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जहां जिंदगियां बचती हैं, वहां जननी की ही जान जोखिम में
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चित्रकूट। जिला महिला अस्पताल के हालात में मंगलवार को भी कोई बदलाव नहीं दिखा। प्रसव पीड़ा से कराहती और प्रसूताओं की जिंदगी बचाने के लिए किए गए सभी इंतजाम फेल नजर आए। अस्थायी तौर पर तैनात की गईं दो डॉक्टर सिर्फ सलाह और दवाएं ही दे रही हैं। प्रसव कराने में इनकी कोई भूमिका नहीं है। सामान्य प्रसव वाले केस में सारा दारोमदार अभी भी नर्स और आया पर ही है। स्थिति गंभीर होने पर जननियों की जान अभी भी जोखिम में है।
जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से प्रसव की संख्या कम हो गई है। पहले औसतन छह प्रसव रोज होते थे। अब दो या तीन ही हो रहे हैं। प्रसव पीड़ा से कराहती गंभीर हालत में आईं महिलाएं रेफर की जा रही हैं। सामान्य प्रसव वाले एक दो केस ही लिए जा रहे हैं। वह भी यह बताकर की नर्स ही प्रसव कराएगी। मंगलवार को छह मामले आए, जिनमें से तीन को रेफर किया गया। मगर बारा माफी गांव के एक शख्स ने गरीबी का हवाला देकर पत्नी को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने से इंकार कर दिया। उसने बताया कि वह निजी अस्पताल में इलाज कराने की स्थिति में नहीं है। बांदा और इलाहाबाद ले जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। इसलिए जैसे भी हालात हैं वो यहीं पर इलाज कराएगा। सीएमएस डा. राजेश खरे ने बताया कि किसी भी विशेषज्ञ के न होने पर अस्पताल की दो महिला चिकित्सक से काम लिया जा रहा है।
ऐसे सामने आए जिला अस्पताल के हालात
शनिवार को शहर के बल्दाऊ गंज निवासी रोशनी मिश्रा की जिला अस्पताल में प्रसव उपरांत मौत हो गई थी। महिला रोग विशेषज्ञ डा. रफीक अंसारी बुलाने पर भी नहीं आए थे। उन पर गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट भी दर्ज हुई है। दूसरी महिला डा. ऊषा 22 अप्रैल तक अवकाश पर हैं।
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अवकाश पर जाने की सूचना डा. रफीक को नहीं दी गई
चित्रकूट। जिला अस्पताल में 14 व 15 अप्रैल को दोपहर में बल्दाऊगंज निवासी प्रसूता रोशनी मिश्रा को लेकर परिजन पहुंचे थे तो डा. रफीक ने ही जांच पड़ताल की थी। परिजनों के अनुसार डाक्टर ने कहा कि सब ठीक है। चाहे तो भर्ती हो जाओ या फिर कर्वी में ही घर होने की वजह से जब दर्द हो तो आ जाना। इसके बाद परिजन उसे लेकर घर आ गए। इसी रात लगभग साढे़ नौ बजे दर्द होने पर प्रसूता को लेकर परिजन पहुंचे तो अस्पताल में कोई डाक्टर नहीं था। डा. रफीक ने बताया कि दिन की डयूटी के बाद वह घर गए थे और दवा खाकर सोये थे। उन्हें किसी ने नहीं बताया कि रात में ड्यूटी करनी है। ये भी नहीं बताया गया कि डा. ऊषा अवकाश पर हैं तो इर्मजेंसी करनी पड़ सकती है। वैसे पहले से ही वह रात डयूटी न करने के लिए अधिकारियों को पत्र दे चुके हैं।
रात में बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
चित्रकूट। जिला अस्पताल में रात में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। अस्पताल में बनी पुलिस चौकी के अलावा इमरजेंसी और जच्चा बच्चा वार्ड की ओर होमगार्ड व पीआरडी की संख्या तीन कर दी गई है। अभी तक दो जवान ही डयूटी पर थे। सीएमएस डा. खरे ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया है।
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जिला अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से प्रसव की संख्या कम हो गई है। पहले औसतन छह प्रसव रोज होते थे। अब दो या तीन ही हो रहे हैं। प्रसव पीड़ा से कराहती गंभीर हालत में आईं महिलाएं रेफर की जा रही हैं। सामान्य प्रसव वाले एक दो केस ही लिए जा रहे हैं। वह भी यह बताकर की नर्स ही प्रसव कराएगी। मंगलवार को छह मामले आए, जिनमें से तीन को रेफर किया गया। मगर बारा माफी गांव के एक शख्स ने गरीबी का हवाला देकर पत्नी को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने से इंकार कर दिया। उसने बताया कि वह निजी अस्पताल में इलाज कराने की स्थिति में नहीं है। बांदा और इलाहाबाद ले जाने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। इसलिए जैसे भी हालात हैं वो यहीं पर इलाज कराएगा। सीएमएस डा. राजेश खरे ने बताया कि किसी भी विशेषज्ञ के न होने पर अस्पताल की दो महिला चिकित्सक से काम लिया जा रहा है।
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ऐसे सामने आए जिला अस्पताल के हालात
शनिवार को शहर के बल्दाऊ गंज निवासी रोशनी मिश्रा की जिला अस्पताल में प्रसव उपरांत मौत हो गई थी। महिला रोग विशेषज्ञ डा. रफीक अंसारी बुलाने पर भी नहीं आए थे। उन पर गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट भी दर्ज हुई है। दूसरी महिला डा. ऊषा 22 अप्रैल तक अवकाश पर हैं।
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अवकाश पर जाने की सूचना डा. रफीक को नहीं दी गई
चित्रकूट। जिला अस्पताल में 14 व 15 अप्रैल को दोपहर में बल्दाऊगंज निवासी प्रसूता रोशनी मिश्रा को लेकर परिजन पहुंचे थे तो डा. रफीक ने ही जांच पड़ताल की थी। परिजनों के अनुसार डाक्टर ने कहा कि सब ठीक है। चाहे तो भर्ती हो जाओ या फिर कर्वी में ही घर होने की वजह से जब दर्द हो तो आ जाना। इसके बाद परिजन उसे लेकर घर आ गए। इसी रात लगभग साढे़ नौ बजे दर्द होने पर प्रसूता को लेकर परिजन पहुंचे तो अस्पताल में कोई डाक्टर नहीं था। डा. रफीक ने बताया कि दिन की डयूटी के बाद वह घर गए थे और दवा खाकर सोये थे। उन्हें किसी ने नहीं बताया कि रात में ड्यूटी करनी है। ये भी नहीं बताया गया कि डा. ऊषा अवकाश पर हैं तो इर्मजेंसी करनी पड़ सकती है। वैसे पहले से ही वह रात डयूटी न करने के लिए अधिकारियों को पत्र दे चुके हैं।
रात में बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
चित्रकूट। जिला अस्पताल में रात में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। अस्पताल में बनी पुलिस चौकी के अलावा इमरजेंसी और जच्चा बच्चा वार्ड की ओर होमगार्ड व पीआरडी की संख्या तीन कर दी गई है। अभी तक दो जवान ही डयूटी पर थे। सीएमएस डा. खरे ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया है।