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यूपी: काली कमाई से बीआईसी के बंगले खरीदे जाने की आशंका, तीन एजेंसियां जांच में जुटीं
Thu, 24 Dec 2020 05:19 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 24 Dec 2020 05:19 PM IST
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ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन (बीआईसी)
- फोटो : amar ujala
ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (बीआईसी) के 27 बंगलों की बिक्री में हुए भ्रष्टाचार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी पूर्व दो अधिकारियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूर्व सीएमडी केएस दुग्गल और पूर्व कंपनी सचिव केसी वाजपेयी पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने, अधिक मूल्य की संपत्ति कम में बेचने, राजस्व को नुकसान पहुंचाने, साजिश के तहत कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप है।
इसके अलावा आशंका है कि बंगलों को खरीदने में काले धन का भी इस्तेमाल किया गया है। इस कारण भी तीसरी एजेंसी के रूप में ईडी ने जांच शुरू की है। बंगलों की बिक्री 2002 से 2004 के बीच की गई है।
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तब 2000 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति महज 131 करोड़ रुपये में कुछ लोगों को बेच दी गई थी। मामले की जांच सीबीआई, आर्थिक अपराध शाखा के बाद अब ईडी ने भी शुरू की है।
हालांकि हैरत की बात यह है कि अरबों रुपये के इस घोटाले की जांच बीआईसी व कपड़ा मंत्रालय की आंतरिक और विजिलेंस विंग ने नहीं की। हालांकि विभाग के कुछ अफसर प्रयास करते रहे लेकिन सफल नहीं हो पाए।
इस बीच खरीदारों से मिले अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े तमाम दस्तावेज गायब भी करा दिए। कभी नामजद रिपोर्ट भी नहीं दर्ज की गई। चर्चा तो यहां तक रही कि कपड़ा मंत्रालय तक के लोग भी इस भ्रष्टाचार में शामिल थे।
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पूर्व सीएमडी केएस दुग्गल और पूर्व कंपनी सचिव केसी वाजपेयी पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने, अधिक मूल्य की संपत्ति कम में बेचने, राजस्व को नुकसान पहुंचाने, साजिश के तहत कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप है।
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इसके अलावा आशंका है कि बंगलों को खरीदने में काले धन का भी इस्तेमाल किया गया है। इस कारण भी तीसरी एजेंसी के रूप में ईडी ने जांच शुरू की है। बंगलों की बिक्री 2002 से 2004 के बीच की गई है।
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तब 2000 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति महज 131 करोड़ रुपये में कुछ लोगों को बेच दी गई थी। मामले की जांच सीबीआई, आर्थिक अपराध शाखा के बाद अब ईडी ने भी शुरू की है।
हालांकि हैरत की बात यह है कि अरबों रुपये के इस घोटाले की जांच बीआईसी व कपड़ा मंत्रालय की आंतरिक और विजिलेंस विंग ने नहीं की। हालांकि विभाग के कुछ अफसर प्रयास करते रहे लेकिन सफल नहीं हो पाए।
इस बीच खरीदारों से मिले अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े तमाम दस्तावेज गायब भी करा दिए। कभी नामजद रिपोर्ट भी नहीं दर्ज की गई। चर्चा तो यहां तक रही कि कपड़ा मंत्रालय तक के लोग भी इस भ्रष्टाचार में शामिल थे।