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Vinay Pathak Case: विश्वविद्यालयों में हुई नियुक्तियों पर उठे सवाल, कॉल डिटेल खोलेगी वसूली की पोल

Sun, 06 Nov 2022 11:15 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 06 Nov 2022 11:15 AM IST
सार

प्रोफेसर विनय पाठक के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर भी सवाल उठने लगे हैं। कल्याणपुर निवासी डॉ. घनश्याम मिश्रा ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया में प्रथम स्थान पर था, पैसा नहीं दिया तो भर्ती नहीं की गई। वहीं, एसटीएफ कुलपति के करीबी अजय मिश्रा की कॉल डिटेल खंगालने में जुटी है।

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Vinay Pathak Case, call details will open the poll of recovery
प्रो. विनय कुमार पाठक - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर विवि के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के करीबी अजय मिश्रा की कॉल डिटेल विवि में कराए गए विभिन्न कार्यों के भुगतान के एवज में की गई वसूली की पोल खोलेगी। एसटीएफ अजय मिश्रा की कॉल डिटेल खंगालने में जुट गई है। एसटीएफ को जांच में पता लगा है कि अजय व उसके सहयोगियों की एजेंसी आगरा विवि में ही नहीं बल्कि सीएसजेएमयू, लखनऊ विवि में भी परीक्षा संबंधी कार्य देख रही थी।

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विवि में प्रोफेसर पाठक के कुलपति बनने के बाद पहली बार डिजिटल मूल्यांकन कराया गया है। सूत्र बताते हैं कि कॉपियों की स्कैनिंग, कोडिंग समेत कई काम अजय के इशारों पर ही उसके एक करीबी की एजेंसी को दिए गए हैं। एजेंसी को एडवांस में भी पैसा दिया गया था। परीक्षा भवन के पीछे वाली बिल्डिंग में कोडिंग व स्कैनिंग का गोपनीय काम शुरू कराया गया था।

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भवन में विवि के कुछ चुनिंदा अधिकारियों का ही आना-जाना होता था। विवि में काम करने वाली एजेंसियों को कब-कब कितना कितना पैसा दिया गया है, एसटीएफ इसकी भी पड़ताल कर रही है। वहीं, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में 2021 और 2022 में हुई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया पर कल्याणपुर निवासी डॉ. घनश्याम मिश्रा ने सवाल उठाए हैं।

इनका आरोप है कि प्रक्रिया में पहले स्थान पर आए थे। प्रोफेसरों ने तीन लाख रुपये मांगे थे। पैसा नहीं दिया, तो चयन नहीं किया गया। कमीशनखोरी में फंसे विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के कार्यकाल में हुईं नियुक्तियों में अब अनियमितता के आरोप लगना शुरू हो गए हैं। डॉ. घनश्याम ने अक्तूबर 2021 में निकली भर्ती में प्रतिभाग किया था। उनका कहना है कि 20 अक्तूबर को परीक्षा की औपचारिकता पूरी की गई।

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इन्होंने विवि के दो प्रोफेसरों पर तीन लाख रुपये की मांग करने का आरोप लगाया है। आरोप लगाया कि पैसा नहीं दिया था, उसी दिन शाम पांच बजे ही तीन दावेदारों की नियुक्ति करा दी गई थी। इसके बाद 2022 में निकली भर्ती में आवेदन के बाद 21 अगस्त को लिखित परीक्षा हुई, जिसमें 110 अंकों के साथ पहले स्थान पर था। लेकिन कम अंक लाने वालों की भर्ती हो गई, लेकिन उनको नियुक्ति नहीं दी गई।

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