी औरत है, लड़का है, मेरी क्या परवाह।
संतान न होने के कारण की थी दूसरी शादी
बचाव पक्ष का तर्क था कि शादी के 20 साल में भी संतान न होने से उर्मिला डिप्रेशन में थी। संतान के लिए उसकी मर्जी से ही दूसरी शादी हुई थी। घटना के दिन श्रीकांत यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में मथुरा की कुरसंडा शाखा में ड्यूटी पर था। ब्रांच मैनेजर ने पत्र देकर इसकी तस्दीक भी की थी, जबकि ननद रजनी की शादी हो चुकी थी और वह पति के साथ ससुराल में थी। चिट्ठी में श्रीकांत का नाम होने पर कोर्ट ने उसे भी मौत के लिए दोषी माना।