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सावधान! हैंडपंपों पर तैयार हो रहा सफेद-गाढ़ा ‘जहर’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 03 May 2017 10:59 AM IST
सार
- रोज 30 हजार लीटर दूध की खपत, उपलब्ध सिर्फ 20 हजार
- मिलावटी, नुकसानदेह दूध से शहरवासियों की सेहत है खतरे में
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हैंडपंप पर तैयार हो रहा है सफेद जहर
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विस्तार
सावधान हो जाइए... इन दिनों यूपी में हैंडपंपों पर बड़ी मात्रा में सफेद-गाढ़ा ‘जहर’ तैयार किया जा रहा है। यही जहर पूरे यूपी में घर-घर बांटा जाता है। लोग बड़े चाव से इसका सेवन करते हैं। सबसे खतरनाक बात तो ये है कि यह जहर लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। इसके बिना एक दिन भी लोग रह नहीं पाते।
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दूध की कमी फिर भी छलक रहे दूध के डिब्बे
दूध की डेरी
आप समझ तो गए ही होंगे कि हम दूध की बात कर रहे हैं। गर्मी के मौसम में मवेशियों की दूध देने की क्षमता में कमी आ जाती है। उधर, लस्सी, आइसक्रीम आदि की खपत के चलते मांग बढ़ जाती है। इसके बावजूद दूधियों के डिब्बों में भरपूर दूध छलकता रहता है। जानकारों के अनुसार दूध की इस कमी को मिलावट से पूरा किया जाता है। मिलावट भी ऐसी जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। हानिकारक तत्व मिलाकर इसे गाढ़ा किया जाता है। कई बार यह जानलेवा तक साबित हो जाती है।
शहरवासी प्रतिदिन करीब 30 हजार लीटर दूध पी जाते हैं। जबकि पूरे जनपद में उत्पादन लगभग 20 हजार लीटर हो रहा है। 20 प्रतिशत लोग ब्रांडेड दूध का सेवन करते हैं। दूध की मांग ज्यादा और उत्पादन कम, फिर भी दूधियों के पास दूध की कोई कमी नहीं है। यह तब है जब गर्मी में पशुओं में दूध उत्पादन घटकर तकरीबन 70 फीसदी रह जाता है।
शहर के बाहर लगे हैंडपंपों में सुबह आठ से एक बजे तक दूधियों का जमघट देखा जा सकता है। लोगों की नजर बचाकर हैंडपंप के नीचे डिब्बा लगाया और देखते ही देखते डिब्बे दूध से लबरेज हो जाते हैं। इस दूध को गाढ़ा करने के भी दूधियों के पास तमाम हथकंडे हैं। यूरिया खाद समेत तमाम केमिकल घोलकर दूध को ऐसा बना देेते हैं कि आम लोग इसे शुद्ध व गाढ़ा दूध मान बैठते हैं। हालांकि यह दूध सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की नजर इन दूधियों तक शायद ही कभी जाती हो। कभी एकाध-दूधिए पकडे़ भी गए तो ज्यादातर मामलों में समझौता हो जाता है। या फिर सैंपल जांच के लिए भेजकर विभाग अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है।
शहरवासी प्रतिदिन करीब 30 हजार लीटर दूध पी जाते हैं। जबकि पूरे जनपद में उत्पादन लगभग 20 हजार लीटर हो रहा है। 20 प्रतिशत लोग ब्रांडेड दूध का सेवन करते हैं। दूध की मांग ज्यादा और उत्पादन कम, फिर भी दूधियों के पास दूध की कोई कमी नहीं है। यह तब है जब गर्मी में पशुओं में दूध उत्पादन घटकर तकरीबन 70 फीसदी रह जाता है।
शहर के बाहर लगे हैंडपंपों में सुबह आठ से एक बजे तक दूधियों का जमघट देखा जा सकता है। लोगों की नजर बचाकर हैंडपंप के नीचे डिब्बा लगाया और देखते ही देखते डिब्बे दूध से लबरेज हो जाते हैं। इस दूध को गाढ़ा करने के भी दूधियों के पास तमाम हथकंडे हैं। यूरिया खाद समेत तमाम केमिकल घोलकर दूध को ऐसा बना देेते हैं कि आम लोग इसे शुद्ध व गाढ़ा दूध मान बैठते हैं। हालांकि यह दूध सेहत के लिए बेहद नुकसानदेह है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की नजर इन दूधियों तक शायद ही कभी जाती हो। कभी एकाध-दूधिए पकडे़ भी गए तो ज्यादातर मामलों में समझौता हो जाता है। या फिर सैंपल जांच के लिए भेजकर विभाग अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है।
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दूधियों के खिलाफ चल रहा अभियान
दूध का नमूना भरते जांचकर्मी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अभिहित अधिकारी चंद्रशेखर मिश्र ने बताया कि दूधियों के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है। हर माह पांच नमूने भरे जाते हैं। अभी तक किसी दूधिये के दूध में ‘इंजीरियस टू हेल्थ’ जैसी मिलावट नहीं पाई गई। ज्यादातर फैट कम होना मिला। लेकिन यह गंभीर समस्या नहीं है। किसी दूधिये के दूध में खतरनाक केमिकल मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर बता रहे इस दूध से हो रही गंभीर बीमारियां
डेमो
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ.मोहम्मद रफीक ने बताया कि मिलावटी दूध के सेवन से पीलिया, बुखार, बदहजमी, उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इलाज में लापरवाही से यही बीमारियां जानलेवा हो जाती हैं। इसमें मिलने वाले यूरिया खाद, रंग व पाउडर फेफड़ों के लिए भी घातक होते हैं।