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यूपीपीएससी परिणाम: स्कूल में पढ़ाकर भरी फीस, तारा शुक्ला बनीं नायब तहसीलदार, इन्होंने भी पाई सफलता
Wed, 17 Feb 2021 11:34 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 17 Feb 2021 11:34 PM IST
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यूपीपीएससी परिणाम के टॉपर
- फोटो : अमर उजाला
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परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। स्कूल की पढ़ाई जैसे हुई तो कॉलेज में फीस जमा के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में एक प्राइवेट स्कूल में बहुत कम मानदेय में पढ़ाने लगी और फीस भरी। यह कहना है यूपीपीएससी 2019 के परिणाम में नायब तहसीलदार पद पर चयनित हुईं कानपुर के दामोदर नगर निवासी तारा शुक्ला का। तीसरे प्रयास में सफलता पाने वालीं तारा ने तैयारी उत्कर्ष अकादमी से की थी। उन्होंने बताया कि 15 साल पहले देहरादून से कानपुर शिफ्ट होने से पहले पिता रवि चंद्र शुक्ला देहरादून में ही पंडिताई करते थे। माता प्रार्थना शुक्ला गृहिणी, छोटी बहन गीता शुक्ला हापुड़ में शिक्षिका हैं।
भाई विशाल ग्रेजुएशन कर रहा है। उन्होंने पहली बार 2016 में परीक्षा दी थी जिसमें 0.66 अंक से उनका चयन होने से रह गया था। फिर 2018 में परीक्षा की तैयारी के दौरान ही मां की तबीयत इतनी खराब हो गई कि यहां के सभी अस्पतालों ने जवाब दे दिया। फिर पीजीआई में उनका इलाज कराया। प्री पेपर भी नहीं पास कर पाई। साल बेकार गया पर खुशी इतनी है कि मां सही हो गईं। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू के दौरान काफी नर्वस हो गई थीं लेकिन धीरे-धीरे सभी सवालों के सही जवाब दिए।
बिटिया ने पूरा किया पापा का सपना
केशव नगर निवासी रिद्धि बगारिया का सहायक आयुक्त उद्योग के पद पर चयन हुआ है। उन्होंने बताया कि दो बार साक्षात्कार तक पहुंची थीं पर सफलता नहीं मिली। तीसरे प्रयास में सफलता पाकर पापा का सपना पूरा कर दिया है। नौबस्ता के मदर टेरेसा मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं और जागरण कॉलेज से स्नातक और परास्नातक की परीक्षा पास की है। रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई के बाद सफलता मिली है। रिद्धि ने अंग्रेजी माध्यम से इतिहास विषय की परीक्षा दी थी। पिता गोविंद बगारिया व्यापारी और मां ममता गृहिणी हैं।
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भाई विशाल ग्रेजुएशन कर रहा है। उन्होंने पहली बार 2016 में परीक्षा दी थी जिसमें 0.66 अंक से उनका चयन होने से रह गया था। फिर 2018 में परीक्षा की तैयारी के दौरान ही मां की तबीयत इतनी खराब हो गई कि यहां के सभी अस्पतालों ने जवाब दे दिया। फिर पीजीआई में उनका इलाज कराया। प्री पेपर भी नहीं पास कर पाई। साल बेकार गया पर खुशी इतनी है कि मां सही हो गईं। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू के दौरान काफी नर्वस हो गई थीं लेकिन धीरे-धीरे सभी सवालों के सही जवाब दिए।
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बिटिया ने पूरा किया पापा का सपना
केशव नगर निवासी रिद्धि बगारिया का सहायक आयुक्त उद्योग के पद पर चयन हुआ है। उन्होंने बताया कि दो बार साक्षात्कार तक पहुंची थीं पर सफलता नहीं मिली। तीसरे प्रयास में सफलता पाकर पापा का सपना पूरा कर दिया है। नौबस्ता के मदर टेरेसा मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं और जागरण कॉलेज से स्नातक और परास्नातक की परीक्षा पास की है। रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई के बाद सफलता मिली है। रिद्धि ने अंग्रेजी माध्यम से इतिहास विषय की परीक्षा दी थी। पिता गोविंद बगारिया व्यापारी और मां ममता गृहिणी हैं।
