UP Weather: सर्दी में तोड़ा गर्मी ने रिकॉर्ड, विशेषज्ञ बोले- जलवायु परिवर्तन का असर, अब फरवरी तक पड़ेगी सर्दी
10 वर्षों में पहली बार दिसंबर के दूसरे सप्ताह में 27 और 13 डिग्री तापमान पहुंचा है। पिछले पांच दिनों में पांच डिग्री न्यूनतम तापमान बढ़ा है। वहीं, अधिकतम तापमान भी सामान्य से ज्यादा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार,यह जलवायु परिवर्तन का असर है।
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जलवायु परिवर्तन की वजह से इस बार सर्दी में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ डाला है। पिछले 10 वर्षों में पहली बार दिसंबर के दूसरे सप्ताह में अधिकतम तापमान 27 और न्यूनतम 13 डिग्री से ऊपर रिकॉर्ड किया गया है। दोपहर 12 बजे कड़ी धूप की तपिश से लोग गर्मी का अहसास कर रहे हैं। धूप सेंकने के बजाय लोग छांव खोजने लग रहे हैं।
मौसम विभाग के अनुसार सर्दी का सीजन आगे खिसकने के आसार हैं। जाड़े का मौसम पूरी फरवरी तक जा सकता है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने की वजह से शुष्क मौसम बन रहा है, जिससे तापमान में बढ़ोतरी हो रही है।
पिछले पांच दिनों से पांच डिग्री न्यूनतम तापमान बढ़ चुका है। नौ दिसंबर को न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री आ गया था, हालांकि अधिकतम तापमान 25 डिग्री था। मंगलवार को अधिकतम तापमान 27.2 और न्यूनतम 13.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
दिसंबर के मौसम में चलने वाली ठंडी हवाएं इस बार भी चल रही हैं। पिछले तीन दिनों से हवा की रफ्तार में लगातार बढ़ोतरी होने के बावजूद ठंड पर असर नहीं पड़ रहा है। मंगलवार को हवा की रफ्तार 4.1 किमी प्रति घंटा रही।
पिछले पांच दिनों का न्यूनतम तापमान
09 दिसंबर 8.6
10 दिसंबर 09
11 दिसंबर 09
12 दिसंबर 11.2
13 दिसंबर 13.8
दिसंबर माह में अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम नौ डिग्री तक पारा सामान्य माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति असामान्य सी हो रही है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन ही वजह बन रही है। जलवायु परिवर्तन उस स्थिति में होता है जब किसी भी क्षेत्र में जमीन से उठने वाली उष्मा की मात्रा सामान्य से अधिक बढ़ जाती है। यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है। -डॉ. एसएन पांडेय मौसम विभाग प्रमुख सीएसए
फसलों के उत्पादन पर असर
मौसम में आए इस तरह के बदलाव की वजह इस सीजन की फसलों पर असर पड़ेगा। इससे फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। मौसम विभाग के अनुसार उच्च तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़, अकाल, चक्रवात में बढ़ोतरी, कृषि जैव विविधता के लिए भी संकट पैदा कर रहा है।
डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार उच्च तापमान वर्तमान वानस्पतिक वृद्धि फसलों ,सब्जियों की पैदावार को भी प्रभावित करता है। अत्यधिक गर्मी पौधे की जड़ के विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, जो सामूहिक रूप से उपज को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।