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अफसरों की मक्कारी से पानी की मारामारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Apr 2016 01:49 AM IST
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सर्किट हाउस में जलकल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करते आश्वाशन समिति के चेयरमैन विधायक सतीश महाना।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। जिम्मेदार अधिकारियों की मक्कारी के कारण ही लाखों शहरवासियों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ा रहा है। शहर में जलापूर्ति सिस्टम सुधारने के लिए केडीए ने जलकल विभाग को 26 करोड़ रुपये दिए थे लेकिन लापरवाह अफसरों ने कार्य नहीं कराए।
शनिवार को समीक्षा बैठक में आश्वासन समिति के चेयरमैन सतीश महाना ने इस पर नाराजगी जताई और प्रदेश सरकार से जलकल विभाग के महाप्रबंधक जवाहर राम को हटाने की संस्तुति करने की चेतावनी दी। कहा कि जलकल विभाग और जल निगम में तालमेल के अभाव से जनता को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने अफसरों पर नाकारा होने का आरोप लगाया।
शहर में जल संकट के मद्देनजर आश्वासन समिति के चेयरमैन ने दोपहर में सर्किट हाउस में जलकल विभाग और जल निगम की समीक्षा बैठक की। चेयरमैन ने जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार न होने, दो हजार से ज्यादा हैंडपंप खराब होने पर जलकल विभाग के महाप्रबंधक को आड़े हाथों लिया। पूछा कि केडीए ने अक्तूबर 2014 में साउथ सिटी की गंगापुर, अर्रा बिनगवां, जरौली, दीनदयालपुरम आदि कालोनियां हस्तांतरित करते समय जलकल विभाग को 26 करोड़ रुपए दिये थे।
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उस धनराशि से संबंधित मोहल्लों में जलापूर्ति व्यवस्था क्यों नहीं सुधरी? जीएम और जोन-2 के अधिशासी अभियंता योगेश श्रीवास्तव को इसका गोलमोल जवाब देते देख चेयरमैन ने उनकी बात काटते हुए झूठ बोलने का आरोप लगाया। कहा कि 26 करोड़ रुपये से कार्य नहीं कराए गए।
जल निगम अफसरों से पूछा कि बैराज में बने 40 करोड़ लीटर क्षमता के दो ट्रीटमेंट प्लांटों से पर्याप्त पानी जनता को क्यों नहीं मिल रहा? इस पर जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर बीके सिंह ने जवाब दिया कि बैराज से रोज पांच करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है। सात करोड़ लीटर पानी दो-तीन दिन में बेनाझाबर वाटर वर्क्स को देने लगेंगे। टेस्टिंग में पाइप लाइनें फटने और पानी की बर्बादी के सवाल पर अफसर निरुत्तर रहे। चेयरमैन ने इसमें भ्रष्टाचार होने की बात कही।
हैंडपंप रीबोर न होने पर जल निगम के एई एफए खान और बेलाराम ने बताया कि सीएम ने हर विधानसभा क्षेत्र में 100-100 हैंडपंप नए लगने और इतने ही रीबोर कराने का एलान किया था, पर आदेश एवं धन न आने की वजह से यह कार्य नहीं हो पा रहा है। बैठक में जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश चौधरी, प्रोजेक्ट मैनेजर एके सिंह, जलकल विभाग के सभी जोनल अभियंता, एई, जेई शामिल रहे।
केंद्र से मिला बहुत पैसा
चेयरमैन ने बताया कि केंद्र सरकार ने 14 वें वित्त आयोग से नगर निगम को बहुत पैसा दिया है। नगर आयुक्त से इस धन से हर वार्ड में 10 - 10 हैंडपंप लगवाने को कहा गया है। चेयरमैन के अनुसार वे 10 अप्रैल को बेनाझाबर में बैराज की लाइन को जोड़ने से कार्य सहित अन्य कार्यों को जाकर देखेंगे।
‘पानी नहीं, मेट्रो सरकार की प्राथमिकता’
महाना ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता जनता को पानी उपलब्ध कराना नहीं बल्कि केवल लखनऊ मेट्रो रेल चालू कराने की है।
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शनिवार को समीक्षा बैठक में आश्वासन समिति के चेयरमैन सतीश महाना ने इस पर नाराजगी जताई और प्रदेश सरकार से जलकल विभाग के महाप्रबंधक जवाहर राम को हटाने की संस्तुति करने की चेतावनी दी। कहा कि जलकल विभाग और जल निगम में तालमेल के अभाव से जनता को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने अफसरों पर नाकारा होने का आरोप लगाया।
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शहर में जल संकट के मद्देनजर आश्वासन समिति के चेयरमैन ने दोपहर में सर्किट हाउस में जलकल विभाग और जल निगम की समीक्षा बैठक की। चेयरमैन ने जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार न होने, दो हजार से ज्यादा हैंडपंप खराब होने पर जलकल विभाग के महाप्रबंधक को आड़े हाथों लिया। पूछा कि केडीए ने अक्तूबर 2014 में साउथ सिटी की गंगापुर, अर्रा बिनगवां, जरौली, दीनदयालपुरम आदि कालोनियां हस्तांतरित करते समय जलकल विभाग को 26 करोड़ रुपए दिये थे।
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उस धनराशि से संबंधित मोहल्लों में जलापूर्ति व्यवस्था क्यों नहीं सुधरी? जीएम और जोन-2 के अधिशासी अभियंता योगेश श्रीवास्तव को इसका गोलमोल जवाब देते देख चेयरमैन ने उनकी बात काटते हुए झूठ बोलने का आरोप लगाया। कहा कि 26 करोड़ रुपये से कार्य नहीं कराए गए।
जल निगम अफसरों से पूछा कि बैराज में बने 40 करोड़ लीटर क्षमता के दो ट्रीटमेंट प्लांटों से पर्याप्त पानी जनता को क्यों नहीं मिल रहा? इस पर जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर बीके सिंह ने जवाब दिया कि बैराज से रोज पांच करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है। सात करोड़ लीटर पानी दो-तीन दिन में बेनाझाबर वाटर वर्क्स को देने लगेंगे। टेस्टिंग में पाइप लाइनें फटने और पानी की बर्बादी के सवाल पर अफसर निरुत्तर रहे। चेयरमैन ने इसमें भ्रष्टाचार होने की बात कही।
हैंडपंप रीबोर न होने पर जल निगम के एई एफए खान और बेलाराम ने बताया कि सीएम ने हर विधानसभा क्षेत्र में 100-100 हैंडपंप नए लगने और इतने ही रीबोर कराने का एलान किया था, पर आदेश एवं धन न आने की वजह से यह कार्य नहीं हो पा रहा है। बैठक में जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश चौधरी, प्रोजेक्ट मैनेजर एके सिंह, जलकल विभाग के सभी जोनल अभियंता, एई, जेई शामिल रहे।
केंद्र से मिला बहुत पैसा
चेयरमैन ने बताया कि केंद्र सरकार ने 14 वें वित्त आयोग से नगर निगम को बहुत पैसा दिया है। नगर आयुक्त से इस धन से हर वार्ड में 10 - 10 हैंडपंप लगवाने को कहा गया है। चेयरमैन के अनुसार वे 10 अप्रैल को बेनाझाबर में बैराज की लाइन को जोड़ने से कार्य सहित अन्य कार्यों को जाकर देखेंगे।
‘पानी नहीं, मेट्रो सरकार की प्राथमिकता’
महाना ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता जनता को पानी उपलब्ध कराना नहीं बल्कि केवल लखनऊ मेट्रो रेल चालू कराने की है।