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Kanpur News: गणित को आनंददायक बनाने के लिए करें पहेलियों का उपयोग
Fri, 21 Aug 2026 12:41 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 21 Aug 2026 12:41 AM IST
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रसूलाबाद। संख्याओं को पहचानने, लिखने और सरल गणितीय क्रियाओं का अभ्यास करने के लिए नियमित रूप से वर्कशीट कराएं। गणित को आनंददायक बनाने के लिए खेल और पहेलियों का उपयोग करें। ये बातें समग्र शिक्षा एवं निपुण भारत मिशन के तहत चंद्रप्रभा शर्मा डिग्री कॉलेज रसूलाबाद में चल रहे पांच दिवसीय प्रशिक्षण के तीसरे बैच के प्रशिक्षण में बृहस्पतिवार को एआरपी सोनू सिंह ने शिक्षकों से कही।
उन्होंने कहा कि बच्चों को गणित पढ़ाते समय गणित को आसपास के वातावरण तथा वास्तविक दुनिया से जोड़ें जिससे बच्चे समझ सकें कि गणित उनके जीवन में कैसे उपयोगी है। बच्चों को प्रश्न पूछने और प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें। एआरपी पारुल निरंजन ने शिक्षकों से कहा कि गणित विषय को बच्चों के लिए रुचिकर बनाने के लिए उनके आसपास की चीजों में संख्याओं और आकृतियों के उदाहरण दें। गणित के प्रति उनके डर को कम करने के लिए सकारात्मक और उत्साहजनक माहौल बनाएं।
संदर्भदाता हिमांशु गुप्ता ने ब्लेंडिंग और ग्रिड के माध्यम से शब्द पठन के अभ्यास कार्य के महत्व को शिक्षकों को बताया। संदर्भदाता शैलेश पाल ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को गिनती सिखाने के लिए असली वस्तुओं जैसे कंकड़, फल, बटन आदि का उपयोग करें। बच्चों को आकृतियों और उनके गुणों की पहचान करना सिखाएं। संदर्भदाता दिनेश कुमार ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को वस्तुएं छांटने, समूहीकृत करने व आकार और भार के अनुसार उनमें अंतर करना सिखाएं। प्रशिक्षण में अखंड प्रताप, आरती सिंह, विनीत कुमार, अर्चना मिश्रा, संध्या पांडेय, सावित्री देवी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि बच्चों को गणित पढ़ाते समय गणित को आसपास के वातावरण तथा वास्तविक दुनिया से जोड़ें जिससे बच्चे समझ सकें कि गणित उनके जीवन में कैसे उपयोगी है। बच्चों को प्रश्न पूछने और प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करें। एआरपी पारुल निरंजन ने शिक्षकों से कहा कि गणित विषय को बच्चों के लिए रुचिकर बनाने के लिए उनके आसपास की चीजों में संख्याओं और आकृतियों के उदाहरण दें। गणित के प्रति उनके डर को कम करने के लिए सकारात्मक और उत्साहजनक माहौल बनाएं।
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संदर्भदाता हिमांशु गुप्ता ने ब्लेंडिंग और ग्रिड के माध्यम से शब्द पठन के अभ्यास कार्य के महत्व को शिक्षकों को बताया। संदर्भदाता शैलेश पाल ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को गिनती सिखाने के लिए असली वस्तुओं जैसे कंकड़, फल, बटन आदि का उपयोग करें। बच्चों को आकृतियों और उनके गुणों की पहचान करना सिखाएं। संदर्भदाता दिनेश कुमार ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को वस्तुएं छांटने, समूहीकृत करने व आकार और भार के अनुसार उनमें अंतर करना सिखाएं। प्रशिक्षण में अखंड प्रताप, आरती सिंह, विनीत कुमार, अर्चना मिश्रा, संध्या पांडेय, सावित्री देवी आदि मौजूद रहे।
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