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UP: अगड़े-पिछड़ों के बीच फंसी जीत... ब्राह्मणों की नाराजगी, भाजपा के लिए बनी चुनौती; सपा को मिलेगा फायदा!
Thu, 16 May 2024 03:19 PM IST
शाहरुख खान
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, बांदा
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, बांदा
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 16 May 2024 03:19 PM IST
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UP lok Sabha Election 2024
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अमर उजाला
विस्तार
बांदा लोकसभा क्षेत्र का सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। ऋषि वामदेव की भूमि पर कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा और वामदल भी अपना परचम फहरा चुके हैं। केन और यमुना नदी के बीच इस क्षेत्र में अगड़ी और पिछड़ी जातियों का वोट अहम है। यही वजह है कि यहां से अब तक सात बार ब्राह्मण और पांच बार पटेल बिरादरी के प्रत्याशी को सांसद बनने का मौका मिला।इस बार जहां भाजपा और सपा ने पटेल बिरादरी पर दांव लगाया हैं तो बसपा ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतार दिया है। भाजपा से ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी ने यहां के सियासी समीकरण को रोचक ही नहीं बल्कि त्रिकोणीय बना दिया है। ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी ही भाजपा की असली चुनौती है।
फतेहपुर के रास्ते बांदा लोकसभा क्षेत्र में प्रवेश करते ही यहां बदलाव साफ दिखता है। बांदा मुख्यालय पर काबहरी के पास चाय की दुकान पर पहुंचे तो वहां अधिवक्ता और वादकारी आपस में चुनावी बहस करते दिखे। हम भी उसमें शरीक हुए। अधिवक्ता जयचंद वर्मा कहते हैं कि इस बार संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
अधिवक्ता श्याम सुंदर कहते हैं कि 10 साल में बेरोजगारी बढ़ गई है। इसे रोकने के लिए सरकार बदलनी जरूरी है। राम मिलन सिंह पटेल कहते हैं कि उनकी बिरादरी के भाजपा और सपा के उम्मीदवार है, लेकिन भाजपा को सांसद के प्रति नाराजगी का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अहसान अली महंगाई को भाजपा की देन बताते हैं। नरैनी विधानसभा क्षेत्र में अतर्रा कस्बे के डॉ बंसराज सिंह भी भाजपा के साथ हैं। यहीं के देव प्रकाश मिश्र अभी तक भाजपा को वोट देते थे, लेकिन इस बार बसपा के साथ हैं। बबेरू में विनय शंकर श्रीवास्तव प्रत्याशी नहीं मोदी को वोट देंगे। यहां पवन यादव साइकिल की गति तेज होने की दुहाई देते हैं।
वोट मोदी को ही देंगे
हम मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रयागराज रोड होते हुए पहाड़ी से घिरे ग्राम पंचायत भौरी में पहुंचे। यहां पेड़ के नीचे कई लोग बैठे मिले। मतदान के बारे में पूछने पर कहते हैं कि लड़ाई कांटे की है। ब्रजेश कहते हैं कि दलितों में राशन का असर है। भाजपा ने हर घर नल पहुंचा दिया है। शिवराजी, पंचमी और राम सुरती कहती हैं कि राशन तो मिल रहा है, लेकिन नल से नियमित पानी नहीं आता। ऐसे में दूर से पानी लाना पड़ता ह। लेकिन वोट मोदी को देंगे।
हम मानिकपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रयागराज रोड होते हुए पहाड़ी से घिरे ग्राम पंचायत भौरी में पहुंचे। यहां पेड़ के नीचे कई लोग बैठे मिले। मतदान के बारे में पूछने पर कहते हैं कि लड़ाई कांटे की है। ब्रजेश कहते हैं कि दलितों में राशन का असर है। भाजपा ने हर घर नल पहुंचा दिया है। शिवराजी, पंचमी और राम सुरती कहती हैं कि राशन तो मिल रहा है, लेकिन नल से नियमित पानी नहीं आता। ऐसे में दूर से पानी लाना पड़ता ह। लेकिन वोट मोदी को देंगे।
चित्रकूट में बदली चाल
