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UP में गिद्धों का हो रहा सफाया, एक इंजेक्शन बना है बड़ी वजह

Mon, 17 Jul 2017 01:39 AM IST
पंकज शर्मा, अमर उजाला, कानपुर
पंकज शर्मा, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 17 Jul 2017 01:39 AM IST
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vulture is completely lost in Uttar pradesh
डेमो
यूं तो कई प्रजातियों के पक्षियों का विलुप्त होने का सिलसिला सालों से चला आ रहा है। लेकिन सरकार भी इन्हें बचाने के लिए हमेशा कोशिशों में जुटी रहती है। ऐसी ही एक प्रजाति गिद्धों की है जो इस समय विलुप्त होने के कगार पर है...
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देश भर में कई दशकों से लगातार विलुप्त हो रहे गिद्ध अब उत्तर प्रदेश में भी शायद कहीं नजर न आएं। बांदा जिले के वन विभाग की ताजा पक्षी गणना में इनका पूरी तरह सफाया हो गया है। पिछली गणना में जिले में 5 गिद्ध पाए गए थे। उधर, वन विभाग के मुताबिक सारस की संख्या बढ़ रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले अबकी हुई गणना में 421 सारस पाए गए हैं। पिछली गणना में 380 थे।

यूं तो कई प्रजातियों के पक्षियों का विलुप्त होने का सिलसिला सालों से चला आ रहा है। इनमें कौवा, गौरैय्या आदि भी शामिल हैं। गिद्धों का विलुप्त होना एक दशक से भी ज्यादा पूर्व से शुरू हो गया था। बुंदेलखंड और खासकर बांदा जनपद में दो दशकों के पूर्व तक गिद्धों की भरमार थी।

शहर की आबादी से लेकर गांवों तक इनके झुंड नजर आते थे। अब यह नदारद हैं। पिछले माह जून में वन विभाग ने वर्ष 2017 की पक्षी गणना कराई थी। इसमें वन विभाग कर्मी और लेखपालों को लगाया गया था। गणना के बाद वन विभाग का कहना है कि गिद्ध पूरी तरह गुम हो गए हैं। पिछले वर्ष ऐतिहासिक कालिंजर दुर्ग के आसपास देखे गए थे। अबकी वहां भी नदारद हैं। गणना टीम को कहीं गिद्ध नजर नहीं आए।

उधर, नदी, तालाब, खेत आदि में बड़ी संख्या में नजर आने वाले सारस भी अब धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। पहले जैसे बड़े झुंड नजर नहीं आ रहे। हालांकि पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष इनकी संख्या में वृद्धि बताई जा रही है। वन विभाग के मुताबिक वर्ष 2015 में जनपद में 363 सारस थे। वर्ष 2016 में इनकी संख्या बढ़कर 380 हो गई। अब ताजी गणना में सारसों की तादाद 421 हो गई है। उप प्रभागीय वनाधिकारी टीएन सिंह ने बताया कि गणना में 56 वन कर्मी और 84 प्रशिक्षार्थी लेखपाल लगाए गए थे। 

 
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पशुओं के दुधारू इंजेक्शन बने गिद्धों की मौत का सबब
उप प्रभागीय वनाधिकारी टीएन सिंह ने बताया कि मोबाइल टावरों के रेडिएशन और खेतों में रासायनिक पदार्थों व कीटनाशक के इस्तेमाल से पक्षियों की कई प्रजातियां तेजी से खत्म हो रही हैं। गिद्ध भी इसी का शिकार हुए। उन्होंने बताया कि मवेशियों में दूध बढ़ाने के लिए आक्सीटोसन इंजेक्शन लगाया जा रहा है। यह पशुओं के मांस को जहरीला बना देता है। पशु के मरने पर गिद्ध इसे खाकर मर जाते हैं।

 
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सारस ‘राज्य पक्षी’, शिकार पर जेल
बांदा। उड़ने वाले पक्षियों में सारस सबसे बड़ा और भारी भरकम है। इसे ‘राज्य पक्षी’ का दर्जा हासिल है। इसके शिकार पर प्रतिबंध है। शिकार करने पर संबंधित व्यक्ति पर वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई होती है। इसमें न्यूनतम 6 माह की जेल और जुर्माना की सजा है। एसडीओ (वन) ने बताया कि जिले में सारस के शिकार का कोई मामला दर्ज नहीं है।

-गिद्ध पूरी तरह गुम, सारसों की संख्या 41 बढ़ी
-पिछले वर्ष गणना में पाए गए थे पांच गिद्ध
-अबकी जनपद में गिद्धों का पूरी तरह सफाया
-सारस 380 से बढ़कर 421 हो गए


 
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