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कानपुर: नगर निगम ने सूचना के अधिकार की उड़ाई खिल्ली, अपने ही कर्मी को पौने तीन साल नहीं दी सूचना
Tue, 10 Aug 2021 10:13 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 10 Aug 2021 10:13 PM IST
सार
राज्य सूचना आयुक्त आरटीआई के ऐसे मामलों की सुनवाई करने आए हैं, जिनका नगर निगम ने अभी तक जवाब नहीं दिया है।
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नगर निगम में जन सुनवाई करते राज्य सूचना आयुक्त
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर में नगर निगम के मीटिंग हॉल में सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त सुभाष चंद्र सिंह ने दूसरे दिन मंगलवार को 31 मामले निपटाए और 10 मामलों में आगे की तारीख दी। एक मामला ऐसा भी उनके सामने आया, जिसमें नगर निगम अपने ही कर्मचारी को दो साल नौ महीने से सूचना के लिए टहला रहा था।
सूचना आयुक्त ने 10 दिन के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। राज्य सूचना आयुक्त आरटीआई के ऐसे मामलों की सुनवाई करने आए हैं, जिनका नगर निगम ने अभी तक जवाब नहीं दिया है। इसी क्रम में नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग के स्विच मैन राकेश कुमार का मामला उनके सामने पहुंचा।
15 नवंबर 2018 को उन्होंने आरटीआई के तहत नगर निगम से अपनी सेवा पुस्तिका की प्रमाणित कापी मांगी थी। राज्य सूचना आयुक्त ने कार्मिक विभाग के मुख्य अभियंता आरके पाल को 10 दिन में सेवा पुस्तिका की कापी देने को कहा है। वहीं विश्वनाथ गुप्ता की शिकायत लोकहित की न होने के कारण खारिज कर दी।
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सूचना आयुक्त ने 10 दिन के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। राज्य सूचना आयुक्त आरटीआई के ऐसे मामलों की सुनवाई करने आए हैं, जिनका नगर निगम ने अभी तक जवाब नहीं दिया है। इसी क्रम में नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग के स्विच मैन राकेश कुमार का मामला उनके सामने पहुंचा।
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15 नवंबर 2018 को उन्होंने आरटीआई के तहत नगर निगम से अपनी सेवा पुस्तिका की प्रमाणित कापी मांगी थी। राज्य सूचना आयुक्त ने कार्मिक विभाग के मुख्य अभियंता आरके पाल को 10 दिन में सेवा पुस्तिका की कापी देने को कहा है। वहीं विश्वनाथ गुप्ता की शिकायत लोकहित की न होने के कारण खारिज कर दी।
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नगर निगम को नहीं पता मकान नंबर
नौघड़ा के रहने वाले दिनेश चंद्र गुप्ता ने तीन नवंबर 2018 को नगर निगम से चक 83 के रेलवे फाटक संख्या 20 डी और रेलवे फाटक संख्या 79ए(ई) के बीच दर्ज मकानों की संख्या पूछी तो नगर निगम ने जवाब में बताया कि मकानों का विवरण अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं। जबकि नगर निगम इन मकानों से गृहकर और जलकर वसूलता है। राज्य सूचना आयुक्त ने मामले का निस्तारण कराया।
आज 33 मामलों की सुनवाई
मंगलवार को 41 मामलों की सुनवाई होनी थी, जिसमें 31 निस्तारित कर दिए गए। नौ मामलों में आठ सितंबर और एक मामले में 15 नवंबर की तारीख लगाई गई है। सूचना आयुक्त ने बताया कि 21 मामलों में ही शिकायतकर्ता पेश हुए। आयुक्त ने कहा कि वे चाहते थे कि वादी और प्रतिवादी आमने सामने आएं लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस दौरान अपर नगर आयुक्त द्वितीय अरविंद राय, सभी जोनों के जन सूचना अधिकारी और आरटीआई डेस्क से जुड़े कर्मचारी मौजूद रहे। बुधवार को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 तक 33 मामलों की सुनवाई होगी।
नौघड़ा के रहने वाले दिनेश चंद्र गुप्ता ने तीन नवंबर 2018 को नगर निगम से चक 83 के रेलवे फाटक संख्या 20 डी और रेलवे फाटक संख्या 79ए(ई) के बीच दर्ज मकानों की संख्या पूछी तो नगर निगम ने जवाब में बताया कि मकानों का विवरण अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं। जबकि नगर निगम इन मकानों से गृहकर और जलकर वसूलता है। राज्य सूचना आयुक्त ने मामले का निस्तारण कराया।
आज 33 मामलों की सुनवाई
मंगलवार को 41 मामलों की सुनवाई होनी थी, जिसमें 31 निस्तारित कर दिए गए। नौ मामलों में आठ सितंबर और एक मामले में 15 नवंबर की तारीख लगाई गई है। सूचना आयुक्त ने बताया कि 21 मामलों में ही शिकायतकर्ता पेश हुए। आयुक्त ने कहा कि वे चाहते थे कि वादी और प्रतिवादी आमने सामने आएं लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस दौरान अपर नगर आयुक्त द्वितीय अरविंद राय, सभी जोनों के जन सूचना अधिकारी और आरटीआई डेस्क से जुड़े कर्मचारी मौजूद रहे। बुधवार को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 तक 33 मामलों की सुनवाई होगी।