चित्रकूट के खोही गांव में चाय की दुकान पर बैठे आदित्य त्रिपाठी कहते हैं कि इस बार ब्राह्मण हाथी के साथ रहेगा। क्योंकि यहां बेरोजगारी अधिक है। संसाधनों की कमी है। मुन्ना लाल अवस्थी कहते है कि ब्राह्मणों की बदौलत भाजपा चुनाव जीतती रही है। मोदी- योगी से नाराजगी नहीं है, लेकिन उम्मीदवार ठीक नहीं है। इसलिए यहां की लड़ाई सपा और बसपा के बीच है।
चित्रकूट के खोही गांव में चाय की दुकान पर बैठे आदित्य त्रिपाठी कहते हैं कि इस बार ब्राह्मण हाथी के साथ रहेगा। क्योंकि यहां बेरोजगारी अधिक है। संसाधनों की कमी है। मुन्ना लाल अवस्थी कहते है कि ब्राह्मणों की बदौलत भाजपा चुनाव जीतती रही है। मोदी- योगी से नाराजगी नहीं है, लेकिन उम्मीदवार ठीक नहीं है। इसलिए यहां की लड़ाई सपा और बसपा के बीच है।
इसलिए बदले समीकरण
ब्राह्मणों के बीच भाजपा उम्मीदवार के प्रति नाराजगी दिख रही है। पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र घर से नहीं निकल रहे हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके लोगों ने क्षेत्र में आने से मना किया है। चित्रकूट के पूर्व विधायक आनंद शुक्ला भी घर बैठे हैं। ये दोनों नेता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जेपी नड्डा की सभा में भी नहीं दिखे। चित्रकूट में मिले श्याम शुक्ला कहते हैं कि पटेल पार्टी नहीं अपनी बिरादरी को वोट देते हैं। इसलिए इस चुनाव में ब्राह्मण भी लामबंद हैं।
ब्राह्मणों के बीच भाजपा उम्मीदवार के प्रति नाराजगी दिख रही है। पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र घर से नहीं निकल रहे हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके लोगों ने क्षेत्र में आने से मना किया है। चित्रकूट के पूर्व विधायक आनंद शुक्ला भी घर बैठे हैं। ये दोनों नेता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जेपी नड्डा की सभा में भी नहीं दिखे। चित्रकूट में मिले श्याम शुक्ला कहते हैं कि पटेल पार्टी नहीं अपनी बिरादरी को वोट देते हैं। इसलिए इस चुनाव में ब्राह्मण भी लामबंद हैं।
बिरादरी के वोट का सहारा
आरके पटेल : चित्रकूट निवासी आरके पटेल को भाजपा ने दोबारा चुनाव मैदान में उतारा है। वह 2009 में सपा के टिकट पर सांसद बने थे। 2014 में बसपा में गए और फिर भाजपा में आए। भाजपा के वोट के साथ बिरादरी का सहारा। ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पक्ष में रखने की चुनौती है।
आरके पटेल : चित्रकूट निवासी आरके पटेल को भाजपा ने दोबारा चुनाव मैदान में उतारा है। वह 2009 में सपा के टिकट पर सांसद बने थे। 2014 में बसपा में गए और फिर भाजपा में आए। भाजपा के वोट के साथ बिरादरी का सहारा। ब्राह्मण मतदाताओं को अपने पक्ष में रखने की चुनौती है।
गठबंधन का मिल सकता है लाभ
कृष्णा पटेल: सपा उम्मीदवार कृष्णा पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। उनके पति शिवशंकर सिंह पटेल भाजपा सरकार में मंत्री रहे हैं। फिर सपा में आ गए। सपा के वोट के साथ बिरादरी का वोट अपने पाले में करने की चुनौती भी है।
कृष्णा पटेल: सपा उम्मीदवार कृष्णा पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष रही हैं। उनके पति शिवशंकर सिंह पटेल भाजपा सरकार में मंत्री रहे हैं। फिर सपा में आ गए। सपा के वोट के साथ बिरादरी का वोट अपने पाले में करने की चुनौती भी है।
ब्राह्मणों को अपने पक्ष में रखने की चुनौती
मयंक द्विवेदी: बसपा उम्मीदवार मयंक द्विवेदी के पिता पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी नरैनी से विधायक थे। युवा चेहरा हैं। जिला पंचायत सदस्य हैं। दलित वोटों के साथ ब्राह्मणों का सहारा। ब्राह्मण वोटरों ने साथ दिया तो परिमाम बदल सकता है।
मयंक द्विवेदी: बसपा उम्मीदवार मयंक द्विवेदी के पिता पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी नरैनी से विधायक थे। युवा चेहरा हैं। जिला पंचायत सदस्य हैं। दलित वोटों के साथ ब्राह्मणों का सहारा। ब्राह्मण वोटरों ने साथ दिया तो परिमाम बदल सकता है।