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एयरफोर्स में नौकरी की, रिटायर हुए, अब बने विधि अधिकारी
बिल्हौर के बैंदीकलीपुर गांव निवासी नवीन कुमार लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में विधि अधिकारी के पद पर चयनित हुए हैं। उन्होंने बताया कि 1994 में 12वीं करने के बाद 1995 में वायुसेना में एयरमैन पद पर नौकरी मिल गई थी। इसी दौरान डीएसएन कॉलेज उन्नाव से प्राइवेट स्नातक, सीएसजेएमयू से परास्नातक और बीएनडी कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की।
नौकरी के दौरान ही साथियों को सिविल सेवाओं की परीक्षा की तैयारी करता देख उन्होंने भी तैयारी तैयारी शुरू की। 2015 में वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी तैयारी करते रहे। उनको तीसरे प्रयास में सफलता मिली है। वह सफलता का श्रेय पत्नी ममता को देते हैं। उन्होंने लॉ विषय की परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से दी थी। पिता गंगा महेश पांडेय किसान और मां मुनेश कुमारी पांडेय गृहिणी हैं।
नायब तहसीलदार शिखर बने कार्याधिकारी
कन्नौज जिले के कासगंज में मौसी के घर पर रहकर स्नातक की पढ़ाई करने के दौरान सोचा क्यों न प्रशासनिक सेवाओं में किस्मत आजमाई जाए। कोचिंग में देने के लिए पैसे नहीं थे, तब किदवई नगर निवासी ताऊ सुरेंद्र नाथ मिश्रा ने कोचिंग की फीस दी थी। उन्हीं के घर पर रहकर पढ़ाई की। इसके बाद यूपीपीएससी 2017 में तहसीलदार पद पर चयन हुआ था। यह कहना है यूपीपीएससी के जारी परिणामों में कार्याधिकारी पद पर चयनित शिखर मिश्रा का। मूल रूप से फर्रुखाबाद के रहने वाले शिखर मई 2020 से कन्नौज जिले की छिबरामऊ तहसील में नायब तहसीलदार पद पर कार्यरत हैं। मां रंजना मिश्रा गृहिणी और पिता मनोज मिश्रा हैं। उन्होंने अंग्रेजी माध्यम से लोक प्रशासन विषय की परीक्षा दी थी।
बिल्हौर के बैंदीकलीपुर गांव निवासी नवीन कुमार लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में विधि अधिकारी के पद पर चयनित हुए हैं। उन्होंने बताया कि 1994 में 12वीं करने के बाद 1995 में वायुसेना में एयरमैन पद पर नौकरी मिल गई थी। इसी दौरान डीएसएन कॉलेज उन्नाव से प्राइवेट स्नातक, सीएसजेएमयू से परास्नातक और बीएनडी कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की।
नौकरी के दौरान ही साथियों को सिविल सेवाओं की परीक्षा की तैयारी करता देख उन्होंने भी तैयारी तैयारी शुरू की। 2015 में वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी तैयारी करते रहे। उनको तीसरे प्रयास में सफलता मिली है। वह सफलता का श्रेय पत्नी ममता को देते हैं। उन्होंने लॉ विषय की परीक्षा अंग्रेजी माध्यम से दी थी। पिता गंगा महेश पांडेय किसान और मां मुनेश कुमारी पांडेय गृहिणी हैं।
नायब तहसीलदार शिखर बने कार्याधिकारी
कन्नौज जिले के कासगंज में मौसी के घर पर रहकर स्नातक की पढ़ाई करने के दौरान सोचा क्यों न प्रशासनिक सेवाओं में किस्मत आजमाई जाए। कोचिंग में देने के लिए पैसे नहीं थे, तब किदवई नगर निवासी ताऊ सुरेंद्र नाथ मिश्रा ने कोचिंग की फीस दी थी। उन्हीं के घर पर रहकर पढ़ाई की। इसके बाद यूपीपीएससी 2017 में तहसीलदार पद पर चयन हुआ था। यह कहना है यूपीपीएससी के जारी परिणामों में कार्याधिकारी पद पर चयनित शिखर मिश्रा का। मूल रूप से फर्रुखाबाद के रहने वाले शिखर मई 2020 से कन्नौज जिले की छिबरामऊ तहसील में नायब तहसीलदार पद पर कार्यरत हैं। मां रंजना मिश्रा गृहिणी और पिता मनोज मिश्रा हैं। उन्होंने अंग्रेजी माध्यम से लोक प्रशासन विषय की परीक्षा दी थी।